हमारे पास 100 करोड़ के सबूत : ईडी की किस दलील पर कोर्ट ने रोकी केजरीवाल की ज़मानत- केजरीवाल की न्यायिक हिरासत अवधि कोर्ट ने 3 जुलाई तक बढ़ी

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नई दिल्ली : दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की न्यायिक हिरासत अवधि दिल्ली आबकारी नीति घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 3 जुलाई तक बढ़ा दी।  उनकी नियमित जमानत की दलीलें भी सुनी जा रही हैं. सीएम, जो वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं, को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 21 मार्च को इस मामले में गिरफ्तार किया था. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 10 मई से 1 जून तक अंतरिम जमानत दी थी, जिससे उन्हें लोकसभा चुनाव से पहले प्रचार करने की अनुमति मिल गई.

इस मामले की सुनवाई वैकेशन जज न्याय बिंदु ने की, जहां पर कोर्ट ने केजरीवाल की उस अर्जी पर सुनवाई की जिसमें उन्होंने मेडिकल बोर्ड द्वारा उनकी जांच के दौरान उनकी पत्नी को वर्चुअल मोड के जरिए कार्यवाही में शामिल होने की अनुमति देने की मांग की थी. केजरीवाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विक्रम चौधरी पेश हुए. विक्रम चौधरी ने सुप्रीम कोर्ट में केजरीवाल की एसएलपी की स्थिति सहित मामले की पृष्ठभूमि के बारे में कोर्ट को बताया.

आइये इस दौरान कोर्ट रूम में वकीलों की ओर से क्या दलीलें पेश की गई और जज ने इस पर क्या कहा उस पर एक नजर डालते हैं-

विक्रम चौधरी: मैं इस मामले में अरविंद केजरीवाल की तरफ से बहुत संक्षेप में बात करूंगा. सुप्रीम कोर्ट ने दो आदेश पारित किए. इसने मुझे अंतरिम जमानत दी. 17 मई को, निर्णय सुरक्षित रखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मैं नियमित जमानत के लिए आवेदन कर सकता हूं.

विक्रम चौधरी सुप्रीम कोर्ट का आदेश पढ़ते हैं.

विक्रम चौधरी: 10 मई का एक और आदेश है. यह मुझे चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत देने के बारे में था. आज मैं जिस स्थिति में हूं, मैं कुछ प्रस्तुतियां (Submissions) जल्दी से दे रहा हूं. कृपया मेरे नोट को देखें जो मैं जमा कर रहा हूं. इसमें कुछ तारीखें दी गई हैं, कृपया उन्हें देखें. 27 अगस्त को ईडी ईसीआईआर है. पीएमएलए के तहत कई शिकायतें दर्ज की गई हैं. कई आरोप पत्र दायर किए गए. किसी में भी मुझे आरोपी नहीं बनाया गया. आज तक मैं अनुसूचित अपराध में आरोपी नहीं हूं. धारा 160 सीआरपीसी के तहत नोटिस में, वे मेरे पास आए. मैं सीबीआई के सामने पेश हुआ. उसके बाद कुछ नहीं हुआ.

कई लोगों को गिरफ्तार किए जाने के बावजूद, मेरे बारे में कुछ नहीं. मैं दूसरों से बिल्कुल अलग स्थिति में हूं. 2 नवंबर के बाद से, मैंने कहा कि आप मुझे कैसे बुला रहे हैं, मैं गवाह हूं या संदिग्ध, कृपया मुझे बताएं. मैंने भी कहा कि आप जो चाहें, आपने कोई दस्तावेज नहीं दिया. 18 दिसंबर को फिर से समन भेजा गया. मैंने 20 दिसंबर को जवाब दिया. मैं किसी राज्य का सीएम होने के नाते कोई विशेष दर्जा नहीं मांग रहा हूं, लेकिन यह मत भूलिए कि संवैधानिक पदाधिकारी को बुलाया जाता है, कुर्सी का सम्मान किया जाना चाहिए. आप भले ही मुझे व्यक्तिगत रूप से सम्मान न दें, लेकिन कुर्सी का सम्मान किया जाना चाहिए.

