महिला शक्ति किसी के सहारे का मोहताज नहीं : निर्मला कुमारी ने परिस्थिति और समय के अनुसार खुद को काबिल बनाया

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बिजली बोर्ड चम्बा के तहत हरदासपुरा में बतौर ए.एल.एम. कार्य कर रही निर्मला कुमारी

एएम नाथ। चम्बा :  महिला शक्ति किसी के सहारे का मोहताज नहीं होती। यदि उसे विषम परिस्थितियों में भी रहना पड़े तो उस चुनौतियों को बखूबी कबूल करते हुए आगे बढ़ती है। कुछ ऐसा ही मिसाल पेश कर रही है चम्बा में बिजली बोर्ड में तैनात निर्मला कुमारी। परिस्थिति और समय के अनुसार खुद को काबिल बनाया है। बिजली बोर्ड चम्बा के तहत हरदासपुरा में निर्मला कुमारी बतौर ए.एल.एम. कार्य कर रही है। बिजली ठीक करने के लिए खंभे पर चढ़कर उन्हें ठीक करने से लेकर, तारों को व्यवस्थित करना , कार्यप्रणाली से बिजली बोर्ड के उपभोक्ताओं को सही जानकारी देकर सतुंष्ट करना अब बांए हाथ का काम बन गया है।

बिजली बोर्ड के कर्मचारियों की डयूटी 24 घंटे रहती है। ऐसे में बिजली बोर्ड के कर्मचारी 3 शिफ्ट में कार्य करते हैं। पहली शिफ्ट सुबह 7 से दोपहर 3 बजे, दूसरी 3 से रात 11 बजे तथा तीसरी व अंतिम शिफ्ट रात 11 बजे से सुबह 7 बजे तक चलती हैं। यह व्यवस्था इसलिए ताकि कर्मचारियों पर ज्यादा काम का बोझ न हो। इन तीनों शिफ्ट में जहां भी डयूटी लगाई जाती है वहां डयूटी को हरदम तैयार रहती है। शिफ्ट के अलावा ऑन कॉल पर सेवाएं देने को निर्मला तैयार रहती है। 2018-19 बैच में बिजली बोर्ड में भर्ती निर्मला अब तक पांगी, मरेडी, सरोल में भी सेवाएं दे चुकी है। पांगी में बर्फबारी के कारण बिजली गुल होने की समस्या अक्सर रहती है जहां बड़े से बड़े अनुभवी कर्मचारी सेवाएं देने से कतराते हैं यहां भी नारी शक्ति ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए सेवाएं दी। निर्मला कहती हैं कि उन्हें बचपन से ही कुछ अलग करने की इच्छा थी। इसके लिए माता-पिता और भाई-बहनों ने भी सहयोग किया।
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अपने कार्यों से हासिल करे उंचाई, ताने देने वालों की खुद बोलती होगी बंद

निर्मला जब आई.टी.आई. में इलैक्ट्रीशियन ट्रेड में प्रवेश के लिए आई तो अध्यापकों ने उन्हें खासा प्रोत्साहित किया। हालांकि, शुरूआती दिनों में आई.टी.आई. के कुछ लड़के उन्हें यह कहते थे कि तू लड़की है। तुझसे इलैक्ट्रीशियन ट्रेड नहीं चल पाएगा, लेकिन बाद में जब उन्होंने पढ़ाई शुरू की और अभ्यास किया तो सभी ने काबिलित की तारीफ की। निर्मला बताती है कि उसका अपने कार्यों से उस उंचाई को हासिल करना है जिसे देख ताने देने वाले लोगों की बोलती खुद व खुद बंद हो जाए। इस कठिन स्थिति में जिस तरह से निर्मला अपने कार्यों में निरंतर जुटी हुई है वह अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा का स्त्रोत बन रही है। हल्की फुल्की समस्याएं आते ही लोगों का धैर्य जवाब देने लगता है वहीं इसका कार्य जिस तरह से मुसीबतों को ध्वस्त करते हुए प्रगति की ओर बढ़ रहा है। वह निराशावादी सोच रखने वाले सभी लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत है।

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