एएम नाथ l शिमला : हिमाचल कांग्रेस में इन दिनों हलचल मची हुई है. पार्टी का राज्य संगठन नवंबर 2024 से ठप पड़ा था, जब मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्य, जिला और ब्लॉक इकाइयों को भंग कर दिया था प्रतीभा सिंह को तो बरकरार रखा गया, लेकिन उनका कार्यकाल अप्रैल में खत्म हो चुका था।
अब इस मामले में आखिरकार हाईकमान कमर कस ली है. जिसके बाद हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एचपीसीसी) के नए अध्यक्ष की नियुक्ति की प्रक्रिया तेज़ हो गई है. इसके लिए छह प्रमुख दावेदार शुक्रवार को पार्टी आलाकमान से मिलने दिल्ली जा रहे हैं. गुरुवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू ने पुष्टि की कि अगले दस दिनों के भीतर नए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की घोषणा कर दी जाएगी।
10 दिनों में किसकी बदलेगी किस्मत?
सीएम सुख्खू ने पत्रकारों से कहा, “पार्टी संगठन का विस्तार पांच से दस दिनों के भीतर पूरा हो जाएगा. दस दिनों के भीतर नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा कर दी जाएगी.” 6 नवंबर, 2024 के बाद से एचपीसीसी लगभग निष्क्रिय बनी हुई है, जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने संगठनात्मक बदलाव के तहत राज्य, जिला और ब्लॉक इकाइयों को भंग कर दिया था. प्रतिभा सिंह को प्रदेश अध्यक्ष पद पर बरकरार रखा गया था, लेकिन उनका कार्यकाल औपचारिक रूप से इस साल अप्रैल में समाप्त हो गया, जिससे राज्य इकाई महीनों तक अधर में लटकी रही।
किन 6 लोगों को बुलाया गया दिल्ली?… पार्टी सूत्रों के अनुसार, दिल्ली बुलाए गए छह नेताओं में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, विधानसभा उपाध्यक्ष विनय कुमार, ठियोग विधायक कुलदीप राठौर, पालमपुर विधायक आशीष बुटेल, कसौली विधायक विनोद सुल्तानपुरी और भोरंज विधायक सुरेश कुमार शामिल हैं. राहुल गांधी के कहने पर खड़गे द्वारा बुलाई गई यह बैठक एक संयुक्त बातचीत से शुरू होगी, जिसके बाद अंतिम निर्णय लेने से पहले आमने-सामने की चर्चा होगी।
हिमाचल सीएम की क्या है चाहत?
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री सुखू ने पार्टी नेतृत्व को बताया है कि यदि किसी अनुसूचित जाति (एससी) के नेता को इस पद के लिए विचार किया जाना है तो उनके चयन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. वैकल्पिक रूप से, यदि किसी कैबिनेट मंत्री का चयन किया जाता है, तो राज्य मंत्रिमंडल के विचारों को ध्यान में रखा जाना चाहिए. अपनी प्राथमिकताओं के बारे में पूछे जाने पर सुखू ने स्पष्ट किया, “मेरी ओर से कोई नाम प्रस्तावित नहीं किया गया है।
कांग्रेस हाईकमान के सामने क्या समस्या?
कांग्रेस अपनी ‘एक व्यक्ति, एक पद’ नीति पर फिर से ज़ोर दे रही है, लेकिन नेतृत्व के सामने एक अहम फैसला है. क्या कोई मौजूदा मंत्री भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभाल सकता है. पार्टी कथित तौर पर संगठन में क्षेत्रीय और जातिगत संतुलन सुनिश्चित करने के लिए नए अध्यक्ष के साथ तीन कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्ति पर भी विचार कर रही है. राज्य इकाई के पुनर्गठन में देरी से पार्टी कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है. पिछले कई महीनों में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव विदित चौधरी और चेतन चौहान ने राज्य प्रभारी रजनी पाटिल के साथ मिलकर राज्य के नेताओं, विधायकों और जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ कई दौर की बातचीत की है. हालांकि, किसी एक उम्मीदवार पर आम सहमति न बन पाने के कारण यह प्रक्रिया लंबी खिंच गई है।
राज्य में पार्टी में मचा घमासान
इस गतिरोध की पार्टी के भीतर भी आलोचना हो रही है. कृषि मंत्री चंद्र कुमार चौधरी (80) ने हाल ही में इस देरी पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा, “राज्य में कांग्रेस संगठन पंगु हो गया है.” निवर्तमान अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने भी चेतावनी दी है कि लंबे समय से चली आ रही निष्क्रियता “पार्टी को नुकसान पहुंचा रही है”, और हिमाचल में कांग्रेस के “पुनरुत्थान और सुदृढ़ीकरण” को पार्टी की सबसे बड़ी चुनौती बताया है. उन्होंने आलाकमान से आग्रह किया कि चयन प्रक्रिया में छह बार के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की विरासत का सम्मान किया जाए और नया अध्यक्ष ऐसा नेता हो जो “सभी गुटों में व्यापक रूप से स्वीकार्य” हो. हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस का पुनर्गठन पंचायत चुनावों और उसके बाद 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले हो रहा है. पार्टी के कई लोग इस नियुक्ति को राज्य इकाई में नई जान फूंकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं।
