एफडीआर तकनीक से घुमारवीं क्षेत्र में निर्मित हुई 2 सड़कें, यातायात हुआ सुगम और सुरक्षित

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तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी के प्रयासों से 14 किलोमीटर सड़कों पर व्यय हुए हैं 11.52 करोड़ रूपये
एएम नाथ। बिलासपुर, 29 जनवरी: बिलासपुर जिला के घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत फुल डेप्थ रीकलेमेशन (एफडीआर) तकनीक के माध्यम से 2 सड़कों के उन्नयन का कार्य किया गया है। जिनमें पहली सड़क लगभग 7 किलोमीटर लंबी तरघेल-लदरौर तथा दूसरी सड़क लगभग 7 किलोमीटर लंबी गाहर-केट शामिल है। तरघेल-लदरौर सड़क के उन्नयन कार्य पर लगभग साढ़े 6 करोड़ रूपये जबकि गाहर-केट संपर्क सड़क के उन्नयन कार्य पर लगभग 5.16 करोड़ रूपये की राशि व्यय की गई है।
एफडीआर की आधुनिक तकनीक के माध्यम से इन दोनों सड़कों के उन्नयन कार्य के पूर्ण हो जाने से जहां गाहर-केट सड़क के माध्यम से लगभग आठ गांवों जिनमें गाहर, मुहाणा, देहलवीं, पध्याण, केट, नसवाल तथा सेऊ शामिल हैं लाभान्वित हुए हैं तो वहीं तरघेल-लदरौर सड़क से भी लगभग एक दर्जन गांवों को लाभ हुआ है। इन सड़कों का आधुनिक एफडीआर तकनीक के माध्यम से उन्नयन होने से जहां यातायात आवागमन सुगम व सुरक्षित हुआ है तो वहीं इन सड़कों के रख-रखाव एवं अनुरक्षण कार्यों के लिए आगामी पांच वर्षों तक धनराशि का भी प्रावधान किया गया है।
फुल डेप्थ रीकलेमेशन (एफडीआर) तकनीक के माध्यम से निर्मित इन सड़कों के उन्नयन कार्यों में जहां पुलियों व काॅजवे का निर्माण किया गया है तो वहीं जरूरत अनुसार पेवर ब्लाॅक का कार्य भी हुआ है। इन सड़कों के उन्नयन कार्य में जहां एफडीआर का कार्य हुआ है तो वहीं प्राईम कोट (एसएस-एक) तथा टैक कोट (वीजी-10) का कार्य भी किया गया है। इसके अतिरिक्त सामी लेयर, बिटुमिन कंक्रीट तथा मिटटी का कार्य भी शामिल है।
क्या है फुल डेप्थ रीकलेमेशन (एफडीआर) तकनीक:
सड़क में फुल डेप्थ रीकलेमेशन (एफडीआर) एक ऐसी तकनीक है जिसमें पुरानी सड़कों की अवसर्दीकृत सामग्री को पुनः उपयोग करके नई सड़क बनाई जाती है। इसमें पुरानी सड़कों की माटी, ग्रेवेल और बालु को मिलाकर नई अवस्था में प्रयोग किया जाता है। इसमें सीमेंट और रासायनिक योजकों का उपयोग होता है, जो सामग्री की मजबूती, सामाथ्र्यवर्धन और टिकाऊता में सुधार करते हैं। इस तकनीक में विशेष मशीनरी जैसे स्टैबलाइजर, पुल्वराइजर, ग्रेडर और रोलर का इस्तेमाल होता है।
एफडीआर तकनीक से सड़कों का निर्माण कार्य करने से जहां समय और खर्च की बचत होती है तो वहीं सड़क की मजबूती और टिकाऊता में सुधार, पर्यावरण संरक्षण तथा पुरानी सड़कों की संपूर्णता में भी सुधार होता है।
फिलवक्त घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत एफडीआर तकनीक से निर्मित दो सड़कों तलघेल-लदरौर तथा गाहर-केट सड़क पर लोगों का आवागमन सुरक्षित व बेहतर हुआ है तथा लाभान्वित क्षेत्र के लोगों को मुख्य सड़क तक पहुंचने में सुविधा मिलने के साथ-साथ किसानों, बागवानों, पशु पालकों को अपनी उपज एवं उत्पादों को बाजारों तक ले जाने में भी लाभ मिला है।
क्या कहते हैं तकनीकी शिक्षा मंत्री:
स्थानीय विधायक एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी का कहना है कि एफडीआर तकनीक के माध्यम से घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र की गाहर-केट तथा तरघेल-लदरौर सड़कों का उन्नयन कार्य लगभग पूर्ण कर लिया गया है। इन सड़कों के निर्मित होने से एक बड़ी आबादी को बेहतर आवागमन की सुविधा सुनिश्चित हुई है।
उन्होंने कहा कि एफडीआर तकनीक के माध्यम से सड़कों के उन्नयन कार्य में पुराने मैटिरियल को ही पुनः इस्तेमाल में लाया जाता है। ऐसा करने से जहां सड़क निर्माण कार्य के लिए अलग से अतिरिक्त मैटिरियल की बहुत कम आवश्यकता रहती है तो वहीं पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को भी कम किया जाता है। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण में एफडीआर तकनीक अच्छी साबित हो रही है, बावजूद अभी कुछ प्रयोग लोक निर्माण विभाग द्वारा किये जा रहे हैं ताकि भविष्य में एफडीआर तकनीक के माध्यम से सड़क निमार्ण की होने वाली तकनीकी खामियों को भी दूर किया जा सके।
राजेश धर्माणी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश भी सड़क निर्माण में नई तकनीकों को अपना रहा है तथा देश व दुनिया के साथ निरंतर आगे बढ़ने को प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में सड़कें आवागमन का प्रमुख साधन हैं। ऐसे में सड़कों के बेहतर निर्माण, रख-रखाव तथा आधुनिक तकनीकों के माध्यम से सड़क निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिसमें एफडीआर तकनीक भी शामिल है।
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