आईटीआई में बागवानी, प्राकृतिक खेती तथा डेयरी तकनीक में एक वर्षीय पाठ्यकम शुरू: राजेश धर्माणी

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कौशल विकास को मिलेगा बढ़ावा, स्वरोजगार एवं उद्यमिता की दिशा में सशक्त होंगे युवा
एएम नाथ। बिलासपुर, 25 फरवरी: नगर एवं ग्राम नियोजन, आवास, तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक और औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के 6 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में बागवानी, प्राकृतिक खेती तथा डेयरी तकनीक पर आधरित एक वर्षीय सर्टिफिकेट कोर्स को प्रदेश सरकार ने शुरू करने की अनुमति प्रदान कर दी है। उन्होंने कहा कि कौशल विकास आधारित यह पाठ्यक्रम युवाओं को स्वरोजगार एवं उद्यमिता की दिशा में सशक्त बनाने में अहम कड़ी साबित होंगे। राजेश धर्माणी आज घुमारवीं में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रदेश के चयनित 6 राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में एक वर्षीय सर्टिफिकेट कोर्स प्रारम्भ करने का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में व्यावहारिक, रोजगारोन्मुखी तथा उद्योग-उपयुक्त कौशल प्रदान करना है, ताकि वह स्वरोजगार एवं उद्यमिता की दिशा में सशक्त हो सकें।
उन्होंने कहा कि आईटीआई घुमारवीं, जुब्बल तथा रिकांगपिओ में बागवानी, आईटीआई रैल तथा ठियोग में नैचुरल/ऑर्गेनिक फार्मिंग जबकि आईटीआई शाहपुर में डेयरी टेक्नोलॉजी का एक वर्षीय सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक संस्थान में प्रति बैच 30 प्रशिक्षुओं की प्रवेश क्षमता निर्धारित की गई है, ताकि गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
उन्होंने कहा कि इन पाठ्यक्रमों के प्रभावी संचालन के लिए कृषि, बागवानी तथा पशुपालन विभागों के विषय-विशेषज्ञ अतिथि संकाय के रूप में नियुक्त किए जाएंगे, ताकि प्रशिक्षणार्थियों को व्यवहारिक एवं तकनीकी ज्ञान प्राप्त हो सके। उन्होंने बताया कि नाॅन सब्सिडाइज्ड़ कोर्स की वार्षिक फीस 15 हजार 970 रुपये निर्धारित की गई है, जिसे राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (एससीवीटी) द्वारा अनुमोदित किया गया है।
तकनीकी शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह पहल युवाओं को स्थानीय संसाधनों पर आधारित रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि कृषि, बागवानी, प्राकृतिक खेती तथा डेयरी क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना राज्य की आर्थिक संरचना को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।
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