जुल्म के खिलाफ संघर्ष और खालसा राज की स्थापना बाबा बंदा सिंह बहादुर की ऐतिहासिक देन
पटियाला, 18 अक्टूबर। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. किरपाल सिंह बडूंगर ने खालसा पंथ के महान सेनापति बाबा बंदा सिंह बहादुर के 357वें जन्मदिवस पर देशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि उनका अद्वितीय जीवन, वीरता, दृढ़ संकल्प और जुल्म के खिलाफ संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि सभी को बाबा बंदा सिंह बहादुर के महान जीवन से सीख लेकर अपने जीवन को सफल और सार्थक बनाना चाहिए।
प्रो. बडूंगर ने बताया कि बाबा बंदा सिंह बहादुर का जन्म 16 अक्टूबर, 1670 को जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के राजौरी में हुआ था। उनका प्रारंभिक नाम लक्ष्मण देव था। विभिन्न धार्मिक स्थलों की यात्रा करते हुए वह बैरागी बन गए। इसी दौरान उनकी मुलाकात दसवें गुरु, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी से हुई। गुरु साहिब ने उन्हें खंडे-बाटे की पाहुल छकाकर सिंह सजाया और बाबा बंदा सिंह बहादुर का नाम देकर जालिम मुगल शासन के खिलाफ संघर्ष करने के लिए पंजाब की ओर रवाना किया।
उन्होंने कहा कि बाबा बंदा सिंह बहादुर ने पंजाब में मुगल शासन को कड़ी चुनौती दी। उनकी विशेषता यह थी कि युद्ध अभियानों के साथ-साथ वह सेना का विस्तार करने, हथियारों एवं गोला-बारूद की व्यवस्था करने और सैनिकों के लिए रसद-पानी का प्रबंध करने में भी कुशल थे। उनकी अगुवाई में सिख सेना ने कई महत्वपूर्ण विजय प्राप्त कर मुगल साम्राज्य की जड़ों को हिला दिया।
प्रो. बडूंगर ने कहा कि बाबा बंदा सिंह बहादुर ने वर्ष 1709 में समाना पर विजय प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने सरहिंद के अत्याचारी सूबेदार वजीर खान को चुनौती दी। 12 मई, 1710 को चप्पड़चिड़ी के मैदान में हुए ऐतिहासिक युद्ध में वजीर खान मारा गया। इसके बाद सिख सेना ने सरहिंद पर विजय प्राप्त की। बाबा बंदा सिंह बहादुर ने खालसा राज की स्थापना कर सिख इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा।
उन्होंने कहा कि बाबा बंदा सिंह बहादुर का संघर्ष केवल युद्धों में विजय प्राप्त करने तक सीमित नहीं था, बल्कि यह अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने, न्याय स्थापित करने और लोगों के अधिकारों की रक्षा करने का प्रतीक भी था। उनका जीवन हमें सिखाता है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी साहस, दृढ़ संकल्प और सिद्धांतों पर अडिग रहकर बड़ी से बड़ी मंजिल हासिल की जा सकती है।
अंत में प्रो. बडूंगर ने कहा कि बाबा बंदा सिंह बहादुर की कुर्बानियों और महान कार्यों को सदैव याद रखना चाहिए। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर समाज में न्याय, समानता, साहस और मानवता के मूल्यों को मजबूत करना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
