कौन हैं जस्टिस निर्मल यादव….जिनके घर भेजे गए थे 15 लाख कैश, 17 साल बाद आएगा फैसला

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चंडीगढ़ :  चंडीगढ़ की एक विशेष अदालत ने गुरुवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा 2008 में न्यायाधीश निर्मल यादव के खिलाफ दर्ज मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आलका मलिक की विशेष अदालत ने गुरुवार को आरोपियों और अभियोजन पक्ष के अंतिम तर्कों को सुना।
अदालत ने इसके बाद मामले पर फैसला सुनाने के लिए 29 मार्च 2025 की तारीख तय कर दी गई।
आपको बता दें कि यह मामला 2008 के अगस्त महीने में दर्ज किया गया था। न्यायाधीश निर्मलजीत कौर उस समय हाईकोर्ट की जज थीं। उनके घर एक बैग में 15 लाख रुपये भेजे गए थे। यह बैग उनके कर्मचारी द्वारा चंडीगढ़ पुलिस को सौंप दिया गया था। इसके बाद इस मामले को जांच के लिए सीबीआई को सौंपे गए।
अभियोजन पक्ष के अनुसार यह राशि हरियाणा के पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता संजीव बंसल के एक क्लर्क द्वारा जस्टिस यादव को भेजी गई थी। लेकिन दोनों जजों के नामों में समानता के कारण यह राशि गलती से जस्टिस कौर के घर पहुंच गई। 2010 में जस्टिस यादव को उत्तराखंड हाईकोर्ट ट्रांसफर किया गया। यहां से रिटायर होने से एक साल पहले उनके और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया। 2014 में विशेष अदालत ने पांच आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे। मुख्य आरोपी संजीव बंसल का दिसंबर 2016 में मोहाली के मैक्स अस्पताल में निधन हो गया। इसके बाद जनवरी 2017 में उनके खिलाफ केस को समाप्त कर दिया गया था।
जस्टिस कौर ने 2016 में वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से दी गई अपनी गवाही में उस घटना को याद करते हुए कहा, “मुझे स्पष्ट रूप से याद है कि मैं एक सेब खा रही थी और मेरे पिता एक छोटी ड्रिंक के साथ बैठे थे। उसी समय मेरे प्यून अमरिक ने आकर कहा कि मैडम दिल्ली से कागज आए हैं। मैंने खोलकर देखने के लिए कहा। पैकेट खोलने में दिक्कत हो रही थी। इसके मुझे महसूस हुआ कि यह कागज नहीं हैं। मैंने तुरंत जल्दी से खोलने के लिए कहा। इस प्रक्रिया में उन्होंने पैकेट को फाड़ दिया और मुझे उसमें नोट्स दिखाई दिए। बिना एक पल गंवाए मैंने कहा, ‘पकड़ो, कौन लाया है?'”
                   संजीव बंसल ने कुछ ही देर में न्यायाधीश कौर को फोन करके बताया कि पैसे गलती से उनके घर पहुंचे थे और यह वास्तव में जस्टिस निर्मल यादव के लिए ये पैसे थे। हालांकि, उस समय तक न्यायाधीश कौर ने पुलिस को सूचना दे दी थी।  अभियोजन पक्ष ने 84 गवाहों को सूचीबद्ध किया था, जिनमें से 69 गवाहों की गवाही दर्ज की गई। हालांकि इस साल फरवरी में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने CBI को 12 गवाहों को फिर से जांचने की अनुमति दी थी।
                      कोर्ट ने CBI को चार सप्ताह के भीतर गवाहों की फिर से जांच करने का निर्देश दिया और ट्रायल कोर्ट से कहा कि कोई भी अनावश्यक स्थगन न दिया जाए। यह आदेश उस समय पारित किया गया जब मुकदमा अपने अंतिम चरण में था। अदालत ने 17 मार्च को अभियोजन साक्ष्य को बंद कर दिया। 26 मार्च को आरोपियों के बयानों की रिकॉर्डिंग का प्रक्रिया समाप्त हुई और 27 मार्च को अंतिम तर्क सुने गए।
न्यायाधीश निर्मल यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एसके गर्ग नारवाना और अधिवक्ता वीजी नारवाना ने प्रतिनिधित्व किया। अन्य आरोपियों की ओर से अधिवक्ता एएस चौहल, बीएस रियार और हितेश पुरी ने प्रतिनिधित्व किया।
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