12 जनवरी को उन्होंने मुझे चौथा समन जारी किया. इसके साथ एक ईमेल भी था. उसमें उन्होंने कहा कि आपको व्यक्तिगत क्षमता में बुलाया गया है. उसके बाद जवाब आया. 16 मार्च को आम चुनाव की घोषणा हुई. उसी दिन उन्होंने मुझे समन जारी किया. मैं 19 मार्च को हाईकोर्ट गया. मैंने समन को चुनौती दी. हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया और तीन सप्ताह में जवाब मांगा. जबकि मामला विचाराधीन है, 21 मार्च को मेरी स्टे एप्लीकेशन आई. स्टे एप्लीकेशन में, हाईकोर्ट ने कहा कि हम कोई अंतरिम राहत देने के इच्छुक नहीं हैं, लेकिन हम नोटिस जारी कर रहे हैं. यह दोपहर 12 बजे हुआ. उसी दिन सूर्यास्त के बाद वे मेरे घर में घुसे और उन्होंने मुझे गिरफ्तार कर लिया.

ईडी की ओर से एएसजी एसवी राजू पेश हुए.

एएसजी एसवी राजू: सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत सिर्फ चुनाव के उद्देश्य से दी थी, गुण-दोष के आधार पर नहीं.

विक्रम चौधरी: सुप्रीम कोर्ट ने मुझे जमानत दी और मैंने सरेंडर कर दिया. पूरा मामला मेरे बयानों पर टिका है. ये बयान उन लोगों के हैं जिन्होंने खुद को दोषी माना है. वे यहां संत नहीं हैं. वे सभी वो लोग हैं जो न सिर्फ दागी हैं बल्कि ऐसा लगता है कि कुछ को गिरफ्तार किया गया और उन्हें जमानत और माफी का वादा दिया गया, इसके अलावा एक ऐसी कैटेगरी है जिन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया है. मैं बयानों की स्वीकार्यता पर नहीं हूं. मैं किसी और चीज पर हूं. मैं इन सामग्रियों की विश्वसनीयता पर हूं. लेकिन जमानत के समय आप इतने प्रभावित हो सकते हैं कि आप उनकी सामग्री पर आंख मूंदकर भरोसा कर लेंगे?

अगर संवैधानिक पदाधिकारी के खिलाफ बयानों का यह स्तर है, तो आप समय पर वापस जाएं. कृपया समय देखें. उनके पास बयान उपलब्ध थे. जुलाई 2023 तक, उनका FIR में सबूत उपलब्ध है. अगस्त 2023 में, अंतिम बयान दर्ज किया गया. पहला समन अक्टूबर में जारी किया जाएगा. जनवरी में उन्होंने कहा कि हम आपको सीएम की हैसियत से नहीं बुला रहे हैं. लेकिन जब उन्होंने मुझे गिरफ्तार किया, तो उन्होंने सीएम और AAP के राष्ट्रीय संयोजक के तौर पर मेरी भूमिका का जिक्र किया.

गिरफ्तारी के समय में अपने आप ही तथ्यात्मक गंदगी नजर आती है जो कि अपने आप में निंदनीय है. मामला 2022 का है और उन्हें मार्च 2024 में गिरफ्तार किया जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उनका कोई पिछला रिकॉर्ड नहीं है और वह सीएम हैं. मैं विशेष दर्जे का दावा नहीं कर रहा हूं, लेकिन मैं कह रहा हूं कि अगर आप एक संवैधानिक पदाधिकारी के साथ ऐसा कर सकते हैं, तो आप एक आम आदमी के साथ क्या करेंगे. मेरी पहली दलील सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आधारित है. मैंने इस बात पर सिद्धांतों पर भरोसा किया है कि धारा 3 कैसे लागू होगी. उनका काम पीएमएलए है. सीबीआई मामले की जांच करना नहीं.

