राहुल गांधी के पुणे कार्यक्रम को सोशल मीडिया पर प्रमोट करने वाले नेताओं में राजा वड़िंग, विजय इंदर सिंगला और राणा गुरजीत सिंह आगे
चंडीगढ़। पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस हाईकमान ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की सोशल मीडिया सक्रियता की निगरानी शुरू कर दी है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से विशेष आईटी टीम के माध्यम से पंजाब के उन वरिष्ठ नेताओं के सोशल मीडिया अकाउंट की समीक्षा करवाई गई है, जिनके पास आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं।
बताया जा रहा है कि इस रिपोर्ट के जरिए यह आकलन किया गया कि पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पार्टी हाईकमान और उसके प्रमुख मुद्दों को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से कितनी गंभीरता और सक्रियता से आगे बढ़ा रहे हैं।
13 वरिष्ठ नेताओं के अकाउंट खंगाले गए
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस की आईटी टीम ने पंजाब कांग्रेस के 13 वरिष्ठ नेताओं के सोशल मीडिया अकाउंट की समीक्षा की। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, चुनाव प्रबंधन एवं समन्वय समिति के प्रभारी विजय इंदर सिंगला और चुनाव प्रचार समिति के सह-अध्यक्ष एवं विधायक राणा गुरजीत सिंह सोशल मीडिया पर सक्रिय नजर आए।
रिपोर्ट में खास तौर पर यह देखा गया कि इन नेताओं ने राहुल गांधी के कार्यक्रमों और उनके द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किस स्तर तक प्रचारित किया।
राहुल गांधी के पुणे कार्यक्रम को बनाया आधार
सूत्रों के अनुसार, इस सोशल मीडिया समीक्षा के लिए राहुल गांधी के 22 अगस्त को पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को आधार बनाया गया। आईटी टीम ने देखा कि पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने राहुल गांधी के कार्यक्रम और उनके भाषण को अपने-अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर कितना आगे बढ़ाया।
रिपोर्ट के मुताबिक, राजा वड़िंग, विजय इंदर सिंगला और राणा गुरजीत सिंह ने राहुल गांधी के पुणे कार्यक्रम से जुड़ी पोस्ट और उनकी स्पीच को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया।
चुनाव से पहले सोशल मीडिया पर बढ़ेगा फोकस
पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस हाईकमान सोशल मीडिया को पार्टी के राजनीतिक अभियान का महत्वपूर्ण माध्यम मान रहा है। ऐसे में वरिष्ठ नेताओं की डिजिटल सक्रियता पर नजर रखने की इस कवायद को पार्टी की चुनावी रणनीति और संगठनात्मक अनुशासन से जोड़कर देखा जा रहा है।
हालांकि, पार्टी की ओर से इस सोशल मीडिया रिपोर्ट को लेकर अभी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
