ज्वाली में एक दिवसीय पशुपालक जागरूकता एवं संवाद शिविर आयोजित
एएम नाथ। ज्वाली, 3 मार्च। किसानों और पशुपालकों को वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध करवाकर उनकी आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से ज्वाली में एक दिवसीय पशुपालक जागरूकता एवं संवाद शिविर (पशु स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम) का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कृषि एवं पशुपालन मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की, जबकि हिमाचल प्रदेश वूल फेडरेशन के अध्यक्ष मनोज कुमार विशेष रूप से उपस्थित रहे।
शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने पशुओं के संतुलित आहार, नवजात बछड़ों की देखभाल, प्रमुख बीमारियों की रोकथाम, प्रजनन विकार तथा दुधारू पशुओं के उपचार संबंधी जानकारी दी।
अपने संबोधन में कृषि मंत्री ने कहा कि यह शिविर प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में पशुपालकों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि सरकार पशुधन की गुणवत्ता सुधारने और पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार पशुपालकों से भैंस का दूध 61 रुपये तथा गाय का दूध 51 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीद रही है। 300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से ऑर्गेनिक गोबर खाद की खरीद भी की जा रही है, जिससे प्राकृतिक खेती और पशुपालन को बढ़ावा मिल रहा है।
उन्होंने जानकारी दी कि 250 करोड़ रुपये की लागत से कांगड़ा जिले के ढगवार में आधुनिक दुग्ध संयंत्र स्थापित किया जा रहा है, जिससे दुग्ध उत्पादकों को बेहतर विपणन सुविधा और रोजगार के अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती को भी प्रोत्साहित कर रही है, क्योंकि पशुओं के बिना प्राकृतिक खेती संभव नहीं है। प्राकृतिक रूप से उगाई गई मक्की, गेहूं, जौ तथा कच्ची हल्दी को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा जा रहा है, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।

कृषि मंत्री ने विभाग के वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों को निर्देश दिए कि वे गांव स्तर पर पशुपालकों के साथ निरंतर तालमेल बनाए रखें और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता योजनाओं को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू करना है, ताकि पशुपालकों को वास्तविक लाभ मिल सके। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के जागरूकता एवं पशु स्वास्थ्य शिविर पूरे प्रदेश में पंचायत स्तर पर आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक पशुपालकों तक सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ पहुंचाया जा सके।
प्रो. चंद्र कुमार ने पशुपालकों से आह्वान किया कि वे ऐसे जागरूकता शिविरों का भरपूर लाभ उठाएं तथा विभागीय योजनाओं और वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर अपने पशुपालन व्यवसाय को सुदृढ़ बनाएं।

इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश वूल फेडरेशन के अध्यक्ष मनोज कुमार ने कहा कि पशुपालन, विशेषकर भेड़-बकरी पालन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और वुल्फ फेडरेशन पशुपालकों के कल्याण के लिए कार्य कर रहा है। उन्होंने पशुपालकों से विभागीय योजनाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया, ताकि उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो सके।
संयुक्त निदेशक डॉ. अजय चौधरी ने पशुधन प्रबंधन, टीकाकरण और संतुलित आहार पर बल दिया। वहीं कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के वाइस चेयरमैन अशोक पांडा ने विश्वविद्यालय की उन्नत तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया।
उपनिदेशक डॉ. सीमा गुलेरिया ने बताया कि विभाग द्वारा जिला कांगड़ा में 1.72 लाख गाय-भैंस, 25 हजार भेड़-बकरियां और 11 हजार सूअर का टीकाकरण किया गया है। उन्होंने हिमकुक्कुट पालन योजना, उत्तम पशु पुरस्कार योजना तथा पशु किसान क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाओं की जानकारी भी दी।
शिविर में विशेष चिकित्सा कैम्प भी लगाया गया, जिसमें विशेषज्ञ डॉक्टर की टीम ने विभिन्न ऑपरेशन किए। इस अवसर पर कृषि मंत्री ने पशुपालन मार्गदर्शिका का विमोचन भी किया।
शिविर में कृषि मंत्री द्वारा 15 प्रगतिशील पशुपालकों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इसके अलावा लकी ड्रा के जरिए 10 पशुपालकों को पशु कैल्शियम किट भी प्रदान की गई। शिविर के दौरान पशुपालकों द्वारा विभिन्न सुझाव भी दिए गए, जिन पर विभाग द्वारा गंभीरता से कार्य करने का आश्वासन दिया गया।
कार्यक्रम में एसडीएम नरेंद्र जरियाल, संयुक्त निदेशक कृषि राहुल कटोच, उपनिदेशक कुलदीप धीमान, सहायक निदेशक संदीप मिश्रा, सीईओ वूल फेडरेशन दीपक सैनी,सहायक निदेशक डॉ सुजय शर्मा,रणवीर पृथ्वी लीड बैंक मैनेजर,अखिलेश पराशर यूनिट हेड मिल्क फेडरेशन,पशु पोषण विशेषज्ञ डॉ. विनोद शर्मा,डॉ जी सी नेगी कॉलेज ऑफ़ वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज पालमपुर के विशेषज्ञ डॉक्टर, बीडीओ मनोज शर्मा, एसडीओ पंचायती राज अमन रिहालिया, कांग्रेस प्रवक्ता सिंह संसारी, नगर पंचायत अध्यक्ष राजेंद्र राजू तथा किसान सलाहकार समिति के अध्यक्ष विवेक लक्की सहित बड़ी संख्या में पशुपालक उपस्थित रहे।
