डिजिटल माध्यम से टांकरी लिपि सीखेंगे देशभर के प्रतिभागी : सलूणी महाविद्यालय में टांकरी लिपि पर सात दिवसीय वर्चुअल कार्यशाला का शुभारंभ

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स्वदेशी ज्ञान परंपरा के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

एएम नाथ। सलूणी (चंबा) : राजकीय महाविद्यालय सलूणी में “स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों एवं सांस्कृतिक संरक्षण में क्षमता निर्माण की पहल: टांकरी लिपि का पुनर्जीवन” विषय पर आधारित सात दिवसीय वर्चुअल कार्यशाला का विधिवत शुभारंभ किया गया। यह कार्यशाला 15 से 21 अप्रैल 2026 तक प्रतिदिन सायं 7:00 बजे से 8:30 बजे तक ऑनलाइन माध्यम से आयोजित की जा रही है। कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के शोध, नवाचार एवं संरक्षण प्रकोष्ठ (RIPC) द्वारा हिम संस्कृति शोध संस्थान, आनी (कुल्लू) के साथ शैक्षणिक सहयोग के अंतर्गत किया जा रहा है।
कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला के टैगोर फेलो डॉ. ओम प्रकाश शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने टांकरी लिपि के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र की समृद्ध विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में इस लिपि के उपयोग में आई कमी और इसके व्यवस्थित शिक्षण के अभाव के कारण इसके संरक्षण और पुनर्जीवन की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने महाविद्यालय द्वारा इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए प्रतिभागियों को गंभीर अध्ययन के लिए प्रेरित किया।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मोहिंदर कुमार सलारिया ने मुख्य अतिथि एवं देशभर से जुड़े प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय शोध-आधारित शिक्षण और क्षेत्रीय सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि यह कार्यशाला प्रतिभागियों को टांकरी लिपि के पठन, लेखन और व्याख्या की मूलभूत जानकारी प्रदान करेगी, साथ ही डिजिटाइज़्ड पांडुलिपियों और अभिलेखीय सामग्री के अध्ययन का अवसर भी उपलब्ध कराएगी।
कार्यक्रम के समन्वयक सहायक प्राध्यापक श्री शुभम डोगरा और श्री पंकज कुमार हैं, जो प्रतिभागियों के शैक्षणिक मार्गदर्शन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वहीं हिम संस्कृति शोध संस्थान के निदेशक डॉ. यज्ञ दत्त शर्मा कार्यशाला का संचालन कर रहे हैं। उन्होंने इस पहल को सहयोगात्मक प्रयास बताते हुए कहा कि इससे स्वदेशी लिपियों में रुचि रखने वाले शोधार्थियों और विद्यार्थियों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार होगा।
कार्यशाला में प्रतिभागियों को गूगल मीट के माध्यम से लाइव सत्रों से जोड़ा जा रहा है, जबकि अध्ययन सामग्री व्हाट्सऐप समूह के जरिए उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही ऑनलाइन असाइनमेंट और संरचित फीडबैक की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।
कार्यशाला के प्रमुख उद्देश्यों में टांकरी लिपि के प्रति जागरूकता बढ़ाना, इसके पठन-लेखन की आधारभूत दक्षता विकसित करना, डिजिटाइज़्ड पांडुलिपियों के अध्ययन को प्रोत्साहित करना तथा भाषा, संस्कृति और इतिहास के अंतर्संबंधों पर आधारित शोध को बढ़ावा देना शामिल है।
कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय की स्थापना के 20 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भी किया जा रहा है। उद्घाटन सत्र का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसके साथ आगामी शैक्षणिक गतिविधियों की श्रृंखला का शुभारंभ हुआ।

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