चंडीगढ़ : पंजाब सरकार ने राज्य के शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए 5,073 सरकारी स्कूलों में पौष्टिक बगीचों की स्थापना का निर्णय लिया है. मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में यह योजना न केवल बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और पोषण को सुनिश्चित करेगी, बल्कि उन्हें खेती और प्राकृतिक उत्पादों के महत्व को भी समझने का अवसर देगी।
कुपोषण से मुक्ति और स्वस्थ भविष्य
पंजाब स्टेट फूड आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत लागू इस योजना का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को ताजा, कीटनाशक-मुक्त फल और सब्जियां उपलब्ध कराना है. मिड-डे मील की गुणवत्ता में सुधार के लिए यह पहल एक स्थायी और प्राकृतिक समाधान के रूप में सामने आई है. इससे बच्चों को कुपोषण के चक्र से बाहर निकलने का अवसर मिलेगा और उनका शारीरिक एवं मानसिक विकास बेहतर होगा ।
स्कूलों की खाली जमीन का सदुपयोग
अमृतसर और अन्य जिलों में स्कूलों के पास खाली पड़ी अतिरिक्त जमीन को अब हर्बल और फ्रूट गार्डन्स में बदल दिया जाएगा. यह बगीचे न केवल पोषण और स्वास्थ्य के लिए उपयोगी होंगे, बल्कि छात्रों को खेती की नई तकनीकों और फसली विविधता के महत्व को जानने का व्यावहारिक अनुभव भी देंगे. इस पहल के तहत कृषि और शिक्षा विभाग के बीच सामूहिक समन्वय सुनिश्चित किया गया है ।
आंगनवाड़ी केंद्रों को भी जोड़ा गया
इस योजना की एक और विशेषता यह है कि इसे केवल स्कूलों तक सीमित नहीं रखा गया है. राज्य के 1,100 आंगनवाड़ी केंद्रों को भी इस मिशन में शामिल किया गया है. इसका लक्ष्य बच्चों को बचपन से ही पौष्टिक आहार की आदत डालना और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना है।
शिक्षकों की ट्रेनिंग और क्रियान्वयन
सरकार ने शिक्षकों के लिए विशेष ट्रेनिंग कार्यक्रम भी शुरू किए हैं, ताकि वे बच्चों को पौष्टिक भोजन और बागवानी के महत्व के बारे में सिखा सकें. विभागों का आपसी सहयोग और समन्वय यह सुनिश्चित करता है कि योजना का लाभ हर बच्चे तक पहुंचे।
आधुनिक पंजाब की सोच का प्रतीक
यह पहल केवल शिक्षा और स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सही उपयोग का संदेश भी देती है. स्वस्थ और पोषित बच्चे ही राज्य की प्रगति और विकास में योगदान दे सकते हैं. पंजाब सरकार की यह सोच स्पष्ट करती है कि शासन के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा समान रूप से सर्वोच्च प्राथमिकता हैं।
