राष्ट्रीय लोक अदालत में हुआ 13,757 मामलों का मौके पर निपटारा : ज़िला कानूनी सेवाएं अथॉरिटी की ओर से वर्ष की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का सफल आयोजन

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होशियारपुर, 14 सितंबर :   ज़िला कानूनी सेवाएं अथॉरिटी होशियारपुर की ओर से आज पंजाब राज्य कानूनी सेवाएं अथॉरिटी एस.ए.एस. नगर के दिशा-निर्देशों पर ज़िले में वर्ष की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया। इस लोक अदालत में विभिन्न प्रकार के मामलों जिनमें धारा 138 के तहत एनआई एक्ट के मामले (लंबित और पूर्व-मुकदमेबाजी बैंक रिकवरी के मामले), श्रम विवाद, एमएसीटी, बिजली और पानी के बिल (नान कम्पाउंडेबल मामलों को छोड़कर),वैवाहिक विवाद, ट्रैफिक चालान, राजस्व के मामले तथा अन्य नागरिक एवं छोटे आपराधिक मामले रखे गए।
लोक अदालत की अध्यक्षता ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश-कम-चेयरमैन, ज़िला कानूनी सेवाएं अथॉरिटी होशियारपुर दिलबाग सिंह जौहल की ओर से की गई। लोक अदालत के लिए कुल 27 बेंच बनाए गए, जिनमें होशियारपुर की न्यायिक अदालतों में 11 बेंच, सब-डिवीज़न दसूहा में 4, मुकेरियां में 3 और गढ़शंकर में 2 बेंच शामिल थे। साथ ही राजस्व अदालतों के 7 बेंच भी गठित किए गए।

होशियारपुर ज़िले की लोक अदालत में कुल 16,172 मामलों की सुनवाई की गई, जिसमें से 13,757 मामलों का मौके पर निपटारा किया गया। इसके साथ ही अदालत की ओर से 21,02,55,452 रुपए के अवार्ड पास किए गए।

लोक अदालत के दौरान पुलिस विभाग द्वारा ट्रैफिक चालान का भुगतान करने आए व्यक्तियों की सुविधा हेतु विशेष हेल्प डेस्क की व्यवस्था की गई, ताकि वे अपने चालान अदालतों में आसानी से जमा कर सकें।

इस अवसर पर  ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश-कम-चेयरमैन, ज़िला कानूनी सेवाएं अथॉरिटी होशियारपुर दिलबाग सिंह जौहल के साथ राजपाल रावल सीजेएम-कम-सचिव, ज़िला कानूनी सेवाएं अथॉरिटी, बार एसोसिएशन होशियारपुर के अध्यक्ष रंजीत कुमार और उपाध्यक्ष रजनी नंदा ने भी लोक अदालत के बेंचों का दौरा किया। बार एसोसिएशन होशियारपुर ने इस लोक अदालत को सफलतापूर्वक संपन्न करने में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।

सचिव ज़िला कानूनी सेवाएं अथॉरिटी की ओर से श्री गुरु राम दास लंगर सेवा के सहयोग से आम जनता के लिए लंगर का भी प्रबंध किया गया था, जिससे सभी को सुविधा प्राप्त हुई।

सीजेएम-कम-सचिव ज़िला कानूनी सेवाएं अथॉरिटी राजपाल रावल ने जनता से अपील की कि वे लोक अदालतों में अपने मामलों का अधिक से अधिक लाभ उठाएं, क्योंकि इससे समय और धन की बचत होती है। लोक अदालत में हुए फैसले अंतिम होते हैं और उनके खिलाफ कोई अपील नहीं की जा सकती, जिससे दोनों पक्षों के बीच सौहार्द और प्रेम बढ़ता है।

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