गढ़शंकर में मल्टी कार्नर मुकाबले के आसार…. गढ़शंकर के हालात सुधारने के दावे कर रहे दावेदार

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गढ़शंकर – विधानसभा सीट गढ़शंकर की सियासी पिच जिले की अन्य विधानसभा सीटों से अलग है। मैदान में बैटिग करने वाले यहां के उम्मीदवारों को कंडी, बीत और मैदानी इलाके के तीन सियासी रंगों के मौसम का सामना करना पड़ रहा है। इस वजह से पिच पर लगातार टिके रहना मुश्किल सा लगता है। फिर मैदान सजा है। उम्मीदवारों के बीच राजनीतिक मैच चल रहा है। मुकाबला मल्टी कार्नर है। अब देखना है कि कौन सा उम्मीदवार वोट रूपी ज्यादा रन अपनी झोली में डालकर विजेता बनता है। आप से जय किशन रौड़ी और शिअद से सुरिदर सिंह भुलेवाल रांठा पुराने चेहरे मैदान में हैं। कांग्रेस और भाजपा का नया चेहरा है। कांग्रेस की टिकट का पत्ता कटने से नाराज होकर हाथ छोड़कर निमिषा मेहता भाजपा से चुनाव मैदान में हैं। नया चेहरा अमरप्रीत सिंह लाली मोंटू हाथ के सहारे दो-दो हाथ कर रहे हैं। इस सीट से कुल बारह उम्मीदवार मैदान हैं। जिले की सातों सीट में से सबसे ज्यादा इसी सीट पर उम्मीदवार मैदान में कूदे हैं। मुद्दे हैं गरम, वादों और आश्वासनों का दौर शुरू।

पिछले विधानसभा चुनाव में जिले की एकमात्र ऐसी सीट गढ़शंकर थी, जहां से आप के जय किशन रौड़ी ने चुनावी बाजी मारी थी। सरकार कांग्रेस की बनी थी। यहां का सबसे बड़ा मुद्दा बाई पास है। करीबन 25 सालों से बाईपास की आस अब भी पूरी नहीं हो पाई है। बीत इलाके में सड़कों और स्वच्छ पेयजल का मुद्दा गरम है। कंडी इलाके में जंगली जानवरों की समस्या विकट है। अब, मतदाताओं की नब्ज को टटोलते हुए उम्मीदवारों ने भी वादे और आश्वासन शुरू कर दिए हैं। चूंकि उन्हें मालूम है कि मतदाताओं का दिल जीतना है तो उनकी भावनाओं को भी समझना होगा। मतदाताओं का दिल जीतने की कोशिश में है सभी दलों के उम्मीदवार।

मौजूदा विधायक आप के जय किशन रौड़ी कहते हैं कि वह विधायक जरूर हैं, लेकिन सरकार कांग्रेस होने की वजह से वह कोई प्रोजेक्ट नहीं ला पाए हैं। हालांकि, वह अच्छा वकील बनकर वकालत करते रहे हैं। आप की सरकार बनने पर दिल्ली की तर्ज पर यहां पर भी विकास होगा। एक मौका और मांगते हैं। भाजपा की निमिषा मेहता कहती हैं कि वह बेशक में कांग्रेस में थीं, लेकिन लोगों के बीच रहीं। कांग्रेस ने उनके साथ नाइंसाफी की, इसलिए वह भाजपा में शामिल हुईं। वह वादा करती हैं कि अगर उन्हें सेवा का मौका मिला तो वह स्वच्छ पेयजल, टूटी सड़कों को चकाचक करवाने के साथ-साथ रोजगार के द्वार खोलेंगी। शिअद-बसपा उम्मीदवार सुरिदर सिंह भुल्लेवाल राठां अपने पिछले कार्यकाल का लोगों को याद दिलाते हैं। वादा करते हैं जो विकास रह गया है, उसे पूरा करवाएंगे। कांग्रेस की टिकट की लड़ाई में पूर्व विधायक लव कुमार गोल्डी और निमिषा मेहता पर भारी पड़ने वाले अमरप्रीत सिंह लाली कांग्रेस से मैदान में हैं। वह दावा करते हैं कि मौका मिलने पर जल्द से जल्द इलाके की नुहार बदल देंगे। खैर, सभी उम्मीदवार वादों से मतदाताओं का दिल जीतने की कोशिश कर रहे हैं। देखना है कि मतदाता अपना दिल किस उम्मीदवार को देते हैं। चूंकि अधिकांश मतदाता चुप हैं। मतदाताओं की चुपी से उमीदवार परेशान है।

इस सीट पर हिदू वोटर ज्यादा हैं। गुज्जर बिरादरी जीत हार में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। इसके अलावा अनुसूचित जाति के वोटर और समर्थक बड़ा रोल निभाते हैं। सीट का खास राजनीतिक पहलू यह रहता है कि यहां के मतदाता ज्यादा बार पार्टियों को पिच पर बने रहने नहीं देते हैं। उन्हें आउट करके चलता कर देते हैं। हालांकि कांग्रेस ज्यादा बार जीती है। बसपा ने भी जीत का स्वाद चखा है। भाजपा ने विजय पताका फहराया है। अकाली दल बादल ने इस सीट से जीत दर्ज कराई है। पिछला विधानसभा चुनाव यहां से आप ने जीता था। गढ़शंकर विधानसभा क्षेत्र में इस प्रकार है मतदाताओं की स्तिथि….

कुल मतदाता- 174656

पुरुष मतदाता-90936

महिला मतदाता- 83712

थर्ड जेंडर-08

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