गढ़शंकर नगर कौंसिल के प्रधान पद पर असमंजस बरकरार, किसी के पास भी बहुमत ना होने के अपनी अपनी गोटियां फिट करने में जुटे

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त्रिभंक दत्त, सोम नाथ बंगड़ व भावना कृपाल सहित चार दाबेदार, आरक्षण के बाद दाबेदार व समीकरण भी बदल सकते
गढ़शंकर: नगर कौंसिल गढ़शंकर के प्रधान पद के लिए चार पार्षदों का नाम साहमने आ रहा है। हालांकि बहुमत किसी के भी पक्ष में ना होने के कारण असमंजस की स्थिति बनी हुई है और जोड़ तोड़ का खेल जारी है। हालांकि शहर में इस बार छेहवीं बार पार्षद चुने गए सोम नाथ बंगड़ की बरिष्ठता के अधार पर मौके दिए जाने की चर्चा है कि इस बार उन्हें इस खंडित जनादेश के चलते दे देना चाहिए। लेकिन अव यह फैसला तो पार्षदों को करना है कि प्रधान पद पर किसे काबिज करना है। माना जा रहा है कि अगर काग्रेस का सीधे तौर पर प्रधान नहीं बनता को प्रधान को बनाने के लिए आरक्षण को इस तरीके से करवाया जा सकता है कि बिना समीकरणों के भी प्रधान काग्रेस का बन सके। पहली बार गढ़शंकर में हुया कि आकली दल बादल व भाजपा का कोई भी पार्षद नहीं जीता और उनकी प्रधान को लेकर दखलअंदाजी भी खतम हो चुकी है।
गढ़शंकर में तेरह पार्षद है तो एक मत विधायक है। इस तरह चौदह में से आठ मत चाहिए प्रधान बनने के लिए। गढ़शंकर में तीन काग्रेस की टिकट पर लडऩे वाले जीते थे तो दस निर्दीलय जीत थे। चुनाव के नतीजों बाद बनी स्थिति के मुताविक काग्रेस के पूर्व विधायक लव कुमार गोल्डी के गुट के पांच के है। जिन्में दो काग्रेस की टिकट पर जीते हुए है तो तीन निर्दलीय शामिल है। तो काग्रेस नेता पंकज कृपाल गुट में उनकी पत्नी भावना कृपाल सहित दो पार्षद है। हालांकि पंकज कृपाल अपने साथ तीन पार्षदों का सीधा तो सात का असीधे तौर पर बता रहे है। पार्षद सोम नाथ बंगड़ व जसविंदर कौर को आप का माना जा रहा है। इस तरह आप के पास विधायक सहित तीन मत हो जाते है। इन समीकरणों के चलते अगर काग्रेस एकजुट हो जाती है तो काग्रेस का प्रधान बनना तय है। लेकिन अव तक कि हालातों मुताविक काग्रेस एकजुट होती नहीं दिखाई नहीं दे रही। जिसके चलते प्रधान पद किसे मिलेगा असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पूर्व विधायक लव कुमार गोल्डी त्रिभंक दत्त ऐरी को प्रधान बनाने के इच्छुक है तो पंकज कृपाल अपनी पत्नी को प्रधान बनाने के जिए जुटे है तो सोम नाथ बंगड़ बरिष्ठता के अधार प्रधान पद के मजबूत दाबेदार है तो वह राजनीतिक चालें चलने के माहिर है। लेकिन अव बहुमत कैसे प्राप्त करें यह उनके समक्ष बड़ी चुनौती रहेगी। इसके ईलावा दो बार प्रधान रह चुके रजिंद्र सिंह शूका की पत्नी इंद्रजीत कौर इस बार पार्षद चुनी गई है तो इस तरह इंद्रजीत कौर भी प्रधानगी की पद की दौड़ में शामिल हो सकती है। हालांकि कोई भी दावेदार अपने आप को प्रधान पद की दौड़ में शामिल होने से इंकार कर रहा है। लेकिन पांच पार्षद व उनके आका अपनी अपनी गोटियां फिट करने में जुटे है। अव इन हलातों में प्रधानगी कुर्सी किसे मिलती है यह तो समय ही बताएगे। समीकरणों व जोड़ तोड़ कि हो सकता है कि दाबेदारों को छोड़ किसी और की किसमत चमक जाए।

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