चंडीगढ़। पंजाब में पंजाबी विषय के मास्टर कैडर की भर्ती में चयन को लेकर चल रहे विवाद पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार के शिक्षा विभाग को दो सप्ताह के भीतर अंतिम निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि तय समयसीमा में आदेश का पालन नहीं होने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जा सकती है। मामले की अगली सुनवाई 31 अक्टूबर, 2026 को होगी।
यह मामला पंजाबी विषय के 534 मास्टर पदों की भर्ती से संबंधित है। भर्ती के लिए 8 जनवरी, 2022 को विज्ञापन जारी किया गया था। इसके तहत 4 सितंबर, 2022 को आयोजित लिखित परीक्षा में याचिकाकर्ता जसवीर कौर ने 138 अंक प्राप्त किए थे। हालांकि, दस्तावेजों की जांच के बाद 16 दिसंबर, 2022 को जारी चयन सूची में उन्हें नियुक्ति नहीं मिली और वह प्रतीक्षा सूची में छठे स्थान पर रहीं।
138 अंक के बावजूद नियुक्ति नहीं मिलने पर उठाए सवाल
याचिका में कहा गया कि बुटा सिंह मामले में हाईकोर्ट के आदेश के बाद भर्ती का परिणाम संशोधित किया गया। याचिकाकर्ता के अनुसार, संशोधित चयन सूची में 137 अंक प्राप्त करने वाले एक अभ्यर्थी का चयन कर लिया गया, जबकि 138 अंक हासिल करने के बावजूद उन्हें नियुक्ति नहीं दी गई।
याचिकाकर्ता ने इसे मेरिट और समान अवसर के सिद्धांतों के विपरीत बताते हुए नियुक्ति की मांग की है। मामले में अदालत के समक्ष शिक्षा विभाग के निर्णय में देरी का मुद्दा भी उठाया गया।
पहले भी दिया गया था फैसला लेने का निर्देश
हाईकोर्ट ने 6 जुलाई को शिक्षा विभाग को मामले में अंतिम निर्णय लेने का निर्देश दिया था। इसके बाद 9 सितंबर को हुई सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने फैसला लेने के लिए चार सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा था। अदालत ने समय देते हुए अगली सुनवाई पर निर्णय की जानकारी प्रस्तुत करने को कहा था। ऐसा नहीं होने पर संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया गया था।
निर्धारित सुनवाई पर शिक्षा विभाग की सचिव अदालत में पेश हुईं। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगले दो सप्ताह के भीतर अंतिम निर्णय लेकर अदालत के रिकॉर्ड पर पेश कर दिया जाएगा और आगे समय बढ़ाने की मांग नहीं की जाएगी।
अदालत ने इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले को 31 अक्टूबर, 2026 के लिए सूचीबद्ध कर दिया। साथ ही इसे तत्काल सुनवाई की सूची में रखने का निर्देश दिया। अब शिक्षा विभाग के अंतिम निर्णय और अगली सुनवाई पर अदालत के रुख पर नजर रहेगी।
