रजनी पाटिल बनीं हिमाचल कांग्रेस की नई प्रभारी : प्रदेश कार्यकारिणी के पुनर्गठन की तैयारी

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अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) ने राज्यसभा सांसद रजनी पाटिल को एक बार फिर हिमाचल प्रदेश कांग्रेस का प्रभारी नियुक्त किया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल द्वारा बीती रात जारी पत्र के अनुसार राजीव शुक्ला को हटाकर रजनी पाटिल को हिमाचल और चंडीगढ़ कांग्रेस का नया प्रभारी बनाया गया है।
रजनी की यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब प्रदेश कांग्रेस की नई कार्यकारिणी का गठन होना है और इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है।  राजीव शुक्ला पिछले पांच वर्षों से हिमाचल कांग्रेस के प्रभारी थे। सितंबर 2020 में रजनी पाटिल की जगह उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। हालांकि प्रदेश कांग्रेस में आंतरिक गुटबाजी और चुनावी रणनीति को लेकर उन पर कई बार सवाल उठे थे। विश्लेषकों का मानना है कि प्रदेश में संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनावों को देखते हुए पार्टी आलाकमान ने यह बड़ा बदलाव किया है।
पहले भी संभाल चुकी हैं हिमाचल की कमान
रजनी पाटिल इससे पहले भी हिमाचल कांग्रेस की प्रभारी रह चुकी हैं। मई 2018 में कांग्रेस ने सुशील कुमार शिंदे को हटाकर उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी थी। उन्होंने लगभग दो साल तक इस पद पर रहते हुए पार्टी संगठन को मजबूत करने का काम किया। रजनी पाटिल महाराष्ट्र से राज्यसभा सदस्य हैं और उन्हें कांग्रेस में एक सशक्त महिला नेता के रूप में जाना जाता है। उनके पास संगठनात्मक कौशल और अनुभव का लंबा इतिहास है, जिससे उन्हें दोबारा यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।
प्रदेश कार्यकारिणी के पुनर्गठन की तैयारी
प्रदेश कांग्रेस की नई कार्यकारिणी के गठन से पहले यह बदलाव बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाल ही में कांग्रेस आलाकमान ने प्रदेश अध्यक्ष को छोड़कर बाकी पूरी कार्यकारिणी को भंग कर दिया था। इसके बाद से ही अटकलें तेज थीं कि जल्द ही प्रदेश संगठन में बड़ा फेरबदल हो सकता है। रजनी पाटिल पर अब नई कार्यकारिणी के गठन की जिम्मेदारी होगी, जिससे प्रदेश कांग्रेस में नए समीकरण बन सकते हैं।
रजनी पाटिल की नियुक्ति के साथ ही हिमाचल कांग्रेस में महिला नेतृत्व को मजबूती मिली है। वर्तमान में प्रतिभा सिंह प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष हैं और अब रजनी पाटिल प्रभारी के रूप में उनका साथ देंगी। यह सम्भवतः पहली बार है जब प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष और प्रभारी दोनों ही महिलाएं हैं। इसे पार्टी में महिला सशक्तिकरण की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि रजनी पाटिल के आने से प्रदेश कांग्रेस की चुनावी रणनीति में बदलाव देखने को मिल सकता है। उनका अनुभव और संगठनात्मक कौशल आगामी चुनावों में पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। वहीं गुटबाजी की चुनौतियों से निपटना उनके लिए सबसे बड़ी परीक्षा होगी।
रजनी पाटिल के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रदेश में गुटबाजी को खत्म करके पार्टी को एकजुट रखना होगा। इसके अलावा आगामी चुनावों में पार्टी को मजबूत स्थिति में लाने के लिए उन्हें ठोस रणनीति बनानी होगी। नई कार्यकारिणी के गठन में संतुलन बनाते हुए सभी धड़ों को साथ लेकर चलना उनकी नेतृत्व क्षमता की अग्निपरीक्षा होगी।
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