किसानों के मसीहा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत को उनकी 15वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि समारोह :ऑल इंडिया जाट महासभा ने “एक शाम किसान मसीहा के नाम” शीर्षक के तहत श्रद्धांजलि सभा और सेमिनार का किया आयोजन

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नई दिल्ली / चंडीगढ़ : किसानों के मसीहा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की 15वीं पुण्यतिथि की पूर्व संध्या पर नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में ऑल इंडिया जाट महासभा द्वारा “एक शाम किसान मसीहा के नाम” शीर्षक के तहत श्रद्धांजलि सभा और सेमिनार का आयोजन किया गया। जिसमें देशभर से राजनीतिक, सामाजिक और किसान संगठनों से जुड़े कई प्रमुख लोगों ने कार्यक्रम में भाग लिया और चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत जी के संघर्षों, किसान आंदोलन में उनके ऐतिहासिक योगदान और उनके व्यक्तित्व को सम्मानपूर्वक याद किया गया। समागम की अध्यक्षता जसपाल सिंह सिद्धू ने की, जबकि मंच संचालन मोहित तोमर ने किया।
जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरेंद्र चौधरी, रोहतक के सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा, बक्सर के सांसद सुधाकर सिंह, आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह, मुजफ्फरनगर के सांसद हरेंद्र मलिक, समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता मनोज सिंह काका और राज कुमार भाटी, भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत, भारतीय किसान यूनियन और अखिल भारतीय जाट महासभा के राष्ट्रीय महासचिव चौधरी युधवीर सिंह, अखिल भारतीय जाट महासभा के राष्ट्रीय बरिष्ठ उपाध्यक्ष व पंजाब अध्यक्ष हरपाल सिंह हरपुरा , अखिल भारतीय जाट महासभा के राष्ट्रीय सचिव चौधरी धर्मवीर सिंह जादौन, सुधाकर सिंह सांसद बिहार r सहित अनेक हस्तियां मौजूद थीं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री श्री सुरेंद्र चौधरी को एक गदा भेंट कर विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा, “महेंद्र सिंह टिकैत जी ने किसानों को सिर ऊंचा रखकर जीना सिखाया। उनका जीवन किसी पद, सत्ता या निजी महत्वाकांक्षा के लिए नहीं, बल्कि किसानों के सम्मान और अधिकारों की लड़ाई के लिए समर्पित था।” उन्होंने कहा कि आज देश का किसान फसल का सही मूल्य, बढ़ती लागत, बिजली, पानी और भूमि अधिग्रहण जैसी कई समस्याओं से जूझ रहा है, लेकिन यदि किसान एकजुट रहें तो हर लड़ाई जीती जा सकती है।

उन्होंने कहा कि टिकैत साहब हमेशा कहते थे कि किसान कमजोर नहीं होता, उसे सिर्फ अपनी ताकत पहचानने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि महेंद्र सिंह टिकैत हजारों किसानों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनते थे और हमेशा शांतिपूर्ण लेकिन मजबूत तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाते थे। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को टिकैत साहब के संघर्ष और विचारों को समझने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में ऐसे कार्यक्रम आयोजित करना बहुत जरूरी है ताकि दिल्ली और आसपास के लोगों को किसानों से जुड़े मुद्दों के बारे में जानकारी मिल सके। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी प्रतिभागियों को बधाई भी दी।

बी.के.यू. और ऑल इंडिया जाट महासभा के राष्ट्रीय महासचिव चौधरी युधवीर सिंह ने अपने संबोधन में महेंद्र सिंह टिकैत जी से जुड़े कई प्रेरणादायक किस्से साझा किए। उन्होंने कहा कि एक बार भरतपुर आंदोलन के दौरान महाराजा ने टिकैत साहब को भोजन के लिए आमंत्रित किया था, लेकिन उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि वे अकेले भोजन नहीं करेंगे, क्योंकि हजारों किसान उनके साथ मौजूद हैं। उन्होंने महाराजा से कहा कि यदि सभी किसानों के लिए भोजन की व्यवस्था संभव न हो तो सिर्फ एक बोरी चना भेज दें, किसान उससे अपना गुजारा कर लेंगे। युधवीर सिंह ने कहा कि यह टिकैत साहब की सादगी, समानता और किसानों के हितों के प्रति समर्पण था।

अखिल भारतीय जाट महासभा के राष्ट्रीय बरिष्ठ उपाध्यक्ष व पंजाब अध्यक्ष हरपाल सिंह हरपुरा ने कहा कि टिकैत साहब ने उस दौर में दिल्ली में लाखों किसानों को एकजुट कर इतिहास रचा था। उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने उन्हें राज्यसभा जाने का प्रस्ताव भी दिया था, लेकिन किसानों के लिए काम करना किसी भी पद से बड़ा बताते हुए उन्होंने इसे ठुकरा दिया।
उन्हीनों ने कहा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत सिर्फ एक व्यक्ति नहीं थे, बल्कि संघर्ष, स्वाभिमान और किसानों के अधिकारों की सबसे मजबूत आवाज थे। उन्होंने किसानों को जाति, धर्म और क्षेत्रवाद से ऊपर उठाकर एकजुट किया और जीवनभर उनके अधिकारों के लिए संघर्ष किया। वक्ताओं ने कहा कि आज भी जब देश के किसान अपने अधिकारों के लिए लड़ते हैं, तो कहीं न कहीं उनमें टिकैत साहब की संघर्षशील सोच नजर आती है। उन्हीनों किसान समुदाय की एकजुटता पर जोर देते हुए कहा कि बाबा महेंद्र सिंह टिकैत सिर्फ एक नेता नहीं थे, बल्कि किसानों की बुलंद आवाज थे। इलाके के युवा परविंदर अवाना ने कहा कि किसान और युवा शक्ति देश की असली ताकत हैं और उन्होंने सामाजिक सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जाट और गुर्जर समाज की एकता आने वाले समय में सामाजिक और किसान आंदोलनों को नई दिशा देगी। इस दौरान पंजाब से सुखबीर सिंह मिन्हास , अमरदीप सिंह पटियाला , जसप्रीत सिंह नरवाल आदि विशेष तौर पर शमिल हुए।

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