चंडीगढ़: पंजाब के पूर्व चीफ सेक्रेटरी और रिटायर्ड आईएएस अधिकारी वीके जंजुआ के खिलाफ अब भ्रष्टाचार का मामला चलेगा। केंद्र सरकार ने 2 लाख रुपये की रिश्वत के एक पुराने मामले में उनके खिलाफ केस चलाने की अनुमति दे दी है।
यह मंजूरी डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और 13(2) के तहत दी गई है। शुक्रवार को हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सतपाल जैन ने केंद्र सरकार की ओर से यह महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
इंडस्ट्री विभाग में आरोप
यह मामला 2009 का है, जब वीके जंजुआ पंजाब के इंडस्ट्री एवं कॉमर्स विभाग में डायरेक्टर कम सेक्रेटरी के पद पर कार्यरत थे। उन पर आरोप है कि उन्हें 2 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया था। प्रारंभ में, एक आईएएस अधिकारी होने के कारण विजिलेंस विभाग ने उनके खिलाफ कार्रवाई करने से मना कर दिया था। हालांकि, बाद में इस मामले में केंद्र सरकार से अभियोजन की अनुमति मांगी गई थी। अब केंद्र से हरी झंडी मिलने के बाद इस मामले की सुनवाई सीधे स्पेशल कोर्ट में होगी।
जांच में मिले सबूत
केंद्र सरकार द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि प्रारंभिक जांच में जंजुआ के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिले हैं। यह मंजूरी पंजाब सरकार की सिफारिश, केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) की सलाह और जांच रिपोर्ट की विस्तृत समीक्षा के बाद दी गई है। उल्लेखनीय है कि 2022 में जब पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार बनी, तब अनिरुद्ध तिवारी को हटाकर वीके जंजुआ को पंजाब का 41वां चीफ सेक्रेटरी नियुक्त किया गया था। अब रिटायरमेंट के बाद इस मामले से उनकी कानूनी समस्याएं बढ़ गई हैं।
