नई दिल्ली। झारखंड के दुमका में वर्ष 1981 में हुए दोहरे हत्याकांड से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने करीब 45 साल तक चली कानूनी प्रक्रिया पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने इसे न्यायिक व्यवस्था की विफलता करार देते हुए 70 वर्षीय दोषी साइमन सोरेन की सजा निलंबित कर उन्हें तत्काल रिहा करने का आदेश दिया।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि दोहरे हत्याकांड जैसे गंभीर अपराध में आरोपी को न्याय मिलने में असाधारण रूप से लंबा समय लगा। अदालत के अनुसार, आरोपियों को पहले करीब 22 वर्ष तक मुकदमे का सामना करना पड़ा, जबकि दोषसिद्धि के बाद अपील के निपटारे में भी लगभग 22 साल और दो महीने लग गए।
1981 में हुई थी दो लोगों की हत्या
मामला वर्ष 1981 में दुमका में हुई दो लोगों की हत्या से जुड़ा है। इस मामले में कुल छह आरोपी थे। मुकदमे की लंबी प्रक्रिया के दौरान पांच आरोपियों की अलग-अलग चरणों में मौत हो गई।
अदालत के अनुसार, छह आरोपियों में से दो की आरोप तय होने से पहले ही मौत हो गई थी। वहीं, चार दोषियों में से तीन की हाईकोर्ट में अपील लंबित रहने के दौरान मृत्यु हो गई। अब इस मामले में केवल साइमन सोरेन ही जीवित बचे हैं।
ट्रायल पूरा होने में लगे 12 साल
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि आरोप तय होने के बाद ट्रायल पूरा होने में करीब 12 वर्ष लग गए। इतना ही नहीं, लगभग 11 वर्षों के दौरान मामले को पांच बार एक अदालत से दूसरी अदालत में स्थानांतरित किया गया।
शीर्ष अदालत ने मामले के मूल रिकॉर्ड को भी चार सप्ताह के भीतर तलब किया था, ताकि पूरी न्यायिक प्रक्रिया की स्थिति को समझा जा सके।
बीमारियों से जूझ रहे हैं साइमन सोरेन
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भले ही मामला दोहरे हत्याकांड जैसे जघन्य अपराध से जुड़ा है, लेकिन पिछले करीब 45 वर्षों के दौरान आरोपी ने जिस लंबी कानूनी और व्यक्तिगत पीड़ा का सामना किया है, उसे भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
70 वर्षीय साइमन सोरेन कई बीमारियों से जूझ रहे हैं और हिरासत के दौरान अस्पताल में भर्ती हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने उनकी सजा निलंबित करते हुए निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया।
अदालत ने यह शर्त भी लगाई कि रिहाई के बाद वह किसी नए अपराध में शामिल नहीं होंगे।
