बसपा का प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिला : पंजाब में दलितों पर अत्याचार रोकने और पूरन कुमार मामले में निष्पक्ष जांच की मांग

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चंडीगढ़ / दलजीत अजनोहा : चंडीगढ़ में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) पंजाब का एक प्रतिनिधिमंडल आज राज्यपाल माननीय गुलाब चंद कटारिया से मिला। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व बसपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अवतार सिंह करीमपुरी ने किया। प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश कोऑर्डिनेटर व विधायक डॉ. नछत्तर पाल, कोऑर्डिनेटर अजीत सिंह भैणी, तीरथ सिंह मेहरा, चौधरी गुरनाम सिंह तथा प्रदेश महासचिव एडवोकेट बलविंदर कुमार शामिल थे।बसपा नेताओं ने राज्यपाल से हरियाणा के एडीजीपी और आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार की मृत्यु के मामले में निष्पक्ष और उच्च-स्तरीय जांच कराकर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि अनुसूचित जातियों पर अत्याचार केवल हरियाणा में ही नहीं, बल्कि पंजाब में भी बड़े पैमाने पर हो रहे हैं। इस घटना ने दलित समाज में गहरा आक्रोश पैदा किया है।नेताओं ने बताया कि पटियाला ज़िले के गांव बसोई कलां में दलित समुदाय ने अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित 35 एकड़ पंचायत ज़मीन की बोली लगाई थी और इसके लिए करीब साढ़े ग्यारह लाख रुपये भी जमा कराए, लेकिन अब तक उन्हें ज़मीन का कब्ज़ा नहीं दिया गया। विरोध करने पर उन पर लैंड माफिया द्वारा हमला किया गया, और मामले में कोई न्याय नहीं मिला।होषियारपुर ज़िले में भी दलित सरपंचों पर हमले हुए, परंतु सत्ताधारी दल के प्रभाव के कारण सख्त कार्रवाई नहीं की गई। बसपा पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि कई स्थानों पर दलित समाज के लोगों को झूठे मामलों में फंसाकर जेल भेजा जा रहा है। जालंधर में विशेष रूप से करतारपुर क्षेत्र में आम लोगों और दलितों पर प्रशासनिक दमन बढ़ा है।डॉ. करीमपुरी ने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार दलितों के धार्मिक मामलों में भी हस्तक्षेप कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि गुरु रविदास महाराज से जुड़े श्री खुड़ालगढ़ साहिब की भूमि पर शराब के ठेके खोले गए हैं। इसके अलावा, हुशियारपुर के गांव चांग बसोई में गुरु रविदास मंदिर को पंचायत घर में बदलने की कोशिश की जा रही है, जबकि फिल्लौर के धलेतां गांव में मंदिर की दीवारें तोड़ी गईं। बाद में सरकार ने गलती स्वीकार कर दीवारें दोबारा बनाने का आश्वासन दिया, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।बसपा ने मांग की कि राज्य के मुख्यमंत्री को इस पूरे घटनाक्रम के लिए माफी मांगनी चाहिए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि बाढ़ और नशे की समस्या पर सरकार के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। किसानों, मजदूरों और दलित वर्ग को राहत नहीं मिल रही है, जबकि कानून व्यवस्था भी लगातार बिगड़ती जा रही है।

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