चंडीगढ़ :पंजाब में सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक पोस्ट साझा करने के आरोप में सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकारों के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। पंजाब मुख्यमंत्री भगवंत मान की गैर-मौजूदगी में सरकारी हेलीकॉप्टर के इस्तेमाल से जुड़ा विवाद गहरा गया है।
बीते दिनों इसे लेकर कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों ने सवाल खड़े किए थे, जिन्हें लेकर खबर है कि AAP सरकार ने उनके खिलाफ FIR करवा दी है।
सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया पर फैलाई गई जानकारी तथ्यहीन और भ्रामक थी, जिससे जनता में भ्रम फैलने की आशंका पैदा हुई। वहीं, FIR में नामजद सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों का आरोप है कि यह कार्रवाई सरकार की आलोचना को दबाने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने का प्रयास है।
हेलीकॉप्टर इस्तेमाल पर सवाल और मानिक गोयल का आरोप
12 दिसंबर 2025 को लुधियाना के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR में सामाजिक कार्यकर्ता मणिक गोयल, लोक आवाज टीवी के पत्रकार मिंटू गुरुसरिया और मणिंदरजीत सिद्धू के साथ गगन रामगढ़िया, हरमन फार्मर, मनदीप मक्कड़, गुरलाल एस मान, अर्जन, स्नम्मू ढिल्लों और दीप मंगली को नामजद किया गया है।
मणिक गोयल ने सोशल मीडिया पर बताया कि यह शिकायत मुख्यमंत्री भगवंत मान की विदेश यात्रा के दौरान सरकारी हेलीकॉप्टर और विमान के उपयोग से जुड़े सवाल उठाने के बाद दर्ज की गई। उन्होंने दावा किया कि बीते चार वर्षों से RTI के तहत हेलीकॉप्टर और विमान के उपयोग व खर्च का विवरण माँगा जा रहा है, लेकिन सरकार ने जानकारी साझा नहीं की।
गोयल ने सवाल उठाया कि क्या यही वह बदलाव है जिसका वादा किया गया था, जहाँ सवाल पूछने पर पत्रकारों और कार्यकर्ताओं पर FIR दर्ज की जा रही है।
FIR में क्या कहा गया, किन धाराओं में मामला दर्ज?
FIR में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर साझा की गई सामग्री विकृत, अप्रमाणित और तथ्यात्मक रूप से गलत है। शिकायत के अनुसार, उड़ान-ट्रैकिंग डेटा की गलत व्याख्या, चयनित दृश्यों के इस्तेमाल और तथ्यहीन टिप्पणियों के जरिए एक भ्रामक और मनगढ़ंत नैरेटिव गढ़ा गया।
FIR में दावा किया गया है कि इन पोस्ट्स से यह आभास पैदा करने की कोशिश की गई कि मुख्यमंत्री के विदेशी दौरे के दौरान हेलीकॉप्टर का अनधिकृत या संदिग्ध उपयोग हुआ, जबकि आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार संबंधित हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल एक संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा विधिवत अनुमति के साथ किया गया था।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि इस तरह की कथित गलत जानकारी सार्वजनिक विश्वास को कमजोर कर सकती है, सरकारी कार्यों में बाधा डाल सकती है और सीमावर्ती राज्य पंजाब में सामाजिक सौहार्द और प्रशासनिक संतुलन पर असर डाल सकती है।
मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएँ 353(1), 353(2) और 61(2) लगाई गई हैं। शिकायतकर्ता के रूप में सतबीर सिंह का नाम दर्ज है, जबकि जाँच के दौरान कथित सामग्री की प्रामाणिकता और स्रोत की विस्तृत जाँच की बात कही गई है।
