चिट्टा के खिलाफ हिमाचल की सबसे बड़ी तकनीकी पहल…..सो-टॉक्सा मोबाइल मादक पदार्थ जांच प्रणाली : बिलासपुर में शुरू होगी अत्याधुनिक मोबाइल मादक पदार्थ जांच प्रणाली, कृत्रिम बुद्धिमत्ता से होगी निगरानी

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मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू जल्द करेंगे सो-टॉक्सा मोबाइल मादक पदार्थ जांच प्रणाली का शुभारंभ: डीसी
बिलासपुर, 26 जून: हिमाचल प्रदेश में नशे के विरुद्ध चल रहे अभियान को अब अत्याधुनिक तकनीक का मजबूत सहारा मिलने जा रहा है। चिट्टा और अन्य मादक पदार्थों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई के लिए बिलासपुर जिला प्रशासन ने राज्य की पहली सो-टॉक्सा मोबाइल मादक पदार्थ जांच प्रणाली खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लगभग 19 लाख रुपए की लागत से जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) के माध्यम से खरीदी जा रही इस अत्याधुनिक प्रणाली का शुभारंभ मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा शीघ्र किया जाएगा।May be an image of one or more people, people studying, hospital and text that says "실원복 4Tイ UTRBELD सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तिभाग दिजाखरन सिरद्शासय बरांजया नशा नशामुकभारतसमाह मुक्त भारत सपाह मादक द्रव्यों के दुरुपयोग और अैध तस्करी अंतराष्ट्रीय दिवस विषय: नशा मुक्त भारत अभियान विकसित भारत की पहचान 17से262 1444 खिलाफ हिमाचल प्रदेश सरकार प्रयास मुक्त हिमावल प्स्थ हिमाचल"
अंतरराष्ट्रीय मादक द्रव्य दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी निरोधक दिवस के अवसर पर आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम में उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार नशे के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति पर पूरी दृढ़ता से कार्य कर रही है। सरकार का उद्देश्य केवल मादक पदार्थों की तस्करी पर अंकुश लगाना ही नहीं, बल्कि युवाओं को नशे की गिरफ्त में जाने से बचाते हुए हिमाचल को नशामुक्त प्रदेश बनाना है।
उन्होंने बताया कि प्रारंभिक चरण में इस प्रणाली की एक मशीन को पायलट परियोजना के रूप में स्थापित किया जाएगा। इसके प्रदर्शन, सटीकता और उपयोगिता के मूल्यांकन के बाद आवश्यकता अनुसार अतिरिक्त मशीनें भी खरीदी जाएंगी। इस पहल के साथ बिलासपुर आधुनिक मोबाइल मादक पदार्थ जांच प्रणाली अपनाने वाला हिमाचल प्रदेश का पहला जिला बन जाएगा।
उपायुक्त ने बताया कि यह अत्याधुनिक प्रणाली व्यक्ति के मुख द्रव (लार) के नमूने के आधार पर मात्र पांच मिनट में जांच परिणाम उपलब्ध कराती है। यह चिट्टा (मेथाम्फेटामाइन) सहित एम्फेटामाइन, बेंजोडायजेपाइन, कैनाबिस (टीएचसी), कोकीन तथा ओपिएट्स जैसे छह प्रमुख प्रकार के मादक पदार्थों की मौके पर ही वैज्ञानिक जांच करने में सक्षम है। इससे पुलिस एवं अन्य प्रवर्तन एजेंसियों को त्वरित, सटीक और प्रमाणिक जांच सुविधा उपलब्ध होगी तथा संदिग्ध व्यक्तियों की तुरंत पहचान संभव हो सकेगी।
उन्होंने कहा कि यह प्रणाली विशेष अभियान, पुलिस नाकों, सार्वजनिक स्थलों, शैक्षणिक संस्थानों के आसपास तथा अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में बड़े स्तर पर यादृच्छिक (रैंडम) जांच के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। कम समय में अधिक लोगों की जांच होने से नशे के विरुद्ध अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
राहुल कुमार ने कहा कि इस पहल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित विश्लेषण प्रणाली होगी। जांच से प्राप्त आंकड़ों का वैज्ञानिक विश्लेषण कर नशे से प्रभावित क्षेत्रों, मादक पदार्थों की तस्करी के संभावित मार्गों, नए रुझानों तथा अपराध के पैटर्न की पहचान की जाएगी। यह विश्लेषण पुलिस विभाग के साथ साझा किया जाएगा ताकि साक्ष्य आधारित रणनीति तैयार कर चिट्टा और अन्य मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के विरुद्ध लक्षित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने बताया कि सो-टॉक्सा प्रणाली क्यूआर कोड आधारित परीक्षण, स्वचालित गुणवत्ता नियंत्रण, हजारों जांच परिणामों के डिजिटल अभिलेख, त्वरित रिपोर्ट जनरेशन तथा सुरक्षित डेटा प्रबंधन जैसी अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है। इससे जांच प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और तकनीक आधारित बनेगी।
उपायुक्त ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल कानून प्रवर्तन एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की समान भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने, अभिभावकों से अपने बच्चों की गतिविधियों पर सतर्क निगरानी रखने तथा आम नागरिकों से मादक पदार्थों के अवैध कारोबार की सूचना प्रशासन एवं पुलिस को उपलब्ध कराने की अपील की।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आधुनिक तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विश्लेषण और जनसहभागिता के समन्वय से बिलासपुर नशे के विरुद्ध एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभरेगा तथा यह पहल भविष्य में पूरे प्रदेश के लिए मार्गदर्शन सिद्ध होगी।
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