प्रतिमाह 70 हज़ार रुपये का अर्जित कर रहे शुद्ध मुनाफा : ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मज़बूत मिसाल बना ठाकराँ का डेयरी फार्मर जरनैल सिंह

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डेयरी फार्मिंग से बदली तक़दीर, युवाओं के लिए बने प्रेरणा स्रोत
रोहित जसवाल।  ऊना, 10 फ़रवरी| हर महीने लगभग चार लाख रुपये का कारोबार और करीब सत्तर हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा..वह भी गांव में रहकर। ठाकरां गांव के जरनैल सिंह की यह कहानी किसी बड़े उद्योग की नहीं, बल्कि डेयरी फार्मिंग से बदली एक साधारण किसान की ज़िंदगी की सशक्त मिसाल है।No photo description available.
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार की किसान हितैषी नीतियों ने पशुपालन को सहायक गतिविधि से बढ़ाकर भरोसेमंद और लाभकारी आजीविका के रूप में स्थापित किया है।
सीमित साधनों और छोटे स्तर से शुरू हुआ जरनैल सिंह का यह सफर आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाली एक प्रेरक सफलता कहानी बन चुका है।
कोविड संकट से अवसर की ओर सफर
हरोली तहसील के ठाकराँ गांव निवासी जरनैल सिंह पहले पंजाब में कैंटीन का कार्य कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे, लेकिन कोविड-19 महामारी के दौरान उन्हें यह कार्य छोड़ना पड़ा। कठिन परिस्थितियों में हताश होने के बजाय उन्होंने अपने पिता के डेयरी फार्मिंग कार्य को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया और इसे ही अपनी आजीविका का मजबूत आधार बनाया।No photo description available.
*10 पशुओं से शुरू किया डेयरी फार्मिंग कारोबार वर्तमान में है 45 गाय *
जरनैल सिंह के पिता शुरू से ही इस व्यवसाय से जुड़े थे। जरनैल ने इसे व्यवस्थित ढंग से विस्तार देते हुए पहले दस से बीस किया और अब 45 गाय का आधुनिक डेयरी फार्म विकसित किया है। आज उनका फार्म पूरे क्षेत्र के लिए एक आदर्श डेयरी फार्मिंग मॉडल बन चुका है।
होल्स्टीन फ्रीसीयन और जर्सी नस्लों की गायों से प्रतिमाह कर रहे 2.5 से 3 क्विंटल दुग्ध उत्पादन
जरनैल सिंह वर्तमान में प्रतिदिन 2.5 से 3 क्विंटल दूध का उत्पादन कर रहे हैं। दूध की गुणवत्ता और फैट प्रतिशत के आधार पर उन्हें औसतन 40 रुपये प्रति लीटर की दर मिल रही है। उन्होंने बताया कि वेरका प्लांट स्वयं उनके डेयरी फार्म से दूध उठाता है, जिससे विपणन की कोई समस्या नहीं है। परिवार के सभी सदस्य डेयरी फार्मिंग कार्यों में सहयोग करते हैं, वहीं दो अन्य लोगों को भी नियमित रोज़गार उपलब्ध कराया है।
जरनैल सिंह के डेयरी फार्म में होल्स्टीन फ्रीसीयन और जर्सी नस्ल की गायें हैं। होल्स्टीन फ्रीसीयन गायें प्रतिदिन लगभग 40 लीटर, जबकि जर्सी नस्ल की गायें 20 लीटर तक दूध देती है।
उन्होंने बताया कि डेयरी फार्म से उन्हें प्रतिमाह लगभग चार लाख रुपये की आय हो रही है। मजदूरी, चारा, फीड, दवाइयों, बिजली सहित सभी खर्च निकालने के बाद भी वे प्रतिमाह करीब 70 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा अर्जित कर रहे हैं।
विभागीय मार्गदर्शन से दूध उत्पादन में हुआ सुधार
जरनैल सिंह ने बताया कि पशुपालन विभाग के अधिकारी समय-समय पर उनके फार्म का निरीक्षण करते हैं और फीड प्रबंधन, दवाइयों, चारे एवं पशु स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। इससे दूध की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। साथ में पशुओं में बीमारियों की रोकथाम के लिए विभागीय स्तर पर वैक्सीनेशन का कार्य भी किया जाता है।
*एमएसपी निर्धारण से आय में हुआ इजाफा, उत्पादकता में हुआ सुधार *
जरनैल सिंह ने बताया कि हिमाचल सरकार द्वारा भैंस के दूध के दाम 61 रुपये और गाय के दूध के दाम 51 रुपये प्रति लीटर किए जाने से पशुपालकों की आमदनी में बड़ा सुधार आया है। यह निर्णय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में मील का पत्थर साबित हो रहा है। साथ ही, डेयरी फार्म से निकलने वाले गोबर का उपयोग जरनैल सिंह अपने खेतों में कर रहे हैं, जिससे भूमि की उत्पादकता में सुधार हुआ है। इसके अतिरिक्त वे गोबर को 1700 रुपये प्रति ट्रॉली की दर से बेच भी रहे हैं, जिससे अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है।No photo description available.
जरनैल सिंह ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुखू का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी दूरदर्शी सोच और पशुपालक हितैषी नीतियों से ग्रामीण क्षेत्रों में डेयरी फार्मिंग एक स्थायी और सम्मानजनक आजीविका के रूप में उभर रही है। यह मॉडल आज युवाओं को स्वरोज़गार की ओर प्रेरित कर रहा है।
क्या कहते हैं अधिकारी
पशुपालन विभाग ऊना के सहायक निदेशक डॉ. दिनेश परमार ने बताया कि प्रदेश सरकार ने पशु पालकों की आर्थिकी को सुदृढ़ करने के लिए निर्णायक फैसले लिए है। हिमाचल देश का पहला राज्य है जिसने दूध पर न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया है। राज्य सरकार ने गाय के दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य 45 रुपये से बढ़ाकर 51 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध का मूल्य 55 रुपये से बढ़ाकर 61 रुपये प्रति लीटर किया है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार पशु पालकों से डेयरी कोआपरेटिव सोसाइटियों के ज़रिए दूध ख़रीद कर रही है जिससे पशु पालकों को सीधा लाभ मिल रहा है।
*प्रसाशन सरकारी योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध *
उपायुक्त ऊना जतिन लाल ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा संचालित की जा रही योजनाओं का वास्तविक लाभ हर ग्रामीण तक धरातल पर पहुँचाने और महत्वाकांक्षी योजनाओं को गति देने के साथ-साथ सरकारी सुविधाओं की व्यापक पहुँच को सुनिश्चित करने के लिए ज़िला प्रसाशन प्रतिबद्ध है, जिसके लिए प्रसाशन की ओर से निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
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