जन्म दर में और पिछड़ गया हिमाचल ..कम फर्टिलिटी रेट वाले राज्यों में शामिल; क्या वजहें?

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एएम नाथ । शिमला : हिमाचल प्रदेश देश में सबसे कम कुल प्रजनन दर यानी टोटल फर्टिलिटी रेट (टीएफआर) वाले राज्यों में से एक बन गया है। हिमाचल प्रदेश में बच्चों की जन्म दर में चिंताजनक गिरावट देखी गई है।

राष्ट्रीय प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य (आरसीएच) कार्यक्रम के सलाहकार डॉ. नरेश पुरोहित ने बताया कि मौजूदा वक्त में हिमाचल प्रदेश में औसत प्रजनन दर 1.5 है।

घटती प्रजनन दर चिंता का विषय :  सिरमौर स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान की ओर से आयोजित ‘प्रजनन क्षमता में गिरावट के कारण चुनौतियां’ विषय पर ऊना में आयोजित वेबीनार में वर्चुअल माध्यम से अपने संबोधन में फेडरेशन फॉर रिप्रोडक्टिव हेल्थ सर्विस इंडिया के कार्यकारी सदस्य डॉ. पुरोहित ने कहा कि 75 लाख की आबादी वाले हिमाचल में घटती प्रजनन दर चिंता का विषय है।

गोवा और सिक्किम में TFR और भी कम :  हालांकि गोवा और सिक्किम में टीएफआर यानी टोटल फर्टिलिटी रेट हिमाचल से भी कम है। डॉ. पुरोहित ने बताया कि संतान उत्पति क्षमता में गिरावट वैश्विक चिंता का विषय बनता जा रहा है। भारत में हर चार में से एक दंपति को गर्भधारण करने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

गर्भधारण में समस्या बड़ी चुनौती :  डॉ. नरेश पुरोहित ने बताया कि गर्भधारण करने में कठिनाई की समस्या भारत को प्रजनन संबंधी चुनौतियों का एक संभावित केंद्र बनाती है। गर्भधारण करने में कठिनाई का सामना करने वालों में खासकर शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रहने वाले दंपति शामिल हैं।

लगातार हो रही गिरावट : हिमाचल प्रदेश में कुल प्रजनन दर (टीएफआर) लगातार गिर रही है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, हिमाचल प्रदेश के अनुसार 2015-16 में आयोजित राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 में टोटल फर्टिलिटी रेट 1.9 थी जो 2019-21 में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस)-5 में 1.7 हो गई और अब यह और गिरकर 1.5 हो गई है।

यह वजह बता रहे जानकार : डॉ. नरेश पुरोहित ने हिमाचल प्रदेश में टोटल फर्टिलिटी रेट में लगातार गिरावट का मुख्य कारण महिलाओं में बढ़ती साक्षरता को बताया। उन्होंने कहा कि कुल प्रजनन दर (टीएफआर) महिलाओं की साक्षरता दर से बहुत करीबी से जुड़ी है। महिलाओं में साक्षरता दर बढ़ने के साथ ही कुल टीएफआर दर भी गिरती है। हिमाचल प्रदेश में 2011 की जनगणना के अनुसार महिलाओं में साक्षरता दर 75.9 प्रतिशत तक पहुंच गई।

गर्भनिरोधक का ज्यादा इस्तेमाल भी वजह : उन्होंने बताया कि राज्य में महिलाओं में गर्भनिरोधकों के बारे में जानकारी और उनका उपयोग भी अपेक्षाकृत अधिक है। इससे भी टोटल फर्टिलिटी रेट में गिरावट आई है। एक हालिया अध्ययन के अनुसार महिलाओं की शादी देर से हो रही है और 15 से 49 वर्ष की आयु वर्ग की 75 प्रतिशत महिलाएं गर्भनिरोधक का उपयोग कर रही हैं।

बीमारियां और इनवॉर्नमेंटल फैक्टर भी जिम्मेदार : विशेषज्ञों के अनुसार प्रजनन क्षमता आयु वाली महिलाओं में सामान्य हार्मोनल विकार पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीसीओएस) और पेल्विक इंफ्लेमेटरी संक्रमण में वृद्धि भी बांझपन के लिए जिम्मेदार है। उन्होंने गर्भधारण क्षमता में कमी से निपटने के लिए शैक्षिक पहल पर जोर दिया और इसके लिए जीवनशैली और पर्यावरणीय कारकों को जिम्मेदार ठहराया।

 

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