प्रदेश में राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल को किया जा रहा सुदृढ़ः मुख्यमंत्री सुक्खू

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रोहित भदसाली। शिमला :   हिमाचल प्रदेश भौगोलिक दृष्टि से देश के संवेदनशील राज्यों में शामिल हैं। इसके दृष्टिगत वर्तमान प्रदेश सरकार राज्य में त्वरित आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) के सुदृढ़ीकरण के लिए कार्य कर रही है। प्रदेश सरकार ने इस दिशा में दो महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। प्रदेश में सम्पूर्ण प्रतिक्रिया प्रबंधन को अतिरिक्त महानिदेशक होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा के अधीन किया जाएगा। इससे किसी भी आपातकालीन और आपदा की स्थिति से बेहतर तरीके से निपटने में मदद मिलेगी।
                          इसके साथ आपदा प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करने के लिए होमगार्ड को दो वर्ष की अवधि के लिए एसडीआरएफ में प्रतिनियुक्त किया जाएगा। मुख्यमंत्री  सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश में बादल फटने और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती पुनरावृत्ति को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार एसडीआरएफ को प्राथमिकता के आधार पर मजबूत कर रही है। आपातकालीन स्थितियों में जानमाल की क्षति में कमी लाने के लिए इस प्रणाली को और अधिक संगठित और प्रभावी बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। हिमाचल प्रदेश भूस्खलन, हिमस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील है और राज्य सरकार इन घटनाओं में कमी लाने के दृष्टिगत कार्य कर रही है।
मंडी, कुल्लू और शिमला जिला में बादल फटने की घटनाओं के बाद 1 अगस्त, 2024 को मुख्यमंत्री ने एक बैठक आयोजित कर वरिष्ठ अधिकारियों को आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए थे। उन्होंने इस प्रकार की घटनाओं में अमूल्य जीवन बचाने और अन्य क्षति को कम करने के लिए एकीकृत तरीके से कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के कारण जानमाल की भारी क्षति होती है और इससे लोगों की आजीविका पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था काफी हद तक पर्यटन पर निर्भर करती है। प्राकृतिक आपदाओं के कारण पर्यटन क्षेत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और स्थानीय लोगों की आजीविका भी प्रभावित होती है। इन आपदाओं के कारण महत्वपूर्ण अधोसंरचना की क्षति होती है जिसे पुनः स्थापित करने में काफी समय लग जाता है और राज्य में विकास की गति भी प्रभावित होेती है।
उन्होंने कहा कि कृषि योग्य भूमि में बाढ़ और भूस्खलन के कारण कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों की आर्थिकी पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार प्राकृतिक आपदा से उत्पन्न चुनौतियों को कम करने की दिशा में प्रभावी कदम उठा रही है। प्रदेश में पूर्व चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने, भूकम्परोधी अधोसंरचना निर्मित करने और लोगों को जागरूक करने की दिशा में अनेक कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्राकृतिक आपदा प्रदेश के समक्ष नई चुनौतियां उत्पन्न करती है। इससे पर्यावरण की भी क्षति होती है और लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियां बाधित होती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बादल फटने और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के खतरों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए तीव्र, एकीकृत और सुदृढ़ प्रतिक्रिया प्रणली सुनिश्चित करने के लिए रणनीतिक कदम उठा रही है।
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