चंडीगढ़, 4 अगस्त। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को पंजाब स्मॉल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कॉरपोरेशन (पीएसआईईसी) के मुख्यालय सहित 12 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। दिल्ली इकाई की तीन सदस्यीय टीम केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों के साथ सुबह करीब 10 बजे सेक्टर-17 स्थित पंजाब उद्योग भवन पहुंची और शाम करीब 4:30 बजे तक रिकॉर्ड की गहन जांच की।
सूत्रों के अनुसार, ईडी ने कार्रवाई के दौरान विभिन्न कार्यालयों से 22 फाइलें और कई महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज अपने कब्जे में लिए। वरिष्ठ अधिकारियों और लेखा शाखा के कर्मचारियों से भी पूछताछ की गई। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई पूर्व उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री तथा कारोबारी संजीव अरोड़ा से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले और पीएसआईईसी में औद्योगिक प्लॉटों के कथित फर्जी आवंटन की जांच के सिलसिले में की गई।
जांच एजेंसी कथित तौर पर सरकारी ‘जीरो पीरियड’ नीति के दुरुपयोग और औद्योगिक भूखंडों के आवंटन में हुई अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है। छापेमारी पीएसआईईसी मुख्यालय, कार्यकारी निदेशक के कार्यालय समेत कुल 12 परिसरों में की गई। जांच के दायरे में कुछ सेवानिवृत्त कर्मचारी और कथित बेनामी भी शामिल बताए जा रहे हैं। जब्त दस्तावेजों का मिलान पहले से जुटाए गए रिकॉर्ड और बैंकिंग लेनदेन से किया जाएगा।
ईडी की जांच की शुरुआत मोहाली विजिलेंस ब्यूरो द्वारा 8 मार्च 2024 को दर्ज एफआईआर के आधार पर हुई थी। एफआईआर में पीएसआईईसी के कुछ अधिकारियों और निजी व्यक्तियों पर कथित मिलीभगत से रिश्तेदारों और परिचितों के नाम पर महंगे औद्योगिक प्लॉट आवंटित करने के आरोप लगाए गए थे। जांच एजेंसी का दावा है कि आवेदन प्रक्रिया में फर्जी कंपनियों और काल्पनिक पतों का इस्तेमाल किया गया, जबकि संबंधित अधिकारियों ने कथित अनियमितताओं को नजरअंदाज किया।
जांच में यह भी सामने आया है कि कई मामलों में औद्योगिक प्लॉटों का कब्जा निर्धारित समय पर नहीं दिया गया। साइट पर मलबा और हाई टेंशन बिजली लाइनों का हवाला देकर वर्षों तक कब्जा टालने के बाद इस अवधि को ‘जीरो पीरियड’ मानते हुए आवंटन की प्रभावी तिथि आगे बढ़ा दी गई। आरोप है कि इससे आवंटियों को बिना ब्याज भुगतान का लाभ मिला और बाद में प्लॉट बाजार मूल्य पर बेच दिए गए, जबकि पीएसआईईसी के रिकॉर्ड में उनका हस्तांतरण मूल आवंटन मूल्य पर दर्शाया गया। जांच एजेंसी का मानना है कि बाजार मूल्य और रिकॉर्ड में दर्ज कीमत के अंतर से कथित रूप से अपराध की आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) उत्पन्न हुई।
मोहाली फोकल प्वाइंट स्थित सीपी-01 औद्योगिक प्लॉट भी जांच के दायरे में है। आरोप है कि मैसर्स आइकॉनिक स्पेस क्रिएटर को लाभ पहुंचाने के लिए नीलामी की शर्तों में बदलाव किया गया था।
उल्लेखनीय है कि संजीव अरोड़ा पहले से ही मनी लॉन्ड्रिंग मामले में न्यायिक हिरासत में हैं। ईडी ने उन्हें 9 मई 2026 को गिरफ्तार किया था। एजेंसी का आरोप है कि उनकी कंपनी हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड ने कागजों में 100 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के लगभग 44 हजार आईफोन दुबई निर्यात करना दिखाया, जबकि जांच में ऐसा कोई वास्तविक निर्यात नहीं मिला। साथ ही, दिल्ली की शेल कंपनियों के माध्यम से लगभग 103 करोड़ रुपये के लेनदेन को वैध दिखाने तथा कथित फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) और जीएसटी रिफंड का लाभ लेने के प्रयास का भी आरोप है। मामले की जांच जारी है।
