एएम नाथ। जुन्गा/शिमला : जुन्गा रियासत के ऐतिहासिक शाही महल में आग लगने की दुखद घटना ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध और शोकाकुल कर दिया है। इस हादसे में करीब 200 वर्ष पुराने इस शाही महल का ऊपरी हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे एक अमूल्य ऐतिहासिक धरोहर को भारी नुकसान पहुंचा है।
यह महल न केवल जुन्गा रियासत के गौरवशाली इतिहास का प्रतीक रहा है, बल्कि हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और स्थापत्य विरासत का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
यह शाही महल अपनी विशिष्ट पहाड़ी वास्तुकला, पारंपरिक शैली और उत्कृष्ट लकड़ी की नक्काशी के लिए प्रसिद्ध था। स्थानीय कारीगरों की कला और उस दौर की निर्माण तकनीक इस इमारत में साफ झलकती थी।
ऐसे ऐतिहासिक धरोहर स्थल केवल ईंट, पत्थर और लकड़ी से बनी संरचनाएं नहीं होते, बल्कि वे हमारे अतीत की जीवंत कहानियों, परंपराओं और सामूहिक स्मृतियों को संजोए रखते हैं। इस कारण महल को हुआ नुकसान अपूरणीय सांस्कृतिक क्षति के रूप में देखा जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि यह शाही महल लोक निर्माण विभाग मंत्री विक्रमादित्य सिंह के मामा पृथ्वी विक्रम सिंह का है। इस दुखद घटना से न केवल परिवार को गहरा आघात पहुंचा है, बल्कि पूरे क्षेत्र में भी शोक का माहौल है।
स्थानीय लोगों के लिए यह महल भावनात्मक रूप से भी जुड़ा हुआ था, क्योंकि यह उनकी ऐतिहासिक पहचान का प्रतीक माना जाता था।
यह घटना एक बार फिर ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा और संरक्षण की आवश्यकता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। समय की मांग है कि सरकार और संबंधित विभाग ऐसे विरासत स्थलों के संरक्षण, अग्नि सुरक्षा और नियमित रखरखाव के लिए ठोस कदम उठाएं, ताकि भविष्य में हमारी सांस्कृतिक धरोहरें इस प्रकार की त्रासद घटनाओं से सुरक्षित रह सकें।
