सीएम सुक्खू कल शनिवार को पेश करेंगे हिमाचल का बजट…जनता, कर्मचारी, पेंशनर और युवा वर्ग इससे को बड़ी उम्मीदें

by

एएम नाथ : शिमला, 20 मार्च :  हिमाचल प्रदेश की आर्थिक दिशा तय करने वाला बजट शनिवार को विधानसभा में पेश होने जा रहा है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू अपने कार्यकाल का लगातार चौथा बजट पेश करेंगे।

इस बार का बजट कई मायनों में अहम माना जा रहा है, क्योंकि एक ओर राज्य गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है वहीं दूसरी ओर जनता, कर्मचारी, पेंशनर और युवा वर्ग इससे बड़ी उम्मीदें लगाए बैठे हैं।

राज्य की आर्थिक स्थिति इस समय नाजुक बनी हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार हिमाचल प्रदेश पर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है। इसके साथ ही केंद्र सरकार द्वारा मिलने वाली राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) की करीब 10 हजार करोड़ रुपये की राशि भी बंद हो चुकी है। यही नहीं, राज्य की लोन लेने की सीमा को भी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 5 प्रतिशत से घटाकर 3 प्रतिशत कर दिया गया है। ऐसे में सरकार के लिए संसाधन जुटाना और खर्चों को संतुलित करना बड़ी चुनौती बन गया है।

इन हालात के बीच मुख्यमंत्री सुक्खू पहले ही संकेत दे चुके हैं कि सरकार वित्तीय अनुशासन पर जोर देगी और आय बढ़ाने के नए स्रोत तलाशेगी। हाल ही में उन्होंने सलाहकारों, बोर्डों और निगमों के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों से कैबिनेट रैंक वापस लेने का फैसला किया। साथ ही उनकी सैलरी में अगले छह महीनों के लिए 20 प्रतिशत कटौती भी की गई है। इसे सरकार के खर्च कम करने के कदम के रूप में देखा जा रहा है।बजट से पहले ही यह भी चर्चा है कि इस बार सरकार कुछ कड़े फैसले ले सकती है। हालांकि, इसके साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि सरकार अपनी चुनावी गारंटियों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। इनमें महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये, युवाओं को रोजगार के अवसर और 300 यूनिट मुफ्त बिजली जैसे वादे शामिल हैं। इन योजनाओं को लागू करने के लिए बड़े वित्तीय संसाधनों की जरूरत होगी, जो सरकार के सामने एक कठिन संतुलन का सवाल खड़ा करता है।

युवा वर्ग इस बजट से खास उम्मीद लगाए बैठा है। रोजगार के अवसर बढ़ाने और सरकारी नौकरियों के ऐलान की संभावना पर सभी की नजरें टिकी हैं। वहीं, कर्मचारी और पेंशनर लंबे समय से लंबित महंगाई भत्ते (डीए) और अन्य वित्तीय देनदारियों के भुगतान को लेकर राहत की उम्मीद कर रहे हैं। पिछले बजट के आंकड़ों को देखें तो मुख्यमंत्री सुक्खू ने वर्ष 2025-26 के लिए करीब 58 हजार करोड़ रुपये का बजट पेश किया था। लेकिन हाल ही में विधानसभा में पारित अनुपूरक बजट ने इस आंकड़े को लगभग 40 हजार करोड़ रुपये और बढ़ा दिया, जिससे कुल बजट आकार काफी बढ़ गया। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार का बजट भी इसी स्तर के आसपास रह सकता है।

सरकार का फोकस इस बार ‘आत्मनिर्भर हिमाचल’ की दिशा में भी रह सकता है। मुख्यमंत्री कई बार यह बात कह चुके हैं कि हिमाचल को अपने संसाधनों के दम पर खड़ा करना जरूरी है। इसके लिए पर्यटन, जल विद्युत और अन्य क्षेत्रों से आय बढ़ाने पर जोर दिया जा सकता है।

Share
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

You may also like

article-image
दिल्ली , पंजाब , राष्ट्रीय , हरियाणा , हिमाचल प्रदेश

अटारी रेलवे स्टेशन पर पासपोर्ट और वीजा होना अनिवार्य

अमृतसर :  रतीय रेलवे को देश की जीवनरेखा माना जाता है, जहां रोजाना करोड़ों यात्री सफर करते हैं। भारत में लगभग 8500 रेलवे स्टेशन हैं, जहां बिना किसी परेशानी के टिकट खरीदे जा सकते...
article-image
हिमाचल प्रदेश

मानसून की पहली ही बारिश से तबाही, भूस्खलन से आठ गाड़ियों को पहुंचा नुकसान

एएम नाथ। शिमला :   हिमाचल प्रदेश में दक्षिण पश्चिम मानसून ने प्रवेश करते ही तबाही मचाई है। इस बार पिछले साल के मुकाबले देरी से पहुंचे मानसून की पहली ही बारिश से शिमला में...
article-image
हिमाचल प्रदेश

सड़क सुरक्षा एवं स्वच्छता विषय पर निकाली जन-जागरूकता रैली

राजकीय महाविद्यालय सलूणी में आयोजित हो रहा राष्ट्रीय सेवा योजना का सात दिवसीय विशेष शिविर एएम नाथ। सलूणी (चम्बा) : राजकीय महाविद्यालय सलूणी में आयोजित राष्ट्रीय सेवा योजना के सात दिवसीय विशेष शिविर के...
article-image
हिमाचल प्रदेश

मुख्य सचिव ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्वास कार्यों की समीक्षा की

एएम नाथ। शिमला।  मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने आज प्रदेश के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की वर्तमान स्थिति और राहत एवं पुनर्वास कार्यों की समीक्षा के लिए संबंधित अधिकारियों, उपायुक्तों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों...
Translate »
error: Content is protected !!