मेरा आचरण, अगर कोई बुरा है, तो सीबीआई को तय करना है. आपको पीएमएलए के तहत मेरी भूमिका तय करनी होगी. वे सीबीआई मामले की जांच करने की शक्ति का दुरुपयोग नहीं कर सकते. मैं आज तक सीबीआई मामले में आरोपी नहीं हूं. बयानों में फिजिकल एविंडेंस की कमी है.

गिरफ्तारी का आधार जिन चीजों को बनाया गया है वो उसमें सबूतों और स्पष्टता की कमी साफ नजर आती है. लगातार कई बयान दिए गए लेकिन मुझ पर कोई भी लागू नहीं हुआ. क्या यह सवाल के अनुसार या कहानी के अनुसार खुलासा है? पहले के बयानों में से एक राघव मगुंटा का है. यह मार्च 2023 में हुआ था. 5 महीने बाद, उसका बेटा हिरासत में है. वह टूट जाता है और बयान देता है. उसके बेटे को भी तब अंतरिम जमानत मिल जाती है. वे केवल तभी आपत्ति नहीं करते जब उन्हें किसी को सरकारी गवाह बनाना होता है या उन्हें बयान लेना होता है. पिता (मगुंटा रेड्डी) अब एनडीए गठबंधन, सत्ताधारी पार्टी में हैं.

विक्रम चौधरी ने सरथ रेड्डी के बयानों का हवाला दिया.

विक्रम चौधरी: 25 अप्रैल को उन्होंने खुद पर कोई आपत्ति न जताई जाए इसके बदले में कई सारे आपत्तिजनक बयान देने शुरू कर दिए. पिछले साल नवंबर में उनकी कंपनी ने सत्ताधारी पार्टी के लिए 50 करोड़ रुपये के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे. वे सरकारी गवाह भी हैं. सह-आरोपी व्यक्तियों के कई विरोधाभासी रुख हैं. पीएमएलए की धारा 3 के लिए आवेदक के पास कोई मनी ट्रेल नहीं है. बयानों में दो या तीन आंकड़े तैर रहे हैं क्योंकि ईडी को लगता है कि धारा 50 (बयान) के तहत सब कुछ स्वीकार्य है. इस बात का कोई सबूत नहीं है कि साउथ ग्रुप से 100 करोड़ रुपये आए. ये सभी बयान हैं. कोई सबूत नहीं है.

यह सब बयानों के रूप में है. अगर कमी को पूरा करने के लिए एक और बयान दर्ज किया जाता है तो मुझे आश्चर्य नहीं होगा. यही वह प्रक्रिया है जिसका वे पालन करते हैं. जांच हमेशा अंतहीन होती है. जब वे चाहते हैं, वे किसी को भी फंसा देते हैं. यह उत्पीड़न का सबसे बड़ा साधन है. ट्रिपल टेस्ट सैटिस्फेक्शन है. उनकी गंभीर आपत्तियों के बावजूद, सुप्रीम कोर्ट ने मुझे राहत दी. मैंने आत्मसमर्पण कर दिया. मुझे जमानत मिल गई है और मैंने उस टेस्ट को पास कर लिया है.

चुनाव के समय उन्हें गिरफ्तार किया गया था. मुद्दा सबूतों की गुणवत्ता का है. अगर गुणवत्ता सिर्फ बयानों की है, तो यह परिस्थितिजन्य सबूत है. परिस्थितियों का इतना गहरा संबंध होना चाहिए कि दोष सिद्ध हो जाए. दागी व्यक्तियों के ये बयान अभियोजन पक्ष के मामले को बदनाम करते हैं. मुझे स्वास्थ्य संबंधी बीमारियां हैं. लेकिन बीमारी के आधार पर भी, मुझे जमानत देने के लिए यह एक कारक हो सकता है.

