ग्रामीण क्षेत्रों में भी 1000 वर्गमीटर से अधिक एरिया के प्लॉट पर निर्माण के लिए अनुमति जरूरी : बड़सर में बताए टीसीपी एक्ट एवं नियमों के फायदे :

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भवन निर्माण के समय टीसीपी विभाग के नियमों का रखें ध्यान रखने की अपील
सुनियोजित, सुरक्षित एवं सुविधाजनक विकास के लिए इनकी अनुपालना बहुत जरूरी
एएम नाथ। बड़सर 19 दिसंबर। नगर एवं ग्राम योजना (टीसीपी) विभाग के मंडलीय कार्यालय हमीरपुर ने शुक्रवार को यहां मिनी सचिवालय के सभागार में एक जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें बड़सर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली समस्त पंचायतों के जनप्रतिनिधियों, पंचायत सचिवों तथा विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भाग लिया।
इस अवसर पर नगर एवं ग्राम योजनाकार हरजिंदर सिंह, सहायक योजनाकार मनीषा रांगड़ा और अन्य अधिकारियों ने हिमाचल प्रदेश नगर एवं ग्राम योजना अधिनियम 1977 और हिमाचल प्रदेश नगर एवं ग्राम योजना नियमों के उद्देश्य, प्रावधानों, क्षेत्राधिकार, वैधानिक दायित्वों तथा समय-समय पर किए गए संशोधनों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य किसी भी क्षेत्र का सुनियोजित, सुरक्षित एवं सुविधाजनक विकास सुनिश्चित करना है। इस अधिनियम के तहत अधिसूचित योजना क्षेत्रों और विशेष क्षेत्रों में किसी भी निर्माण कार्य के लिए टीसीपी विभाग की पूर्व अनुमति अनिवार्य होती है। अब इन क्षेत्रों से बाहर ग्रामीण क्षेत्रों में 1000 वर्गमीटर से अधिक के एरिया वाले प्लॉट पर निर्माण के लिए भी टीसीपी विभाग की पूर्व अनुमति अनिवार्य कर दी गई है।
उन्होंने बताया कि बड़सर एवं इसके आसपास के अधिकांश क्षेत्रों में टीसीपी अधिनियम के प्रावधान सामान्यतः लागू नहीं होते हैं। लेकिन, विक्रय के उद्देश्य से प्लॉटिंग अथवा प्लॉटिंग एवं अपार्टमेंट निर्माण या आठ से अधिक अपार्टमेंट वाले भवनों, 1000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल में विकसित किए जाने वाले रियल एस्टेट प्रोजेक्ट पर यह अधिनियम लागू होगा। बिना अनुमति किए गए निर्माण अथवा भूमि विकास कार्यों के विरुद्ध अधिनियम के अंतर्गत दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है।
उन्होंने बताया कि किसी भवन के आसपास सेटबैक यानि खाली जगह छोड़ना बहुत जरूरी होता है। इससे धूप, ताजी हवा, वाहनों की आवाजाही, पानी की निकासी और कई अन्य सुविधाएं सुनिश्चित होती हैं तथा भवनों के बीच पर्याप्त जगह होने से किसी भी दुर्घटना की आशंका कम होती है। आपसी विवाद भी नहीं होते हैं।
हरजिंदर सिंह ने सभी पंचायत सचिवों और जनप्रतिनिधियों से इसकी अनुपालना सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने खड्डों से कम से कम 7 मीटर और नालों से कम से कम 5 मीटर दूरी रखते हुए ही भवन निर्माण करने की सलाह भी दी।
इस अवसर पर कनिष्ठ प्रारूपकार अंकुश कुमार, कनिष्ठ अभियंता सुशील कुमार और अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।
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