23 साल पुराने जहरीला पदार्थ देकर हत्या के मामले में पत्नी बरी, हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा की रद्द

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अदालत ने कहा- मौत जहर से हुई, लेकिन यह साबित नहीं कर सका अभियोजन कि जहर पत्नी ने ही दिया था

चंडीगढ़। करीब 23 साल पुराने जहरीला पदार्थ देकर पति की हत्या करने के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी पत्नी बलजीत कौर को बरी कर दिया। अदालत ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को रद्द करते हुए उसे संदेह का लाभ दिया।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में माना कि मृतक सरमुख सिंह की मौत जहरीले पदार्थ के सेवन के कारण हुई थी, लेकिन अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि उसे जहर उसकी पत्नी बलजीत कौर ने ही दिया था। अदालत ने इसी आधार पर दोषसिद्धि को बरकरार रखने से इनकार कर दिया।

2003 में हुई थी मौत

मामला वर्ष 2003 में मजीठा थाना क्षेत्र का है। बलजीत कौर के पति सरमुख सिंह हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात थे। अभियोजन के अनुसार, 8 और 9 अगस्त 2003 की दरम्यानी रात ड्यूटी से लौटने के बाद सरमुख सिंह ने परिवार के साथ खाना खाया और करीब 11 बजे सो गए।

अगली सुबह करीब छह बजे वह मृत पाए गए। शुरुआत में मौत को संदिग्ध नहीं माना गया और इसे हृदयाघात से जोड़कर देखा गया।

विसरा जांच में सामने आया जहरीला रसायन

बाद में विसरा की जांच कराई गई। रासायनिक जांच रिपोर्ट में शराब के साथ कीटनाशक जैसे जहरीले रसायन की मौजूदगी सामने आई। यह रिपोर्ट 7 अक्टूबर 2003 को सामने आई थी।

इसके बाद पुलिस ने मामले को हत्या के रूप में लेते हुए 22 अक्टूबर 2003 को एफआईआर दर्ज की। यानी घटना के करीब 74 दिन बाद हत्या का मामला दर्ज हुआ।

वैवाहिक विवाद और आर्थिक लेन-देन को बनाया आधार

अभियोजन पक्ष ने हत्या के पीछे वैवाहिक विवाद, कथित अवैध संबंध और करीब 2.20 लाख रुपये के आर्थिक विवाद को संभावित कारण बताया था। इसी आधार पर पत्नी पर पति को जहरीला पदार्थ देने का आरोप लगाया गया।

मामले की सुनवाई के बाद निचली अदालत ने बलजीत कौर को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की गई।

‘सिर्फ जहर की मौजूदगी से पत्नी को दोषी नहीं ठहरा सकते’

हाईकोर्ट ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करते हुए कहा कि यह तथ्य साबित होता है कि सरमुख सिंह की मृत्यु जहरीले पदार्थ के कारण हुई, लेकिन अभियोजन को यह महत्वपूर्ण कड़ी साबित करनी थी कि वह जहरीला पदार्थ आरोपी पत्नी ने ही दिया था।

अदालत ने पाया कि अभियोजन इस कड़ी को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। ऐसे में बलजीत कौर को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त ठोस साक्ष्य नहीं थे।

हाईकोर्ट ने निचली अदालत का फैसला रद्द करते हुए बलजीत कौर को आरोप से मुक्त कर दिया और संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

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