एएम नाथ। चंडीगड़ : पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ तथा हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय, शिमला के अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा द्वारा जोगिंद्रा सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (जेसीसीबी), सोलन के बैंक प्रबंधन और वरिष्ठ अधिकारियों के विरुद्ध एक विस्तृत व गंभीर शिकायत दायर की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बैंक में पिछले एक दशक से विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की प्रक्रियाओं को जानबूझकर दूषित किया गया तथा नियमों, पारदर्शिता और निष्पक्षता को दरकिनार करते हुए खुले तौर पर हेरफेर, मनमानी, पक्षपात और “पिक एंड चूज़” नीति अपनाई गई।
शिकायत के अनुसार 19 सितंबर 2022 को आयोजित डीपीसी और उसके आधार पर जारी कार्यालय आदेश दिनांक 26 सितंबर 2022 सहित पिछले दस वर्षों की डीपीसी प्रक्रियाएँ पूर्व-नियोजित, दुर्भावनापूर्ण और नियम-विरुद्ध थीं। आरोप है कि बैंक प्रबंधन ने रजिस्ट्रार, कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ (आरसीएस), शिमला की कथित सहमति व संरक्षण में ऐसे अधिकारियों को पदोन्नत किया, जिनके विरुद्ध गंभीर वित्तीय अनियमितताओं, धोखाधड़ी और आपराधिक मामलों की जाँच अथवा विचारण लंबित है, जबकि कई ईमानदार और योग्य अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय प्रविष्टियाँ (एसीआर) जानबूझकर खराब कर उन्हें पदोन्नति से वंचित किया गया।
शिकायत में जिन वरिष्ठ अधिकारियों के नाम प्रमुखता से सामने आए हैं, उनमें कुलदीप सिंह (एजीएम), राम पॉल (एजीएम), हरीश शर्मा शामिल हैं। आरोप है कि ये अधिकारी मुख्यालय सोलन में बैठकर आरबीआई, नाबार्ड और आरसीएस के दिशा-निर्देशों की अनदेखी करते हुए संगठित रूप से कार्य करते रहे और उनके विरुद्ध की गई शिकायतों को दबाया गया।
शिकायत में राम पॉल, एजीएम के विरुद्ध दर्ज गंभीर आपराधिक मामलों का भी उल्लेख किया गया है। विवरण के अनुसार, उनके खिलाफ एफआईआर संख्या 45/2019 (पुलिस थाना दाड़लाघाट, जिला सोलन) धारा 420, 409, 467 व 468 आईपीसी के अंतर्गत तथा एफआईआर संख्या 29/2023 दिनांक 26.04.2023 (पुलिस थाना दाड़लाघाट) धारा 420, 120-बी, 467, 471, 415 व 34 आईपीसी के तहत दर्ज है, जिन मामलों में वे वर्तमान में जमानत पर बताए गए हैं। इसके बावजूद उन्हें पदोन्नति दिए जाने को शिकायत में घोर अनियमितता बताया गया है।
इसी प्रकार कुलदीप सिंह, एजीएम के विरुद्ध राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, सोलन द्वारा एफआईआर संख्या 00003/2025 दिनांक 09.10.2025 धारा 409, 420 व 120-बी आईपीसी के अंतर्गत दर्ज होने का उल्लेख है, जिसमें राम पॉल और गुरमीत सिंह सहित अन्य सह-आरोपियों के नाम भी शामिल बताए गए हैं। शिकायत के अनुसार इन गंभीर मामलों के बावजूद बैंक प्रबंधन ने न केवल इन अधिकारियों को संरक्षण दिया बल्कि उन्हें पदोन्नति और महत्वपूर्ण पदों पर बनाए रखा।
शिकायत में बैंक के प्रबंध निदेशक पंकज सूद, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स और पूर्व/वर्तमान अध्यक्षों पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कहा गया है कि सीट रोटेशन नीति की आड़ में मनमाने ढंग से तैनातियाँ कर कथित घोटालों, बहु-करोड़ रुपये के एनपीए खातों और अनियमितताओं को दबाने का प्रयास किया गया, जिससे सार्वजनिक धन और बैंक की वित्तीय सेहत को भारी नुकसान पहुँचा।
अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा ने नाबार्ड से मांग की है कि डीपीसी 2022 तथा पिछले दस वर्षों की सभी डीपीसी प्रक्रियाओं की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जाँच कराई जाए तथा जाँच पूरी होने तक किसी भी नई डीपीसी पर तत्काल रोक लगाई जाए। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे मामले में सीबीआई जाँच की मांग करते हुए आगे की कानूनी कार्यवाही करने के लिए बाध्य होंगे।
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