विक्रम चौधरी अब केजरीवाल के आवेदन का जिक्र करते हैं.

विक्रम चौधरी: प्रार्थना यह है कि पत्नी को अटेंडेंट के रूप में मौजूद रहने और डॉक्टरों से बातचीत करने की अनुमति दी जाए. यह पूरी तरह से आपके और अभियुक्त के बीच का मामला है. ईडी का इसमें कोई लेना देना नहीं है.

कोर्ट: क्या वे इस बारे में कुछ कह रहे हैं?

विक्रम चौधरी: वे इस पर कड़ी आपत्ति कर रहे हैं. अगर अरविंद केजरीवाल एक गिलास पानी भी मांगेंगे, तो भी इस पर आपत्ति होगी.

अरविंद केजरीवाल की तरफ से विक्रम चौधरी ने दलीलें पूरी कीं. एएसजी एसवी राजू एसवी राजू ने ईडी के लिए दलीलें शुरू कीं. एएसजी एसवी राजू ने एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अगर संज्ञान लिया जाता है तो अदालत इस तथ्य पर विचार करेगी कि अपराध बनता है.

एएसजी एसवी राजू: यह तथ्य कि मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध किया गया है, संदेह से परे है क्योंकि अदालत ने संज्ञान लिया है. इसे चुनौती नहीं दी गई है. मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध हुआ है. सक्षम अदालत की ओर से संज्ञान का आदेश लिया गया है. चुनौती नहीं दी गई है. अब यह मुद्दा केवल उनकी भूमिका पर निर्भर करता है. ऐसा नहीं है कि अपराध किया गया है या नहीं इस पर चर्चा हो रही है और न ही इस स्तर पर विचार करने की आवश्यकता है.

उनकी भूमिका पर जाने से पहले, हम धारा 45 पीएमएलए के मुश्किल प्रावधानों से अवगत हैं. किसी आरोपी को जमानत पर रिहा करने से पहले धारा 45 की शर्तों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए. इस मामले में बड़ी संख्या में आरोपियों को धारा 45 लागू करके जमानत देने से इनकार किया गया है. इसमें मनीष सिसोदिया भी शामिल हैं. उन्हें सीबीआई मामले में गिरफ्तार नहीं किया गया है, यह उनका मामला है. सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि यह जरूरी नहीं है.

एएसजी एसवी राजू ने फैसला पढ़ा.

एएसजी एसवी राजू: उन्हें अनुसूचित अपराध में आरोपी होने की जरूरत नहीं है. वह अभी भी पीएमएलए के तहत आरोपी हो सकते हैं. सीबीआई का मामला है कि केजरीवाल ने रिश्वत मांगी, उन्होंने 100 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी. केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी के लिए फंड मांगा.

कोर्ट: केजरीवाल को समन भेजने के संबंध में कोर्ट ने किस खास भाषा का इस्तेमाल किया है?

एएसजी एसवी राजू: इसे आदेश के लिए रखा जाता है.

कोर्ट: अगर आदेश के लिए रखा जाता है, तो हमें आदेश की कॉपी चाहिए. मैं इसे संदर्भ के लिए चाहता हूं.

कोर्ट: मैं चाहता हूं कि आप उन खास आधारों का खंडन करें जो उन्होंने उठाए हैं.

एएसजी एसवी राजू: मैं अभी उस स्थिति में नहीं आया हूं. मैं संबोधित करूंगा. अगर वह पीएमएलए के तहत अपराध के लिए दोषी है, तो उसे जमानत नहीं दी जा सकती. कानून के अनुसार आपको यह दिखाना होगा कि आप पीएमएलए के तहत दोषी नहीं हैं. वह कहते हैं कि मैं पूर्ववर्ती अपराध में नहीं हूं, आईपीसी अपराध में नहीं हूं, लेकिन यह प्रासंगिक नहीं है. अगर कोई पूर्ववर्ती अपराध है जो दर्शाता है… बेशक आप वहां थे.

