सुखपाल खैरा के आरोपों पर AAP नेता का पलटवार, बोलीं—माता-पिता के साथ रह रही हूं; सरकारी आवास के इस्तेमाल पर विपक्ष ने मांगा जवाब
चंडीगढ़। पंजाब की राजनीति में आम आदमी पार्टी की नेता गायत्री बिश्नोई के चंडीगढ़ स्थित सरकारी आवास में रहने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने आरोप लगाया कि AAP के पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया सेक्टर-39 स्थित एक सरकारी आवास का इस्तेमाल कर रहे हैं और गायत्री बिश्नोई को लेकर भी सवाल उठाए। गायत्री बिश्नोई ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह अपने माता-पिता के साथ पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह को आवंटित सरकारी आवास में रह रही हैं। उन्होंने खैरा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात कही है।
गायत्री बोलीं—पिता के इलाज के कारण रह रही हूं
गायत्री बिश्नोई ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर कहा कि वह अपने माता-पिता के साथ सेक्टर-39 स्थित मकान नंबर 961 में रह रही हैं। उनके अनुसार यह आवास स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह को आवंटित है और उनके पिता हृदय संबंधी बीमारी के इलाज के लिए चंडीगढ़ में हैं।
उन्होंने खैरा पर व्यक्तिगत और आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह इस मामले को अदालत में ले जाएंगी। पंजाब राज्य महिला आयोग ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए कहा है कि किसी महिला की गरिमा के खिलाफ टिप्पणी को लेकर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
खैरा ने मनीष सिसोदिया के आवास पर उठाए सवाल
सुखपाल खैरा ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि सेक्टर-39 का मकान नंबर 960 पंजाब के मंत्री डॉ. रवजोत सिंह को आवंटित है, लेकिन इसका इस्तेमाल मनीष सिसोदिया कर रहे हैं। उन्होंने सिसोदिया से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा और यह भी सवाल उठाया कि सरकारी आवास में कौन रह रहा है।
खैरा ने गायत्री बिश्नोई के वीडियो और सरकारी आवास से जुड़े दृश्य साझा करते हुए आवासों के इस्तेमाल और वहां रहने वाले लोगों को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में संबंधित सरकारी आवासों के आवंटन और वहां रहने की अनुमति से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं।
सरकारी आवास और सुविधाओं पर विपक्ष के सवाल
विवाद अब केवल व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा। कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल के नेताओं ने पंजाब सरकार के सरकारी आवासों और अन्य सुविधाओं के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए हैं।
अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने भी सरकारी संसाधनों के कथित इस्तेमाल पर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा। विपक्षी नेताओं का सवाल है कि पंजाब सरकार के मंत्रियों को आवंटित सरकारी आवासों में पार्टी के ऐसे पदाधिकारियों को रहने की अनुमति किन नियमों के तहत दी गई है जो पंजाब सरकार में मंत्री या अधिकारी नहीं हैं।
मामला अब राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर
गायत्री बिश्नोई और सुखपाल खैरा के बीच विवाद में व्यक्तिगत आरोपों के साथ-साथ सरकारी आवासों के इस्तेमाल का मुद्दा भी जुड़ गया है। गायत्री बिश्नोई ने जहां अपने पिता के इलाज और परिवार के साथ रहने की बात कही है, वहीं खैरा ने सरकारी आवास के इस्तेमाल की वैधता और अनुमति पर सवाल उठाए हैं।
इस मामले में यह स्पष्ट होना बाकी है कि संबंधित सरकारी आवास किस नियम और अनुमति के तहत किस व्यक्ति के रहने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में इन दावों पर अंतिम सरकारी स्पष्टीकरण या आवास आवंटन से जुड़े विस्तृत आधिकारिक रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं हुए हैं। इसलिए दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग संदर्भ में देखना जरूरी है।
