1979 -1980 दौरान मैट्रिक पास आउट सहपाठियों व उस समय के अध्यापकों का अलग किस्म की विशेष मिलनी कार्यक्रम का आयोजन : अध्यापक नरदेव का इतना डर था कि जब स्कूल के गेट पर पहुँचते थे तो पुरे स्कूल में शांति छा जाती थी

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गढ़शंकर : गढ़शंकर तहसील के अंतर्गत पड़ते सरकारी सीनियर सेकंडरी स्कूल स्कूल गुरुबिशान पूरी भवानीपुर में वर्ष 1979 -1980 दौरान मैट्रिक पास आउट सहपाठियों व उस समय के अध्यापकों का अलग किस्म की विशेष मिलनी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उक्त कार्यक्रम के आयोजन में मुख्य भुमिका भाग सिंह अटवाल व राणा जसवीर सिंह ने निभाई। जिसमें 43 वर्ष पूर्व की पढ़ाई दौरान की सभी ने यादें ताजा की। कार्यक्रम के शुरू में इस दुनिया को अलविदा कह चुके अध्यापकों व सहपठायीओं को शोक प्रस्ताव पास कर 2 मिनट का मौन रख कर श्रद्धांजिल दी ।
विशेष मिलनी समागम में मंच संचालन का काम रामजी दास चौहान ने निभाई तो सबसे पहले सतीश राणा ने सभी का स्वागत किया और स्कूल समय की यादों को ताजा करते हुए स्कूल समय के कई मजेदार किस्से सुनाए। भाग सिंह अटवाल ने स्कूल समय की बातें करते हुए उस समय के अध्यापकों विधार्थियों के रिश्तों को बारे जानकारी देते हुए कहा कि इस स्कूल को कभी भी किसी भी तरह की जरूरत हो मैं खुद भी और हम मिलकर काम करेंगे। इसके दौरान अध्यापक नरदेव सिंह राणा, अम्बरसरियाँ भारद्वाज, जगदेव पाठक व विक्रमजीत सिंह डायरिआ ने सभी को आशीर्वाद देते हुए कहा कि उन्हीनों ने कहा कि इस तरह का समागम कर जिस तरह आज यह विशेष और अलग किस्म का समागम आयोजन कर हमें बुलाया और इतना प्यार व सम्मान दिया । जिसने हमें बहुत ख़ुशी प्रदान की है। इसके इलावा इस दौरान राजिंदर धंजल, पीएनबी के मैनेजर पाखर सिंह, स्कूल के कार्यकारी प्रिंसीपल ब्रिज मोहन] पत्रकार अजायब सिंह बोपाराय और नंबरदार काबुल सिंह ने अपने विचार प्रकट किए। जिसके बाद सभी सहपाठियों ने उस समय के अध्यापक नरदेव सिंह राणा, अम्बरसरियाँ भारद्वाज, जगदेव पाठक व विक्रमजीत सिंह डायरिआ को सम्मान चिन्ह व सिरोपा आदि भेंट कर सम्मान किया। इस दौरान सहपाठियों में संजय कुमार, हरी ओम ,सुरिंदर सिंह, चैंचल सिंह , मदन लाल, प्रेम चंद, दर्शन सिंह नैनवां , गुलबास राणा, केवल कृष्ण, नरेश चंद, वरिंदर सिंह, बलविंदर सिंह, दर्शन लाल खुराली, राम प्रकाश, सतीश कुमार सेखोवाल, रविंदर सिंह, बलविंदर सिंह झोनोवाल, राणा वरिंदरसिंघ सेखोवाल, राणा रविंदर सिंह नैनवां, नरेश कुमार गढ़ी मानसोवल , सुरिंदर सिंह बैंस टब्बा व अन्य सहपाठियों के इलावा मैडम डायरिआ मौजूद थे।
यादें जो ताजा की गई : सभी ने कहा सभी अध्यापक उन्हें बहुत प्यार करते थे तो सख्ती से भी पेश आते थे, अध्यापक नरदेव सिंह जब स्कूल के गेट पर पहुँचते थे पुरे स्कूल में छा जाती थी, उनका उस समय विधार्थियों में उनका डर इतना था। आज भी उनके पढ़ाए टेंस हमें याद है। एक ने कहा कि अध्यापक अम्बरसरियाँ भारद्वाज की क्लास में मैने दूसरे विषय की किताब खोल ली तो मेरी रेल रेल बना दी थी, अध्यापक जगदेव पाठक द्वारा गणित के फॉर्मूले एक ने सुनाए तो एक लेट पहुंचा तो सभी उससे कहने लगे के यद् हे तुझे जब वाल लम्बे रख क्र स्कूल आया तो कैसे एक अध्यापक ने वालों से पकड़ क्र खींचा था और फिर कभी वाल नहीं बढ़ाएं। इस तरह ही एक दूसरे की अध्यापकों द्वारा शरारतें करने पर हुयी पिटाई की यादें सुना कर खूब सभी ने मस्ती की

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