पालमपुर में आयोजित कार्यशाला में डाटा शुद्धता और बेहतर तकनीक पर दिया बल
पालमपुर, 6 मार्च। पालमपुर के होटल टी-बड में आज सिस्टम ऑफ एनवायरनमेंटल-इकोनॉमिक अकाउंटिंग (SEEA) फ्रेमवर्क तथा *सपोर्ट फॉर स्टैटिस्टिकल स्ट्रेंथनिंग (SSS) योजना* के अंतर्गत डेटा संग्रहण तंत्र को सुदृढ़ बनाने विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य पर्यावरणीय संसाधनों के बेहतर आकलन, डेटा प्रबंधन तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को मजबूत बनाना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि जिला कांगड़ा के उपायुक्त हेमराज बैरवा (आईएएस) द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के उपनिदेशक सुरेश चंद वर्मा ने स्वागत भाषण दिया तथा कार्यशाला के उद्देश्य और महत्व पर प्रकाश डाला इस दौरान मुख्य अतिथि को सम्मानित भी किया गया।
अपने संबोधन में उपायुक्त हेमराज बैरवा ने कहा कि किसी भी योजना या नीति निर्माण में डेटा की शुद्धता (Accuracy) अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यदि आंकड़ों की गुणवत्ता अच्छी नहीं होगी तो सरकार द्वारा बनाए जाने वाले कार्यक्रम और नीतिगत निर्णय भी प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि प्रभावी डेटा विश्लेषण के लिए यह आवश्यक है कि उपलब्ध आंकड़े गुणवत्तापूर्ण और विश्वसनीय हों।
उन्होंने आगे कहा कि विभिन्न विभागों के बीच डेटा का आदान-प्रदान सुचारू होना चाहिए, जिससे कार्यों में तेजी आए और अनावश्यक दोहराव से बचा जा सके। कई विभाग इस दिशा में पहले से ही अच्छा कार्य कर रहे हैं, लेकिन इसे और मजबूत करने की आवश्यकता है। उपायुक्त ने अधिकारियों से आह्वान किया कि नई तकनीकों का उपयोग करते हुए प्रभावी और विश्वसनीय डेटा तैयार किया जाए ताकि विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में बेहतर परिणाम प्राप्त हो सकें।
उन्होंने यह भी कहा कि कई बार डेटा उपलब्ध तो होता है, लेकिन उसकी शुद्धता सुनिश्चित नहीं होती, जिसके कारण वह निर्णय लेने के लिए उपयोगी नहीं रह जाता। इसलिए डेटा संग्रहण की प्रक्रिया को और मजबूत बनाना आवश्यक है। उन्होंने बल देते हुए कहा कि ऐसा डेटा तैयार किया जाना चाहिए जिससे किसी भी विषय पर पूछे जाने वाले प्रश्नों का स्पष्ट और सटीक उत्तर दिया जा सके। उपायुक्त ने भरोसा दिलाया कि जिला प्रशासन इस प्रणाली को सुदृढ़ करने और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
कार्यशाला के पहले दिन जिला सांख्यिकी कार्यालय कांगड़ा द्वारा प्रस्तुति दी गई, जबकि जिला गुड गवर्नेंस पर भी विस्तृत जानकारी साझा की गई। इसके अतिरिक्त भारत में एसईईए के क्रियान्वयन और विशेष रूप से वन क्षेत्र पर इसके प्रभाव को लेकर सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय की निदेशक स्मृति कीर्ति गायकवाड़ (आईएसएस) ने वर्चुअल माध्यम से महत्वपूर्ण जानकारी दी।
दूसरे सत्र में हिमाचल प्रदेश में कृषि विकास के विभिन्न पहलुओं पर डॉ. वीरेंद्र कुमार शर्मा पूर्व प्रोफेसर सीएसके हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर ने विस्तृत जानकारी दी। वहीं डॉ. एस.पी. सिंह, प्रोफेसर, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेस्ट मैनेजमेंट, भोपाल ने ईको-सिस्टम सेवाओं के मूल्यांकन की तकनीकों पर प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया।
कार्यशाला के दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं प्रतिभागियों ने पर्यावरणीय संसाधनों के बेहतर प्रबंधन, डेटा संग्रहण की आधुनिक तकनीकों तथा विभागीय समन्वय को मजबूत बनाने पर अपने विचार साझा किए।
नगर निगम आयुक्त पालमपुर नेत्रा मेती, एसडीएम पालमपुर डॉ. ओपी यादव सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी कर्मचारी इस दौरान मौजूद रहे।
