होशियारपुर, 20 फरवरी : पंजाब में वर्तमान रबी सीजन के दौरान लगभग 95 प्रतिशत क्षेत्र में गेहूं की बुवाई 25 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच की गई, जो गेहूं की बुवाई का उपयुक्त समय माना जाता है। गेहूं की फसल विशेष रूप से दाना भरने के समय उच्च तापमान के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होती है। इस अवधि में तापमान बढ़ने से दानों के वजन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जिससे उत्पादन तथा गुणवत्ता में गिरावट आती है। अधिक तापमान के कारण हल्की से मध्यम भूमि में बोई गई अगैती गेहूं की फसल जल्दी बालियां निकालकर शीघ्र पक जाती है, जिससे दाने कमजोर रह जाते हैं।
फरवरी 2026 के दूसरे सप्ताह में पिछले वर्ष की तुलना में तापमान 2 से 4 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना के प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. मख्खन सिंह भुल्लर ने किसानों को सलाह दी है कि गेहूं की फसल को हल्की सिंचाई दी जाए। सिंचाई करते समय हवा की गति का ध्यान रखें ताकि फसल गिरने से बची रहे।
फसल विज्ञान विभाग के डॉ. हरि राम मुखी ने जानकारी देते हुए बताया कि जो गेहूं अभी गोभ (फ्लैग लीफ) अवस्था में है, उसे बढ़ते तापमान से बचाने के लिए 2% पोटैशियम नाइट्रेट (13:0:45) का छिड़काव किया जा सकता है। इसके लिए 4 किलोग्राम पोटैशियम नाइट्रेट को 200 लीटर पानी में घोलकर पहला स्प्रे गोभ पत्ता निकलने पर तथा दूसरा छिड़काव बूर आने के समय किया जाए। यह घोल 200 लीटर का ही तैयार करें और स्प्रे शाम के समय करना बेहतर रहता है।
विशेषज्ञों के अनुसार हल्की सिंचाई और पोटैशियम नाइट्रेट (13:0:45) के छिड़काव से उच्च तापमान के दुष्प्रभाव से फसल को काफी हद तक बचाया जा सकता है।
प्रमुख प्रसार वैज्ञानिक एवं फार्म सलाहकार सेवा केंद्र गंगियां की डॉ. चरणजीत कौर ने किसानों से अपील की है कि विश्वविद्यालय की इन सिफारिशों को अपनाकर वे बढ़ते तापमान के दुष्प्रभाव से गेहूं की फसल की प्रभावी सुरक्षा कर सकते हैं।