सीबीआई ने आपकी भूमिका का खुलासा किया. उन्होंने यह तर्क नहीं दिया कि वह दोषी हैं या नहीं. गवाह के बयान की विश्वसनीयता ट्रायल का विषय है. इसे जमानत के चरण में नहीं देखा जा सकता. जमानत के चरण में, आप मिनी ट्रायल नहीं कर सकते. उन्होंने जो दूसरा तर्क दिया वह यह था कि पहले से ही सबूत और गवाह की सामग्री उपलब्ध थी. यह पीएमएलए के तहत जमानत देने का कारण नहीं है. समय अप्रासंगिक है. इस बिंदु पर दो तीन निर्णय हैं (कि गिरफ्तारी आईओ का विशेषाधिकार है). यदि कोई अपराध बनता है तो समय अप्रासंगिक है.

यदि हम इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं तो धारा 45 निरर्थक हो जाती है. इसके बाद भी हमने सामग्री एकत्र की. वे कहते हैं कि जुलाई के बाद कुछ भी नहीं है. यह गलत है. उन्होंने कहा कि आपने मुझे इसलिए गिरफ्तार किया क्योंकि आप नहीं चाहते थे कि मैं चुनाव में भाग लूं. सुप्रीम कोर्ट ने इसका ध्यान रखा है.

एएसजी एसवी राजू ने केजरीवाल को अंतरिम जमानत देने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया.

एएसजी एसवी राजू: सरेंडर की अवधि नहीं बढ़ाई गई है. कृपया शर्तों पर गौर करें. यह आदेश केवल उन्हें चुनाव प्रचार करने की अनुमति देने के लिए था. अन्यथा सुप्रीम कोर्ट यह नहीं कहता कि वे सचिवालय आदि नहीं जा सकते. पूर्ववर्ती अदालत के इस आदेश के बावजूद अंतरिम जमानत खारिज कर दी गई. वे विस्तार चाहते थे. उन्हें पता था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वरूप अलग था, इसलिए उन्होंने मेडिकल आधार पर याचिका दायर की. उस आदेश को चुनौती नहीं दी गई.

यह नियमित अंतरिम जमानत नहीं थी. इसे केवल चुनाव के लिए दिया गया था. सुप्रीम कोर्ट की ओर से असाधारण शक्तियों का प्रयोग किया गया. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों के विपरीत तर्क दिया कि अंतरिम जमानत देने को मामले के गुण-दोष पर राय नहीं माना जाएगा.

केजरीवाल के वकील विवेक जैन: हमने गुण-दोष के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कभी भरोसा नहीं किया.

कोर्ट: हम 10-15 मिनट बाद फिर से शुरू करेंगे.

एएसजी एसवी राजू ने मामले में केजरीवाल की गिरफ्तारी और रिमांड को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करने के दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला दिया.

ASG: जहां सबूत जुटाना मुश्किल होता है, वहां सरकारी गवाह बनाए जाते हैं. कानून इसे मान्यता देता है. कानून कहता है कि प्रलोभन दिया जा सकता है. आप यह नहीं कह सकते कि प्रलोभन दिया गया है, इसलिए… कानून यही कहता है.

कोर्ट: हम लंच के बाद फिर से शुरू कर सकते हैं.

दोपहर 2 बजे के बाद कोर्ट ने फिर से सुनवाई शुरू की. केजरीवाल को जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश किया गया. मामले में उनकी न्यायिक हिरासत आज खत्म हो रही है.

कोर्ट: हां, केजरीवाल जी, अगर आप कोर्ट से कुछ कहना चाहते हैं तो बताइए.

अरविंद केजरीवाल: मैं कुछ नहीं कहना चाहता. मेरे वकील वहां हैं.

