अमरजीत सिंह चावला से जुड़े दुष्कर्म मामले में पीड़ित महिलाओं को धमकियां मिलने का आरोप
अमृतसर। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के पूर्व सदस्य अमरजीत सिंह चावला से जुड़े दुष्कर्म मामले में श्री अकाल तख्त साहिब पर पेश होने जा रही पीड़ित महिलाओं को धमकियां मिलने के आरोप सामने आए हैं। पूर्व अकाली नेता बीबी रूप कौर संधू ने वीडियो जारी कर पंजाब के डीजीपी और श्री अकाल तख्त साहिब की टास्क फोर्स से पीड़ित महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
रूप कौर संधू ने दावा किया कि उन्होंने पीड़ित महिलाओं को साथ लेकर श्री अकाल तख्त साहिब में पेश होने और जत्थेदार को सबूत सौंपने का ऐलान किया था। इसके बाद उन्हें भी वहां नहीं जाने के लिए दबाव का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि कई महिलाओं ने उनसे संपर्क कर अपनी शिकायतें साझा की हैं। उनका उद्देश्य पीड़ितों को न्याय दिलाना और मामले से जुड़े सबूत धार्मिक नेतृत्व के सामने रखना है।
क्या है मामला?
यह मामला बहरीन में रहने वाली एक सिख महिला द्वारा एसजीपीसी के पूर्व सदस्य अमरजीत सिंह चावला और अन्य लोगों के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों से जुड़ा है। महिला ने आरोप लगाया कि नवंबर 2025 में भारत लौटने के बाद उसे एसजीपीसी की ओर से ठहरने की व्यवस्था उपलब्ध करवाई गई थी। उसके अनुसार, मार्च से मई 2026 के बीच श्री आनंदपुर साहिब और अमृतसर की सरायों में उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया गया तथा किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी गई।
रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में 21 अगस्त 2026 को आनंदपुर साहिब थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। महिला ने अतिरिक्त हेड ग्रंथी ज्ञानी मलकीत सिंह और तख्त श्री केसगढ़ साहिब के एक चालक मोहन सिंह पर अश्लील और आपत्तिजनक संदेश भेजने के आरोप भी लगाए हैं।
अकाल तख्त साहिब में सबूत सौंपने की तैयारी
रूप कौर संधू ने कहा कि पीड़ित महिला जत्थेदार साहिब से मिलकर अपने सबूत सौंपना चाहती है और संगत के सामने भी अपना पक्ष रखना चाहती है। उन्होंने मांग की कि महिलाओं को सुरक्षित माहौल उपलब्ध करवाया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई तो वे सोशल मीडिया पर सबूत सार्वजनिक करेंगी।
उल्लेखनीय है कि उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, 20 सितंबर 2026 को श्री अकाल तख्त साहिब के पंज सिंह साहिबान ने इस मामले में धार्मिक अनुशासन से संबंधित कार्रवाई करते हुए अमरजीत सिंह चावला और ज्ञानी मलकीत सिंह को खालसा पंथ से निष्कासित करने का निर्णय लिया था।
