“47 केस, नाभा जेलब्रेक का दोषी और अब AAP नेता! CM मान ने गुरप्रीत सेखों को दिलाई पार्टी की सदस्यता”

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कांग्रेस ने कहा- गैंगस्टर संस्कृति को बढ़ावा देने का खतरनाक संदेश, अकाली दल बोला- ‘गैंगस्टरों से प्यार’ वाली नीति

फिरोजपुर। पंजाब के चर्चित 2016 नाभा जेलब्रेक मामले में दोषी ठहराए जा चुके गुरप्रीत सिंह सेखों के आम आदमी पार्टी (AAP) में शामिल होने को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। सेखों ने फिरोजपुर जिले के मुदकी क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान की मौजूदगी में AAP की सदस्यता ग्रहण की। मुख्यमंत्री ने मंच से उनका स्वागत किया।

गुरप्रीत सिंह सेखों लंबे समय तक आपराधिक मामलों और गैंगस्टर गतिविधियों को लेकर चर्चा में रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उसके खिलाफ 47 आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं। हालांकि, सेखों का कहना है कि उसने अपनी जिंदगी बदल ली है और अब वह सामाजिक कार्यों में सक्रिय है।

CM भगवंत मान ने किया स्वागत

मुदकी क्षेत्र में जनसभा को संबोधित करने पहुंचे मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गुरप्रीत सेखों का स्वागत किया। मान ने कहा कि लोगों की तालियां इस बात का संकेत हैं कि जनता पारंपरिक राजनीतिक दलों से मोहभंग महसूस कर रही है और अब वह काम की राजनीति चाहती है।

गुरप्रीत सेखों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को अपना “बड़ा भाई” बताते हुए कहा कि वह हर परिस्थिति में उनका साथ देगा। उसने अपने समर्थकों के साथ AAP में शामिल होने की बात कही।

कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना

गुरप्रीत सेखों के AAP में शामिल होने पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने पंजाब सरकार पर तीखा हमला बोला।

वड़िंग ने आरोप लगाया कि AAP इस कदम के जरिए गलत संदेश दे रही है। उन्होंने कहा कि गैंगस्टर संस्कृति को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए। उनके अनुसार, अपराध की पृष्ठभूमि वाले लोगों का राजनीतिक पुनर्वास समाज के लिए खतरनाक उदाहरण बन सकता है।

कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि यदि अपराध और वसूली जैसी गतिविधियों से जुड़े लोगों के लिए राजनीति में जगह बनाई जाती है, तो इससे पंजाब के युवाओं और समाज को क्या संदेश जाएगा।

अकाली दल ने भी घेरा

शिरोमणि अकाली दल ने भी गुरप्रीत सेखों के AAP में शामिल होने पर सवाल उठाए। अकाली दल ने कहा कि यदि गैंगस्टरों को लेकर AAP की यही नीति है तो पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

अकाली दल ने पंजाब पुलिस के एंटी-गैंगस्टर अभियान ‘गैंगस्टरों ते वार’ पर भी तंज कसते हुए कहा कि सरकार की कार्रवाई और राजनीतिक मंच पर ऐसे लोगों को जगह देने के बीच विरोधाभास दिखाई देता है।

गुरप्रीत सेखों ने कहा- ‘मैंने जिंदगी बदल ली है’

AAP में शामिल होने के बाद गुरप्रीत सेखों ने अपने बचाव में कहा कि उसने अपनी जिंदगी पूरी तरह बदल ली है। उसका दावा है कि उसके खिलाफ दर्ज पुराने मामलों का निपटारा हो चुका है और वह पिछले कई वर्षों से अपने क्षेत्र के लोगों की सेवा कर रहा है।

उसके समर्थकों का कहना है कि वह अब सामाजिक कार्यों में सक्रिय है। उनके अनुसार, वह जरूरतमंद परिवारों की बेटियों की शादी में मदद करने के अलावा बाढ़ जैसी आपदाओं के दौरान राशन, पशु चारा और राहत सामग्री उपलब्ध करवाता रहा है।

पहले अकाली दल के करीब रहा सेखों

गुरप्रीत सेखों का राजनीतिक संपर्क पहले शिरोमणि अकाली दल से भी रहा है। दिसंबर 2025 में हुए ब्लॉक समिति चुनाव के दौरान अकाली दल द्वारा सेखों समर्थित कुछ निर्दलीय उम्मीदवारों को समर्थन दिए जाने की बात सामने आई थी।

वहीं, विरोधी उम्मीदवारों की शिकायत के बाद सेखों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धाराओं के तहत गिरफ्तार किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। बाद में उसे जमानत मिल गई थी।

AAP विधायक से भी रहा विवाद

गुरप्रीत सेखों का स्थानीय AAP विधायक रजनीश दहिया के साथ भी पहले राजनीतिक मतभेद रहा है। उसने सार्वजनिक तौर पर AAP और स्थानीय विधायक की आलोचना की थी।

पिछले कुछ समय में हालांकि उसके राजनीतिक रुख में बदलाव देखने को मिला। वह कई मौकों पर मुख्यमंत्री भगवंत मान की तारीफ करता नजर आया। इससे पहले उसने 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर उतरने की घोषणा भी की थी।

अब AAP में शामिल होने के बाद उसके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

कौन है गुरप्रीत सिंह सेखों?

गुरप्रीत सिंह सेखों का नाम पंजाब के चर्चित गैंगस्टर मामलों में सामने आता रहा है। वह नवंबर 2016 के नाभा जेलब्रेक मामले के आरोपियों में शामिल था। हाई-सिक्योरिटी नाभा जेल पर हथियारबंद हमलावरों ने हमला कर छह कैदियों को फरार करा दिया था।

सेखों को फरवरी 2017 में गिरफ्तार किया गया था। बाद में मार्च 2023 में उसे नाभा जेलब्रेक मामले में दोषी ठहराए जाने और 10 साल की सजा सुनाए जाने की जानकारी सामने आई। नवंबर 2023 के अंत में उसे आगे की सुनवाई तक जमानत मिली थी।

उसका नाम गैंगस्टर सुखा काहलवां हत्याकांड में भी सामने आया था। इसके अलावा उसका संबंध गैंगस्टर शेरा खुबन और विक्की गौंडर जैसे नामों से जोड़ा जाता रहा है।

अब सबसे बड़ा सवाल- क्या अतीत पीछे छूट जाएगा?

गुरप्रीत सेखों के AAP में शामिल होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या उसकी पुरानी आपराधिक छवि को जनता स्वीकार करेगी। उसके समर्थकों का कहना है कि वह अपराध की दुनिया से बाहर निकल चुका है और अब सामाजिक कार्यों में सक्रिय है।

वहीं विपक्ष इस घटनाक्रम को पंजाब में कानून-व्यवस्था और गैंगस्टर संस्कृति से जोड़कर सरकार पर सवाल उठा रहा है। ऐसे में सेखों की AAP में एंट्री आने वाले दिनों में पंजाब की राजनीति में एक बड़ा विवाद बन सकती है।

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