राजपुरा/फगवाड़ा। पंजाब की दो प्रमुख निजी यूनिवर्सिटियों में लगातार दो रातों में हुए छात्र विरोध और हिंसा के घटनाक्रम ने सोशल मीडिया पर फैलने वाली अपुष्ट सूचनाओं, छात्र सुरक्षा और विश्वविद्यालयों के संकट प्रबंधन को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। पहले राजपुरा स्थित चितकारा यूनिवर्सिटी में हॉस्टल से छात्राओं के लापता होने और ‘भूत’ की अफवाह फैली, जबकि अगले ही दिन फगवाड़ा की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में एक छात्रा से कथित यौन उत्पीड़न और मौत से जुड़े दावे सोशल मीडिया पर प्रसारित हुए।
दोनों मामलों में छात्र हॉस्टल से बाहर आए, प्रदर्शन हुए और बाद में स्थिति हिंसक हो गई। हालांकि, पंजाब पुलिस ने अब तक दोनों घटनाओं के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं की है।
दोनों मामलों में दिखा समान घटनाक्रम
चितकारा का राजपुरा कैंपस और LPU का फगवाड़ा कैंपस करीब 140 किलोमीटर दूर हैं। 25 सितंबर और उसके बाद की रातों में दोनों जगह छात्राओं की सुरक्षा से जुड़े अपुष्ट दावे सोशल मीडिया और छात्र समूहों में तेजी से प्रसारित हुए। इसके बाद बड़ी संख्या में छात्र प्रदर्शन के लिए जुटे।
हालांकि, यह समानता दोनों घटनाओं के बीच किसी कनेक्शन का प्रमाण नहीं है। पंजाब पुलिस के विशेष डीजीपी परवीन कुमार सिन्हा के अनुसार, अभी तक दोनों घटनाओं के बीच कोई संबंध सामने नहीं आया है। पुलिस दोनों मामलों की अलग-अलग जांच कर रही है।
प्रैंक से फैली ‘भूत’ की अफवाह
पुलिस के अनुसार, चितकारा यूनिवर्सिटी में विवाद की शुरुआत 23 सितंबर को कुछ छात्राओं द्वारा हॉस्टल में स्पीकर के जरिए डरावनी आवाजें चलाने से हुई। इसके बाद हॉस्टल में ‘भूत’ होने की अफवाह फैल गई।
सोशल मीडिया पर इसे तीन साल पहले हॉस्टल में जान गंवाने वाली एक छात्रा की ‘आत्मा’ से जोड़ दिया गया। इसके बाद चीखें सुनाई देने, एंबुलेंस आने और एक पादरी के कैंपस पहुंचने जैसी घटनाओं को भी इसी अफवाह से जोड़कर प्रचारित किया गया।
बाद में छात्र समूहों में दो छात्राओं के लापता होने की बात भी फैल गई। हालांकि, पुलिस और यूनिवर्सिटी प्रशासन के अनुसार किसी छात्रा के लापता होने या हॉस्टल में किसी मौत की पुष्टि नहीं हुई। पुलिस ने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारी कथित तौर पर लापता छात्राओं के नाम, फोटो, रोल नंबर या पहचान से जुड़ी अन्य जानकारी उपलब्ध नहीं करा सके।
प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़ का आरोप
25 सितंबर की रात चितकारा कैंपस में सैकड़ों छात्र जुटे और यूनिवर्सिटी प्रशासन से स्पष्टीकरण की मांग की। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
पुलिस के अनुसार प्रदर्शन के दौरान दो पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया और एक पुलिसकर्मी के साथ मारपीट हुई। कैंपस की संपत्ति में भी तोड़फोड़ की गई। मामले में फिलहाल FIR के बजाय डेली डायरी रिपोर्ट दर्ज कर जांच की जा रही है। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि हिंसा में किसी बाहरी व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।
यूनिवर्सिटी ने 28 सितंबर से 1 अक्टूबर तक छुट्टी घोषित की है, जबकि नियमित कक्षाएं 5 अक्टूबर से शुरू होने की जानकारी दी गई है।
LPU में यौन उत्पीड़न के दावे से मचा बवाल
चितकारा के घटनाक्रम के अगले दिन LPU में छात्रों का विरोध शुरू हो गया। सोशल मीडिया और छात्र समूहों में दावा किया गया कि गर्ल्स हॉस्टल में एक छात्रा के साथ किसी बाहरी व्यक्ति ने यौन उत्पीड़न किया और बाद में उसकी मौत हो गई या उसने खुद जान दे दी।
सोशल मीडिया पर आरोपी की पहचान को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आए। कहीं उसे प्लंबर तो कहीं पेंटर या अन्य बाहरी कर्मचारी बताया गया। हालांकि, शुरुआती सूचनाओं में कई विरोधाभासी दावे सामने आए और पुलिस ने अभी तक सोशल मीडिया पर किए गए सभी दावों की पुष्टि नहीं की है।
छात्रों की शिकायत के आधार पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज की गई है और मामले की जांच के लिए SIT गठित की गई है। जांच में फोरेंसिक साक्ष्य, CCTV फुटेज, फोन रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध सबूतों को शामिल किया जा रहा है।
छात्राओं के वीडियो ने खड़े किए नए सवाल
LPU प्रशासन ने शुरुआती आरोपों को झूठा और मनगढ़ंत बताया। इसके बाद यूनिवर्सिटी की ओर से संबंधित हॉस्टल के एक कमरे में रहने वाली तीन छात्राओं का वीडियो जारी किया गया, जिसमें उन्होंने कमरे में ऐसी कोई घटना होने से इनकार किया।
बाद में सामने आई रिपोर्टों में इन छात्राओं की ओर से आरोप लगाया गया कि वीडियो में उनसे क्या कहना है, यह बताया गया था और उनकी अनुमति के बिना वीडियो रिकॉर्ड या साझा किया गया। इस दावे के बाद विश्वविद्यालय के संकट प्रबंधन और छात्रों की सहमति से जुड़े सवाल भी सामने आए।
फिलहाल दोनों घटनाओं में सोशल मीडिया पर प्रसारित दावों और वास्तविक घटनाक्रम के बीच अंतर स्पष्ट करने की जिम्मेदारी जांच एजेंसियों पर है। चितकारा और LPU मामलों को लेकर अंतिम तस्वीर पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
