किसी महिला का अगर कोई शारीरिक शोषण करता है या अन्य किसी तरह से उसे अपमानित करता है तो वह अपराध की श्रेणी में आता : खनाल

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महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति किया जागरूक
ऊना, 9 नवंबर – राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण व राष्ट्रीय महिला आयोग के तत्वावधान में आज ऊना में महिलाओं के लिए एक दिवसीय साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर की अध्यक्षता करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव विवेक खनाल ने कहा कि इन शिविरों को आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य महिलाओं में कानूनी साक्षरता व जागरूकता पैदा करना है ताकि शीघ्र, सरल व सस्ता न्याय मिल सके। विवेक खनाल ने कहा कि महिलाओं के सम्मान की रक्षा के लिए कानून में बहुत सारे प्रावधान हैं तथा किसी महिला का अगर कोई शारीरिक शोषण करता है या अन्य किसी तरह से उसे अपमानित करता है तो वह अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता समझौता विवादों को निपटाने की सरल एवं निष्पक्ष प्रक्रिया है, जिसमें सभी पक्ष अपनी इच्छा से सद्भावना पूर्ण वातावरण का समाधान निकालते हैं तथा स्वेच्छा से अपनाते हैं, जोकि खर्च रहित होता है। मध्यस्थता समझौता प्रशिक्षित अधिकारी द्वारा करवाया जाता है। हिमाचल प्रदेश में 12 मध्यस्थता केंद्र कार्य कर रहे हैं, जिसमें 11 जिला स्तर न्यायालय तथा एक उच्च न्यायालय में स्थित है।
खनाल ने कहा कि कोई भी व्यक्ति निःशुल्क सहायता प्राप्त करने के इच्छुक हैं, तो वह सादे कागज़ पर प्रार्थना पत्र जिला, उपमंडल या उच्च न्यायालय में मुफ्त कानूनी सहायता के लिए दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की मुफ्त कानूनी सहायता अथवा सलाह के लिए 01975-225071, 223044 व 01976- 262462 पर सम्पर्क कर सकते हैं। अगर व्यक्ति पिछड़ी जाति, जन जाति या अनुसूचित जाति से संबंध रखता है तो वह उसका प्रमाण पत्र साथ लगाकर समितियों को दें ताकि पात्र व्यक्ति को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान की जा सके। पात्र व्यक्ति को जिला व उपमंडल स्तर पर बनाए गए वकीलों के पैनल में से अपनी इच्छानुसार वकील चुनने की सुविधा होगी। वकील की फीस प्राधिकरण द्वारा वहन की जाएगी। इसके अलावा उन्होंने किशोर अपराध व न्याय व्यवस्था, पत्नी, बच्चों व माता-पिता के खर्च व भरण पोषण के अधिकार, विवाहित महिलाओं पर अत्याचार एवं कानूनी प्रावधान के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी।
इस अवसर पर अधिवक्ता मीनाक्षी राणा ने घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण बारे जागरूक करते हुए कहा कि प्रत्येक महिला को साझा घर में निवास करने का अधिकार होता है। चाहे संपति में कोई उसका अधिकार, स्वामित्व या लाभकारी हित हो या न हो। इसके अलावा पीड़ित महिला को साझा गृहस्थी या उसके किसी भी हिस्से से बाहर नहीं निकाला जा सकता। उन्होंने महिलाओं को सोशल मीडिया प्रयोग ध्यान से करने की सलाह दी क्योंकि ज्यादातर महिलाएं इससे धोखाधड़ी की शिकार हो रही हैं। इसके साथ-साथ उन्होंने दहेज निरोधक अधिनियम व महिला पुलिस कस्टडी में महिलाओं के अधिकारों बारे भी जागरूक किया।
इस अवसर पर निदेशक नृत्य प्रिया केंद्र शिमला शशि विवेक ने कन्या भ्रूण हत्या के बारे में विस्तरित जानकारी देते हुए कहा कि गर्भ में कन्या भ्रूण की हत्या एक जघन्य अपराध है तथा कानून में इसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि कन्या भ्रूण हत्या महिलाओं के प्रति समाज का एक उपेक्षित व्यवहार है और इससे भविष्य में कई तरह की सामाजिक असंतुलन पैदा होने की स्थिति बन सकती है, जिसका सदियों तक समाधान नहीं मिल पाएगा।
कार्यक्रम में प्रतिभागी महिलाओं को प्रमाण पत्र भी वितरित किए।
इस अवसर पर ऊना जिला की महिला पंचायत प्रतिनिधि, महिला पुलिस, महिला स्कूल प्राधानाचार्य व अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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