कहा—‘एंटी-चिट्टा जन आंदोलन’ केवल पुलिस अभियान नहीं, युवाओं का भविष्य बचाने की सामूहिक मुहिम; हिमाचल की ईआरएसएस-112 सेवा राष्ट्रीय रैंकिंग में 34वें से पहले स्थान पर पहुंची
एएम नाथ। शिमला। हिमाचल प्रदेश के पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों से मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में चलाए जा रहे ‘एंटी-चिट्टा जन आंदोलन’ में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को नशे के खतरे से बचाना केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि परिवारों, शिक्षण संस्थानों और पूरे समाज का साझा दायित्व है।
डीजीपी शुक्रवार को शिमला स्थित कॉन्वेंट ऑफ जीसस एंड मैरी स्कूल, चेल्सी के वार्षिक समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में विद्यार्थियों और अभिभावकों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ‘एंटी-चिट्टा जन आंदोलन’ का उद्देश्य केवल नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई करना नहीं, बल्कि प्रदेश के युवाओं का भविष्य सुरक्षित करना और समाज को नशामुक्त बनाने के लिए जनभागीदारी सुनिश्चित करना है।
घर और स्कूल से शुरू हो नशे के खिलाफ जागरूकता
अशोक तिवारी ने विद्यार्थियों से आंदोलन का संदेश अपने मित्रों और परिवारों तक पहुंचाने तथा नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने अभिभावकों और शिक्षकों से चिट्टे के बढ़ते खतरे के प्रति सतर्क रहने का आग्रह करते हुए कहा कि नशे की रोकथाम की शुरुआत घर और विद्यालय से होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जागरूकता फैलाने, बच्चों के साथ खुलकर संवाद करने, व्यवहार में आने वाले शुरुआती बदलावों को पहचानने और समय रहते उचित कदम उठाने से नशे की समस्या को रोकने में मदद मिल सकती है।
बच्चों की बातें सुनें, उनके साथ विश्वास का रिश्ता बनाएं
डीजीपी ने अभिभावकों से बच्चों के साथ पर्याप्त समय बिताने, उनकी चिंताओं को ध्यान से सुनने और घर में ऐसा माहौल बनाने की अपील की, जहां वे बिना किसी झिझक के अपनी समस्याएं साझा कर सकें।
उन्होंने कहा कि बच्चे पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन करने, साथियों के बीच स्वीकार्यता पाने और सामाजिक अपेक्षाओं पर खरा उतरने जैसे दबावों से गुजरते हैं। ऐसे समय में माता-पिता की समझ, संवेदनशीलता और भावनात्मक सहयोग बेहद महत्वपूर्ण होता है।
उन्होंने कहा, “घर बच्चे की पहली पाठशाला है और माता-पिता उसके पहले शिक्षक हैं।” बच्चों को दिए गए संस्कार, आत्मविश्वास और साहस उनके भविष्य के निर्णयों को दिशा देते हैं।
सफलता के साथ अच्छे इंसान बनना भी जरूरी
विद्यालय के वार्षिक समारोह की थीम ‘ओशन ओडैसी’ से प्रेरणा लेते हुए डीजीपी ने विद्यार्थियों को जिज्ञासा, साहस और दयालुता के साथ जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सफलता का आकलन केवल शैक्षणिक उपलब्धियों या ऊंचे पदों से नहीं, बल्कि व्यक्ति के व्यवहार और उसके मानवीय मूल्यों से भी होता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से सही बात के पक्ष में साहस के साथ खड़े होने, साथियों के नकारात्मक दबाव से बचने और अस्थायी असफलताओं को अपने भविष्य पर हावी न होने देने का आह्वान किया।
विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की सराहना
अशोक तिवारी ने समारोह में विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों, ड्रिल और बैंड प्रदर्शन, कराटे तथा स्केटिंग की सराहना की। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों के योगदान की प्रशंसा करते हुए सभी को बधाई दी।
उन्होंने दोहराया कि हिमाचल प्रदेश पुलिस नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखेगी, लेकिन चिट्टे के खिलाफ स्थायी सफलता के लिए समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों से आंदोलन का संदेश विद्यालय परिसर से बाहर ले जाकर व्यापक स्तर पर जागरूकता फैलाने की अपील की।
ईआरएसएस-112 के प्रति भी किया जागरूक
जनसंपर्क कार्यक्रम के तहत हिमाचल प्रदेश पुलिस ने विद्यालय परिसर में आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ईआरएसएस-112) को लेकर जागरूकता शिविर भी लगाया। इसमें विद्यार्थियों और अभिभावकों को आपातकालीन हेल्पलाइन, ‘ट्रैक मी’ सुविधा और जरूरत के समय समय पर सहायता प्राप्त करने के तरीकों की जानकारी दी गई।
इस अवसर पर पुलिस की ओर से बताया गया कि आपातकालीन प्रतिक्रिया समय की राष्ट्रीय रैंकिंग में हिमाचल प्रदेश ने 34वें स्थान से पहले स्थान तक का सफर तय किया है। पुलिस ने इसे आपातकालीन सेवाओं में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
