जोगिंद्रा सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक, सोलन में करोड़ों के घोटाले के गंभीर आरोप

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चेयरमैन व एमडी पर संसाधनों के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के आरोप

एएम नाथ। सोलन/चंडीगढ़, 21 मार्च :  हिमाचल प्रदेश के सोलन स्थित जोगिंद्रा सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक (JCCB) में कथित तौर पर चल रहे भ्रष्टाचार, घोटालों और सत्ता के खुले दुरुपयोग ने अब गंभीर और विस्फोटक रूप ले लिया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट, चंडीगढ़ के अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा द्वारा NABARD के मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO), मुंबई को दिनांक 21 मार्च 2026 को भेजी गई शिकायत ने बैंक प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर बेहद कठोर और चौंकाने वाले सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिकायत में सीधे तौर पर आरोप लगाया गया है कि बैंक के चेयरमैन मुकेश शर्मा और प्रबंध निदेशक पंकज सूद ने मिलकर एक “संगठित भ्रष्टाचार का रैकेट” खड़ा कर रखा है, जिसमें वरिष्ठ अधिकारी कुलदीप सिंह (AGM), राम पॉल (AGM), हरीश शर्मा (AGM) और गुरमीत सिंह (SM) सक्रिय रूप से शामिल हैं। आरोप है कि ये अधिकारी वर्षों से बैंक को निजी जागीर समझकर मनमानी कर रहे हैं और सार्वजनिक धन को बेरहमी से लूटा जा रहा है।
शिकायत के अनुसार 01 जनवरी 2022 से लेकर अब तक बैंक में नियम-कानूनों को पूरी तरह ताक पर रखकर खरीदारी और खर्च किए गए। बिना किसी बोर्ड प्रस्ताव, एजेंडा या वैधानिक स्वीकृति के लाखों-करोड़ों रुपये फिजूलखर्ची में उड़ाए गए। आरोप है कि बैंक का पैसा विज्ञापनों, पार्टियों, प्रोटोकॉल, निजी मेहमाननवाजी और पारिवारिक मौज-मस्ती पर बेहिसाब तरीके से लुटाया गया।
सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि बैंक प्रबंधन ने करीब 30 लाख रुपये की नई इनोवा गाड़ी उस समय खरीद ली, जब रजिस्ट्रार कोऑपरेटिव सोसाइटी (RCS), शिमला पहले ही इसकी अनुमति देने से मना कर चुका था। इसे सीधे-सीधे सरकारी आदेशों की अवहेलना और सार्वजनिक धन की खुली लूट बताया गया है। इतना ही नहीं, आरटीआई में यह भी सामने आया कि RCS के पास बैंक के वाहनों का कोई रिकॉर्ड ही उपलब्ध नहीं है, जो पूरे सिस्टम की संदिग्ध भूमिका को उजागर करता है।
इसके अलावा, शिकायत में यह भी आरोप है कि कैश सॉर्टिंग मशीन और जनरेटर की खरीद में 30 लाख रुपये से अधिक का भुगतान बिना किसी पूर्व स्वीकृति और औपचारिक प्रक्रिया के कर दिया गया, जो साफ तौर पर भ्रष्टाचार, मिलीभगत और वित्तीय हेरफेर की ओर इशारा करता है।
अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा ने यह भी दावा किया है कि उन्होंने NABARD, RCS शिमला सहित विभिन्न संस्थाओं को 25 से अधिक शिकायतें भेजी हैं, लेकिन हर बार मामले को दबा दिया गया। इससे यह गंभीर आशंका जताई गई है कि नियामक संस्थाएं भी इस पूरे भ्रष्टाचार तंत्र का हिस्सा बन चुकी हैं या जानबूझकर आंखें मूंदे बैठी हैं।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि बैंक के कुछ अधिकारियों के खिलाफ पहले ही दरलाघाट पुलिस स्टेशन और राज्य सतर्कता विभाग, सोलन में 3 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं, फिर भी संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की गई, जो पूरे तंत्र की निष्क्रियता या मिलीभगत को दर्शाता है।
राजनीतिक संरक्षण के आरोप भी इस मामले को और गंभीर बना रहे हैं। शिकायत में कहा गया है कि वर्तमान चेयरमैन एक सरकारी नामित व्यक्ति और कांग्रेस पार्टी से जुड़े होने के कारण कानून से ऊपर समझे जा रहे हैं, जिसके चलते उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
शिकायत में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के “जीरो टॉलरेंस” वाले दावों पर भी तीखा सवाल उठाया गया है और कहा गया है कि जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है, जहां भ्रष्टाचार खुलेआम फल-फूल रहा है और शिकायतें कागजों में दफन हो रही हैं।
सबसे गंभीर चेतावनी देते हुए शिकायतकर्ता ने कहा है कि यदि समय रहते इस पूरे मामले में कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो जोगिंद्रा बैंक की स्थिति बघाट अर्बन कोऑपरेटिव बैंक, सोलन जैसी हो सकती है, जहां कथित वित्तीय अनियमितताओं के कारण बैंक की साख और अस्तित्व पर ही संकट खड़ा हो गया था।
अंत में अधिवक्ता ने NABARD से मांग की है कि इस पूरे मामले की स्पेशल ऑडिट, फोरेंसिक जांच और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, अन्यथा यह मामला प्रदेश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटालों में से एक बन सकता है।
यह प्रकरण अब केवल एक बैंक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे प्रशासनिक और नियामक तंत्र की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है।

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