ईरान युद्ध 22 दिन भारत के 22 दिन असर…एपीआई निर्माताओं के लिए एक रियल-टाइम मॉनिटरिंग सेल गठित किया जाए: सुमित सिंगला

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भारत की फार्मा इंडस्ट्री और अर्थव्यवस्था पर गहरा असर

बी बी एन, 21 मार्च (तारा) : ईरान में जारी युद्ध के 22 दिनों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और सप्लाई चेन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। भारत, जो अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए मध्य-पूर्व पर अत्यधिक निर्भर है, इस संकट से व्यापक रूप से प्रभावित हुआ है।
एमडी, क्योरटेक ग्रुप, एफआईआई वाइस प्रेसिडेंट, आईडीएमए सीनियर एग्जीक्यूटिव ने बताया कि इस युद्ध का सबसे गंभीर असर भारत की फार्मा इंडस्ट्री पर पड़ा है, विशेषकर एपीआई और पैकेजिंग कच्चे माल की आपूर्ति पर।
उन्होंने केंद्रीय सरकार से मांग की है कि एपीआई निर्माताओं के लिए एक रियल-टाइम मॉनिटरिंग सेल गठित किया जाए जो कच्चे माल की कीमतों और स्टॉक की नियमित रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जाए ताकि ब्लैक मार्केटिंग और जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई की जा सके.
साथ ही आवश्यक दवाओं के लिए मूल्य नियंत्रण तंत्र लागू किया जाए.
निष्कर्ष ईरान युद्ध ने केवल ऊर्जा बाजार ही नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित किया है, जिसका सीधा असर भारत की फार्मा इंडस्ट्री, अर्थव्यवस्था और आम उपभोक्ता पर पड़ा है।
यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह संकट और गहरा सकता है और दवाओं की उपलब्धता तथा कीमतों पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।
फार्मा सेक्टर में उभरता संकट एपीआई निर्माताओं द्वारा 50% से 100% तक कीमतों में वृद्धि 60–90 दिन की क्रेडिट सुविधा समाप्त, अब एडवांस भुगतान अनिवार्य, कई सप्लायर्स द्वारा पुराने ऑर्डर रोकना या देरी करना, बिचौलियों द्वारा स्टॉक जमा कर ब्लैक मार्केटिंगइस स्थिति के कारण दवाइयाँ पुराने एमआरपी पर बिकने के बावजूद निर्माताओं और मार्केटिंग कंपनियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सरकारी टेंडर लेने वाली फार्मा कंपनियों को समय पर कच्चे माल की सप्लाई न मिलने से पेनल्टी और अतिरिक्त वित्तीय दबाव का भी सामना करना पड़ रहा है।
यह स्थिति देश में दवाओं की आपूर्ति संकट और मुनाफाखोरी की पुनरावृत्ति को दर्शाती है।

युद्ध के चलते ऊर्जा संकट और सप्लाई चेन पर में बाधा के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुयी है जिससे कच्चे तेल की कीमत 70–73 डॉलर से बढ़कर 108–110 डॉलर प्रति बैरल, गैस की कमी और लॉजिस्टिक्स लागत में वृद्धि, इसके परिणामस्वरूप
पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में वृद्धि घरेलू और औद्योगिक लागत में बढ़ोतरी,
खाद्य और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि, उद्योग और आम जीवन पर व्यापक प्रभाव, फार्मा पेट्रोकेमिकल और प्लास्टिक उद्योग में 60–70% तक लागत वृद्धि हो चुकी है.
पैकेजिंग सामग्री महंगी होने से फार्मा उत्पादन प्रभावित हुआ है. हवाई यात्रा महंगी और कई उड़ानें रद्द, खाद (फर्टिलाइजर) की संभावित कमी, शेयर बाजार में गिरावट और विदेशी निवेश में कमी ने भारतीय फार्मा उद्योग पर चारों और से कुठाराघात किया है.
फार्मा उद्योग को इस समय सरकार से मदद की सख्त आवश्यकता है.

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