एएम नाथ। धर्मशाला : हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की बेटी ने प्रदेश का नाम रोशन किया है। नूरपुर क्षेत्र के डन्नी गांव की रहने वाली ऐशिता शर्मा ने भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर के पद पर चयनित होकर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है। ऐशिता ने प्रतिष्ठित एयर फोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट (AFCAT) परीक्षा में अखिल भारतीय मेरिट सूची में 12वां स्थान प्राप्त कर यह बड़ी उपलब्धि हासिल की है। ऐशिता की इस सफलता को क्षेत्र में असाधारण उपलब्धि माना जा रहा है। सीमित संसाधनों वाले ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर देश की सबसे प्रतिष्ठित रक्षा सेवाओं में स्थान बनाना आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
ऐशिता शर्मा ने अपनी प्रारंभिक और स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय, चंडीगढ़ से पूरी की। शुरू से ही पढ़ाई में मेधावी रहीं ऐशिता ने इसके बाद पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से संबद्ध सीसीईटी कॉलेज से बीई (कंप्यूटर साइंस) में स्नातक डिग्री हासिल की। तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ उन्होंने अनुशासन, नेतृत्व और देशसेवा के मूल्यों को भी आत्मसात किया, जो आगे चलकर उनके चयन में सहायक बने।
ऐशिता को देशसेवा का जज्बा अपने परिवार से विरासत में मिला है। उनके पिता राजीव शर्मा वर्तमान में भारतीय वायुसेना में सेवा दे रहे हैं। पिता को वर्दी में देश की सेवा करते देख ऐशिता के मन में भी बचपन से ही वायुसेना में जाने का सपना आकार लेने लगा। परिवार का अनुशासित वातावरण और राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पण उनकी सफलता की मजबूत नींव बना।
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जनवरी 2026 से शुरू होगा प्रशिक्षण
ऐशिता शर्मा जनवरी 2026 से वायु सेना अकादमी, सिकंदराबाद में अपना प्रशिक्षण प्रारंभ करेंगी। कठिन और चुनौतीपूर्ण प्रशिक्षण के बाद वे भारतीय वायुसेना में एक जिम्मेदार फ्लाइंग ऑफिसर के रूप में देश की सुरक्षा में योगदान देंगी।
ऐशिता के चयन की खबर मिलते ही डन्नी गांव, नूरपुर क्षेत्र और पूरे कांगड़ा जिले में खुशी की लहर दौड़ गई। स्थानीय लोगों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों ने मिठाइयां बांटकर खुशी जाहिर की और ऐशिता के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। क्षेत्रवासियों का कहना है कि ऐशिता ने यह साबित कर दिया है कि दृढ़ निश्चय, कड़ी मेहनत और सही मार्गदर्शन से किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है।
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युवाओं के लिए बनीं प्रेरणा
ऐशिता शर्मा की यह उपलब्धि खासतौर पर हिमाचल की बेटियों और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने यह संदेश दिया है कि बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं और देश की रक्षा जैसी जिम्मेदार सेवाओं में भी अग्रणी भूमिका निभा सकती हैं। नूरपुर की इस बेटी की सफलता आज पूरे हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व का विषय है और आने वाले समय में उनसे और भी बड़ी उपलब्धियों की उम्मीद की जा रही है।
