7 हत्याओं समेत कई गंभीर मामलों में वांछित अमृतपाल सिंह उर्फ अमृत दलम फर्जी पासपोर्ट से विदेश भागा था; मोल्दोवा की अदालत से प्रत्यर्पण की मंजूरी के बाद पंजाब पुलिस की टीम लेकर पहुंची भारत
चंडीगढ़, 12 सितंबर। यूरोप से किसी भगोड़े अपराधी के प्रत्यर्पण के मामले में पंजाब पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पंजाब पुलिस ने केंद्रीय एजेंसियों के सहयोग से जग्गू भगवानपुरिया गैंग के प्रमुख ऑपरेटर और कुख्यात गैंगस्टर अमृतपाल सिंह उर्फ अमृत दलम को मोल्दोवा से भारत वापस लाया है। पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने शनिवार को इसकी जानकारी देते हुए इसे संगठित अपराध के खिलाफ पुलिस की अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
7 हत्याओं समेत कई मामलों में था वांछित
पुलिस के अनुसार अमृतपाल सिंह पंजाब में हत्या, हत्या के प्रयास, यूएपीए, आर्म्स एक्ट और मादक पदार्थों से जुड़े कई मामलों में वांछित था। एडीजीपी एजीटीएफ प्रमोद बान के मुताबिक, आरोपी कम से कम सात हत्या के मामलों में पुलिस को तलाश था।
इन मामलों में 2019 में बटाला में दलवीर सिंह की हत्या, 2024 में होशियारपुर में अमरजीत लाल और कश्मीरी लाल की दोहरी हत्या तथा 2025 में धर्मजीत सिंह उर्फ धर्मा, कनव महाजन, सरबजीत सिंह उर्फ काका और जसदीप सिंह उर्फ दीप चीमा की हत्याएं शामिल हैं।
फर्जी पासपोर्ट के जरिए भागा था विदेश
पुलिस के मुताबिक अमृतपाल अक्टूबर 2024 में फर्जी पासपोर्ट के जरिए विदेश फरार हो गया था। यह पासपोर्ट हरियाणा के कुरुक्षेत्र निवासी गुरपाल पुत्र हीरा सिंह के दस्तावेजी विवरण के आधार पर तैयार किया गया था।
पंजाब पुलिस ने आरोपी के खिलाफ रेड नोटिस जारी कराया था। इसके साथ ही उसके फर्जी पासपोर्ट और संभावित ठिकानों से संबंधित जानकारी केंद्रीय एजेंसियों के साथ साझा की गई। विभिन्न देशों में उसकी गतिविधियों पर भी लगातार नजर रखी जा रही थी।
यूक्रेन जाने की कोशिश में मोल्दोवा में पकड़ा गया
मोल्दोवन अधिकारियों ने 24 फरवरी को अमृतपाल को उस समय हिरासत में लिया, जब वह ओटासी राज्य सीमा से यूक्रेन की ओर जाने का प्रयास कर रहा था। इसके बाद पंजाब पुलिस के ओवरसीज फ्यूजिटिव ट्रैकिंग एंड एक्सट्रेडिशन सेल (OFTEC) के माध्यम से प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।
चिसिनाउ की अदालत ने 26 मई को भारत को आरोपी के प्रत्यर्पण की मंजूरी दी। इसके बाद आरोपी ने अपील की, जिसे 16 जुलाई को कोर्ट ऑफ अपील सेंट्रू ने खारिज कर दिया। इसके साथ ही प्रत्यर्पण का आदेश अंतिम हो गया।
चार सदस्यीय टीम मोल्दोवा पहुंची
प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पंजाब पुलिस की चार सदस्यीय टीम मोल्दोवा भेजी गई। एजीटीएफ के पुलिस अधीक्षक बिक्रमजीत सिंह बराड़ के नेतृत्व में इंस्पेक्टर पुषविंदर सिंह, सब-इंस्पेक्टर जसप्रीत सिंह और एएसआई वरिंदर कुमार टीम में शामिल थे।
पुलिस टीम ने शुक्रवार को चिसिनाउ एयरपोर्ट से अमृतपाल को हिरासत में लिया और शनिवार को उसे नई दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पहुंचाया। अब उसे पंजाब लाकर उसके खिलाफ दर्ज विभिन्न मामलों में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
‘ऑपरेशन ईस्टर्न रीच’ के तहत कार्रवाई
डीजीपी गौरव यादव के अनुसार यह कार्रवाई ‘ऑपरेशन ईस्टर्न रीच’ का हिस्सा थी। पुलिस के मुताबिक करीब छह महीने तक चले इस इंटेलिजेंस आधारित अंतरराष्ट्रीय अभियान के दौरान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय किया गया।
डीजीपी ने इस कार्रवाई में सहयोग के लिए मोल्दोवा और अजरबैजान के अधिकारियों, सीबीआई की इंटरनेशनल पुलिस कोऑपरेशन यूनिट, गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय तथा अन्य केंद्रीय एजेंसियों का आभार जताया।
आईजी काउंटर इंटेलिजेंस आशीष चौधरी के अनुसार, OFTEC की स्थापना के बाद अब तक अलग-अलग देशों से 9 हाई-प्रायोरिटी भगोड़ों को भारत वापस लाया जा चुका है, जबकि 11 अन्य भगोड़ों के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया विदेशों में जारी है।
नोट: हत्या और अन्य अपराधों से जुड़े आरोप पुलिस/जांच एजेंसियों के अनुसार हैं; अंतिम दोषसिद्धि अदालत की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
