एएम नाथ। शिमला: राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने के लिए गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और मूल्य आधारित शिक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम का ज्ञान देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे उनके चरित्र, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व का निर्माण कर राष्ट्र के भविष्य को आकार देते हैं।
राज्यपाल ने यह बात लोक भवन में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक दिवस समारोह के दौरान कही। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश के 32 शिक्षकों को राज्य शिक्षक पुरस्कार प्रदान किए तथा वर्ष 2025 के लिए एक शिक्षक को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया।
पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिक्षकों को बधाई देते हुए राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में शिक्षक, अभिभावक और विद्यार्थी तीनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने शिक्षकों से शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों में संस्कार और नैतिक मूल्यों का विकास करने का आह्वान किया।
‘राष्ट्र का भविष्य कक्षाओं में तैयार होता है’
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के साथ-साथ राष्ट्र के भविष्य को भी आकार देते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसकी कक्षाओं में तैयार होता है और शिक्षक उस भविष्य के निर्माता होते हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों में मूल्य, चरित्र, आत्मविश्वास और सही दिशा प्रदान करते हैं। तकनीक चाहे कितनी भी आगे बढ़ जाए, शिक्षक द्वारा दिया जाने वाला मार्गदर्शन, प्रेरणा, स्नेह और संस्कार उसका स्थान नहीं ले सकते।
एआई और रोबोटिक्स के दौर में शिक्षक की भूमिका और अहम
राज्यपाल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और डिजिटल तकनीक के तेजी से बढ़ते दौर में शिक्षकों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा अब केवल परीक्षा और डिग्री तक सीमित नहीं रही, बल्कि ज्ञान, कौशल, रचनात्मकता, नवाचार, अनुसंधान और चरित्र निर्माण पर भी जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने पीएम श्री स्कूल, निपुण भारत, समग्र शिक्षा, डिजिटल शिक्षा और अटल टिंकरिंग लैब जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके माध्यम से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच और 21वीं सदी के आवश्यक कौशल विकसित करने के अवसर मिल रहे हैं।
परख सर्वेक्षण में हिमाचल के प्रदर्शन की सराहना
राज्यपाल ने शिक्षा के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश ने परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण में बेहतर प्रदर्शन किया है। उन्होंने शिक्षकों और शिक्षा विभाग को बधाई देते हुए कहा कि आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान हासिल किया है।
उन्होंने कहा कि एक भारत श्रेष्ठ भारत, निपुण भारत और पीएम श्री जैसी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से विद्यार्थियों में राष्ट्रीय एकता, रचनात्मकता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और 21वीं सदी के कौशल विकसित करने में मदद मिल रही है।
राज्यपाल ने विश्वास जताया कि सरकार के प्रयासों और शिक्षकों की प्रतिबद्धता से हिमाचल प्रदेश गुणवत्तापूर्ण, समावेशी, नवाचारी और भविष्य के लिए तैयार शिक्षा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में और मजबूत होकर उभरेगा।
उन्होंने कहा कि पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिक्षकों की मेहनत और प्रतिबद्धता पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। शिक्षक के लिए सबसे बड़ा पुरस्कार तब होता है, जब उसके विद्यार्थी उसे जीवनभर याद रखें और समाज व राष्ट्र के विकास में सार्थक योगदान दें।
इस अवसर पर राज्यपाल ने एक स्मारिका का विमोचन भी किया।
शिक्षा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध: रोहित ठाकुर
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने राज्यपाल का स्वागत करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश की साक्षरता दर 100 प्रतिशत तक पहुंच गई है। वर्तमान सरकार द्वारा शिक्षा विभाग में 9,000 से अधिक नियुक्तियां किए जाने का भी उन्होंने उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सभी सरकारी विद्यालयों में पहली कक्षा से अंग्रेजी माध्यम की शुरुआत की गई है और स्थानीय भाषाओं को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
शिक्षा मंत्री ने विभाग में कर्मचारियों की कमी दूर करने के लिए किए गए युक्तिकरण तथा विद्यार्थियों के लिए शुरू की गई एक्सपोजर पहल की जानकारी दी। इसके तहत विद्यार्थियों को देश के विभिन्न हिस्सों में शैक्षणिक भ्रमण करवाया जा रहा है, जबकि शिक्षकों को विदेशों में एक्सपोजर विजिट के लिए भेजा जा रहा है।
शिक्षकों की सफलता की कहानियां दूसरों के लिए बनें प्रेरणा: राजेश धर्माणी
तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता से अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया है तथा कई शिक्षकों ने अपनी निर्धारित जिम्मेदारियों से आगे बढ़कर विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया है।
उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे शिक्षकों की सफलता की कहानियों का दस्तावेजीकरण किया जाना चाहिए, ताकि उन्हें अन्य शिक्षकों के साथ साझा कर प्रेरणा का स्रोत बनाया जा सके।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने में शिक्षकों की बड़ी भूमिका है और अब उत्कृष्ट शिक्षण संस्थानों के विकास पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
इससे पहले शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने राज्यपाल को सम्मानित किया। शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने राज्यपाल का स्वागत किया, जबकि स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
समारोह के दौरान राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पोर्टमोर और राजकीय कन्या महाविद्यालय शिमला के विद्यार्थियों ने आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
इस अवसर पर नगर निगम शिमला के महापौर सुरेंद्र चौहान, उप-महापौर उमा कौशल, प्रधान सचिव तकनीकी शिक्षा डॉ. अभिषेक जैन, राज्यपाल के सचिव संदीप भारद्वाज, उच्च शिक्षा निदेशक सुनीता सिंह सहित अन्य गणमान्य मौजूद रहे।
