‘चोर दरवाजे’ से भर्ती नहीं चलेगी: हाईकोर्ट ने आउटसोर्स नियुक्तियों पर लगाई रोक
17 हजार से अधिक आउटसोर्स कर्मचारियों पर कोर्ट की नजर, सरकार से मांगा जवाब
एएम नाथ।शिमला : हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में आउटसोर्स आधार पर की जा रही भर्तियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बी. सी. नेगी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार और उसके अधीन किसी भी विभाग, बोर्ड, निगम या उपक्रम में भर्ती एवं पदोन्नति नियमों (आरएंडपी नियम) के विपरीत कोई नियुक्ति नहीं की जा सकती। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने स्वास्थ्य सचिव और वित्त सचिव को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 7 जुलाई को होगी।
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य रखा गया कि स्वास्थ्य विभाग में पहले कर्मचारियों की नियुक्ति आउटसोर्स आधार पर की जाती है और बाद में उन्हें रोगी कल्याण समितियों में समाहित कर लिया जाता है। इस व्यवस्था पर कड़ी आपत्ति जताते हुए खंडपीठ ने कहा कि अधिकारियों ने अज्ञात उद्देश्यों की पूर्ति के लिए आउटसोर्सिंग के रूप में एक “गुप्त मार्ग” या “चोर दरवाजा” खोल रखा है। अदालत ने टिप्पणी की कि सरकार केवल धन बचाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं का शोषण नहीं कर सकती।
खंडपीठ ने कहा कि विभागों में रिक्त पद उपलब्ध होने के बावजूद नियमित भर्ती प्रक्रिया नहीं अपनाना युवाओं को उनके वैधानिक अधिकारों से वंचित करना है, जो मनमाना और भेदभावपूर्ण कदम माना जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि नियुक्तियों में पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
कोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि सरकार के पास विभिन्न विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों की सटीक और समग्र जानकारी उपलब्ध नहीं है। अदालत को यह भी नहीं बताया जा सका कि कुल रिक्तियों के मुकाबले आउटसोर्स कर्मचारियों का प्रतिशत कितना है।
अदालत के समक्ष प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में वर्तमान में 17,114 कर्मचारी आउटसोर्स आधार पर कार्यरत हैं। इनमें चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय में 2,578, विद्युत निगम लिमिटेड में 1,473, कृषि निदेशालय में 803, पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय में 793, ग्रामीण विकास विभाग में 632, पुलिस महानिदेशक कार्यालय में 630 तथा जल शक्ति विभाग में 542 कर्मचारी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त उच्च न्यायालय और हिमाचल प्रदेश न्यायिक अकादमी समेत 42 संस्थानों में भी बड़े पैमाने पर ऐसी नियुक्तियां की गई हैं। अब सरकार को 7 जुलाई को अदालत के समक्ष विस्तृत जवाब प्रस्तुत करना होगा।