चंडीगढ़ में इमारतों पर सोलर लाइटें लगवाने के मामले में नई एवं नवीकरणीय ऊर्जा तथा बिजली मंत्रालय की ओर से कई अहम खुलासे

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सांसद मनीष तिवारी के सवालों पर केंद्रीय राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाईक ने दिए जवाब

चंडीगढ़, 10 दिसंबर: चंडीगढ़ से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी द्वारा छतों पर सोलर लाइटें लगाने से संबंधित पूछे गए सवालों के जवाब में नई और नवीकरणीय ऊर्जा तथा बिजली मंत्रालय की ओर से कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ साझा की गई हैं।

उल्लेखनीय है कि सांसद तिवारी ने मंत्रालय से छतों पर सोलर प्लांट लगाने की मौजूदा स्थिति, सौर ऊर्जा से संचालित इमारतों की संख्या और कुल स्थापित क्षमता के बारे में जानकारी मांगी थी। ये सवाल खासकर पंजाब, हरियाणा, यूटी चंडीगढ़ और केंद्र सरकार के दफ्तरों की सरकारी इमारतों से जुड़े थे।

केंद्रीय राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाईक ने बताया कि 31.10.2025 तक देश में विभिन्न श्रेणियों के उपभोक्ताओं द्वारा कुल 22.42 गीगावॉट रूफटॉप सोलर (आरटीएस) क्षमता स्थापित की जा चुकी है। पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में क्रमशः चंडीगढ़ में 6606 इमारतों पर 52.825 एमडब्ल्यू आरटीएस क्षमता, पंजाब में 241 इमारतों पर 4.82 एमडब्ल्यू आरटीएस क्षमता और हरियाणा में 4474 इमारतों पर 34 एमडब्ल्यू आरटीएस क्षमता वाले रूफ टॉप सोलर प्लांट स्थापित किए गए हैं। इसी तरह, 4 नवंबर 2025 तक देशभर में विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों की 13,525 सरकारी इमारतों पर 619.78 MW की रूफटॉप सोलर क्षमता स्थापित की जा चुकी है।

निवासियों को जबरन निजी छतों पर सोलर लगाने के लिए भवन नियमों में संशोधन कर उनकी संवैधानिक और मौलिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करने संबंधी सवाल पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि मंत्रालय की ओर से ऐसी किसी भी प्रकार की जबरदस्ती या रजिस्ट्रेशन/कन्वेयन डीड रद्द करने जैसे निर्देश जारी नहीं किए गए हैं।

सांसद तिवारी ने यह भी पूछा था कि 2004–2025 के दौरान लंबे समय से जमा होते कचरे के बावजूद चंडीगढ़, विशेषकर डड्डूमाजरा लैंडफिल में पूर्ण रूप से कार्यशील वेस्ट-टू-एनर्जी (WTE) प्लांट क्यों नहीं लगाया जा सका? साथ ही, क्या कचरे के पहाड़ को खत्म करने के लिए कोई ठोस, समयबद्ध एवं वित्तपोषित योजना है?

मंत्रालय के अनुसार, चंडीगढ़ नगर निगम ने बताया है कि डड्डूमाजरा साइट पर गीले और सूखे कचरे को पहले से ही प्रोसेस किया जा रहा है, जिसे रिफ्यूज-डिराइव्ड फ्यूल (आरडीएफ) में बदला जा रहा है, जो स्वयं डब्ल्यूटीई प्रोसेसिंग का मान्य रूप है।

कई वर्षों तक यह प्लांट मुकदमेबाजी में फंसा रहा, जिससे नगर निगम को बड़े पुनर्गठन या किसी नई पूर्ण क्षमता वाले डब्ल्यूटीई प्लांट की स्थापना में बाधा आई।

2020 में नगर निगम ने इस प्लांट को अपने कब्ज़े में लेकर 200 MTD सूखे कचरे की प्रोसेसिंग की सुविधा सहित इसे संचालित करना शुरू किया।

इसके अलावा, हाल ही में चंडीगढ़ नगर निगम और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के बीच डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड पर लगभग 230 मीट्रिक टन कचरे को प्रोसेस करने के लिए एक अलग बायो-आधारित कम्प्रेस्ड बायोगैस प्लांट स्थापित करने हेतु समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

सांसद तिवारी ने जोर देकर कहा कि पिछले वर्ष अक्टूबर–दिसंबर 2024 में चंडीगढ़ प्रशासन निवासियों को धमकी दे रहा था कि उनकी जमीनों के रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिए जाएंगे, लेकिन अब केंद्र सरकार, विशेषकर नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से ऐसी किसी भी तरह की निर्देश जारी करने से इंकार कर दिया है।

उन्होंने सवाल उठाया कि चंडीगढ़ प्रशासन में किसने अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर ऐसे गैरकानूनी और मनमाने आदेश जारी किए थे? इस मामले की जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार अधिकारियों को पंजाब के माननीय राज्यपाल और चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

यह जानना वाकई दिलचस्प होगा कि चंडीगढ़ में कौन-कौन सी वे लगभग 6000 सरकारी इमारतें हैं, जिनकी छतों पर रूफ-टॉप सोलर लगाए गए हैं।

मुझे इस बात पर भी हैरानी है कि चंडीगढ़ केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन के पास कुल मिलाकर इतनी—लगभग 6000—सरकारी इमारतें मौजूद भी हैं।

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