एडवोकेट विवेक जैन: यह एक कमजोर अर्जी है. न्यायिक हिरासत को उचित ठहराने के लिए कुछ भी नहीं है.

जैन: हम न्यायिक रिमांड पर आपत्ति कर रहे हैं. गिरफ्तारी को पहले ही चुनौती दी जा चुकी है. यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है.

दिल्ली कोर्ट ने शराब नीति मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की न्यायिक हिरासत 3 जुलाई तक बढ़ा दी. ASG एसवी राजू ने केजरीवाल की नियमित जमानत याचिका पर आपत्ति जताते हुए दलीलें देना जारी रखा.

कोर्ट ने ASG से कहा: सर, मैं चाहता हूं कि आप संक्षिप्त रहें, क्योंकि मुझे सभी आदेश पारित करने हैं.

ASG एसवी राजू ने कहा कि लिखित नोट दाखिल करने के लिए कुछ समय चाहिए.

कोर्ट: मैं इसे किसी और दिन के लिए सुरक्षित नहीं रखूंगा. सभी जानते हैं कि यह एक हाई प्रोफाइल मामला है. अगर मुझे कोई आदेश पारित करना है, तो मैं इसे कल पारित करूंगा.

ASG एसवी राजू ने दलीलें देना जारी रखा. केजरीवाल को न केवल उनकी व्यक्तिगत क्षमता में बल्कि PMLA की धारा 70 के कारण भी फंसाया गया है. केजरीवाल ने साउथ ग्राउंड से रिश्वत मांगी थी. मांग स्थापित हो गई है. पैसा गोवा गया है. यह हवाला डीलरों के पास गया है. हमने बयान दर्ज किए हैं. बड़ी रकम नकद में दी गई थी, यह भी स्थापित हो गया है. पी. मगुंटा रेड्डी के बयान पर भरोसा किया गया है.

ASG ने ED का जवाब पढ़ा, जिसमें कथित पॉलिसी घोटाले में केजरीवाल की भूमिका का उल्लेख किया गया है.

ASG: इस बात के सबूत हैं कि याचिकाकर्ता ने पैसे मांगे थे. न केवल ED ने बल्कि मजिस्ट्रेट ने भी बयान दर्ज किए हैं. आप यह नहीं कह सकते कि वह अपराध का दोषी नहीं है. विजय नायर आप के मीडिया कंवेनर थे. वे कन्वे कर रहे थे. उन्हें शराब नीति में रुचि रखने वालों, थोक विक्रेताओं के साथ बैठकें करनी थीं. हमारे पास सबूत हैं कि वे केजरीवाल के बहुत करीब थे.

एएसजी एसवी राजू अब विजय नायर के केजरीवाल के साथ कथित संबंधों पर दलीलें पेश कर रहे हैं.

एएसजी एसवी राजू: आम आदमी पार्टी आरपी अधिनियम के तहत व्यक्तियों का एक संगठन है. यदि अपराध किसी कंपनी द्वारा किया जाता है, तो मामलों के प्रभारी प्रत्येक व्यक्ति जिम्मेदार है. यदि AAP सैकड़ों करोड़ की रिश्वत लेती है, तो पार्टी के प्रभारी प्रत्येक व्यक्ति पीएमएलए की धारा 70 के अनुसार जिम्मेदार होगा. यदि आप कोई अपराध करती है, तो पार्टी के प्रभारी प्रत्येक व्यक्ति को दोषी माना जाएगा.

मनीष सिसोदिया के समय आप को आरोपी नहीं बनाया गया था. अब आप को आरोपी बनाया गया है. केजरीवाल आचरण के लिए जिम्मेदार हैं….कृपया दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले का संदर्भ लें. पूरा मामला स्थापित हो चुका है.

कोर्ट: चूंकि मुझे कुछ आदेश पारित करने हैं, इसलिए मैं कल के लिए दलीलें स्थगित कर रहा हूं.

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