54,928 करोड़ रुपये का चौथा बजट सीएम सुक्खू ने किया पेश : 1 लाख वंचित गरीब परिवारों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली

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एएम नाथ : शिमला।  हिमाचल प्रदेश के इतिहास में पहली बार प्रदेश ने अपने बजट में 3,586 करोड़ रुपए की कटौती की है। इसके तहत वित्त वर्ष 58,514 करोड़ रुपए से घटकर 2026-27 के लिए 54,928 करोड़ रुपए का बजट रह गया।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपने बजट भाषण में सरकार के निर्णय को उचित ठहराते हुए कहा कि बजट में कटौती का निर्णय पिछली बीजेपी सरकार की ओर से छोड़े गए बढ़ते कर्ज के जाल से निपटने के लिए लिया गया है। हिमाचल सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ अधिकारियों के वेतन को छह महीने के लिए अस्थाई कटौती की घोषणा की।

कितनी होगी कटौती?
हिमाचल सीएम सुक्खू ने कहा कि हम राज्य और उसके लोगों के लिए काम कर रहे हैं, न कि चुनावों के लिए। मैं सभी वर्गों से छह महीने के सहयोग की अपेक्षा करता हूं और मैं यह आश्वासन देता हूं कि हिमाचल प्रदेश आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ेगा। खर्च पर कड़े नियंत्रण के उपायों की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका अपना 50 प्रतिशत, मंत्रियों का 30 प्रतिशत और विधायकों का 20 प्रतिशत वेतन छह महीने के लिए टाल दिया जाएगा।

कर्मचारियों के वेतन में कितनी कटौती?
वहीं, मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव, सचिव और डीजीपी रैंक के अधिकारियों सहित वरिष्ठ नौकरशाहों के वेतन में 30 प्रतिशत की कटौती होगी, जबकि अन्य अधिकारियों के वेतन में 20 प्रतिशत की कटौती होगी। एडीजीपी से लेकर डीआईजी रैंक तक के पुलिस अधिकारियों के वेतन में भी 30 प्रतिशत की कटौती होगी। एसपी लेवल के अधिकारियों के वेतन में 20 प्रतिशत और अन्य कर्मचारियों के वेतन में 20 प्रतिशत की कटौती होगी। इसके अलावा कर्मचारियों के लिए नियोजित 3 प्रतिशत वेतन वृद्धि को भी छह महीने के लिए टाल दिया जाएगा। इसका अर्थ है कि इस अवधि के दौरान ग्रुप D के कर्मचारियों को भी यह वृद्धि नहीं मिलेगी। सरकार ने यह भी संकेत दिया कि वह न्यायपालिका से भी इसी तरह के स्वैच्छिक वेतन कटौती के उपायों को अपनाने की अपील कर सकती है।

केंद्र सरकार पर हमला बोला
राजस्व संबंधी चिंताओं को उजागर करते हुए सुक्खू ने राजस्व घाटा अनुदान को बंद करने के लिए केंद्र सरकार को दोषी ठहराया और इसे एक बड़ा झटका बताया। उन्होंने कहा कि हमें ‘ग्रीन बोनस’ दिया जाना चाहिए था। इसके बजाय राजस्व घाटा अनुदान (RDG) को रोक दिया गया है। इससे राज्य पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। उन्होंने जीएसटी मुआवजे के तहत लगभग 7,000 करोड़ रुपये के लंबित बकाये, GST युक्तिकरण के कारण अनुमानित 25,000 करोड़ रुपये के नुकसान, और बढ़ते कर्ज के बोझ का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार लोकलुभावन फैसलों से दूर हटेगी और वित्तीय सुदृढ़ीकरण पर ध्यान केंद्रित करेगी।

बीपीएल परिवार के लिए ऐलान
उन्होंने कहा कि पहाड़ी इलाकों के लोग मजबूत और जुझारू होते हैं और वे वित्तीय संकट का बहादुरी से सामना करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि 1952 के बाद यह पहली बार है कि केंद्र द्वारा राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) के बिना बजट पेश किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सबसे गरीब लोगों की पहचान करके उनके उत्थान का कार्य किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि राज्य की बीपीएल लिस्ट में विशेष रूप से सबसे गरीब परिवारों के नाम शामिल किए जाएंगे। वर्तमान में राज्य में 26.5 लाख बीपीएल परिवार हैं, और अब सरकार उनके उत्थान के लिए सबसे गरीब लोगों की पहचान कर रही है।

300 यूनिट मुफ्त बिजली
मुख्यमंत्री अपना सुखी परिवार योजना के तहत एक लाख वंचित सबसे गरीब परिवारों की सहायता की जाएगी। उन्होंने कहा कि इन परिवारों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली मिलेगी। इनमें से लगभग 27,000 परिवार जिनके पास पक्के मकान नहीं हैं, उन्हें मकान बनाने में मदद की जाएगी और गारंटी के तहत इन परिवारों की सभी महिलाओं को 1,500 रुपए दिए जाएंगे। जब मुख्यमंत्री ने कहा कि आरडीजी पर राज्य का समर्थन न करने वालों ने हिमाचल के हितों के साथ विश्वासघात किया है, तो विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व में भाजपा विधायक सदन के वेल में पहुंच गए। 20 मिनट के हंगामे के बाद सीएम ने फिर से अपना भाषण शुरू किया।

चार घंटे तक 134 पन्नों का बजट
सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपना चौथा बजट पेश करते हुए लगभग चार घंटे तक 134 पन्नों का बजट भाषण पढ़ा। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश राज्य को दी जाने वाली आरडीजी (अनुसंधान, विकास और विकास) योजनाओं का अनुदान रोकना राज्य की जनता के साथ अन्याय है।” मत्स्य पालन क्षेत्र में सीएम ने मुख्यमंत्री मछली सहायता योजना के तहत मछली खरीद के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 100 रुपए प्रति किलोग्राम घोषित किया। मुख्यमंत्री सुक्खू ने आगे कहा कि हिमाचल प्रदेश आस्था और धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र है। यहां श्रीनैना देवी, श्रीचिंतपूर्णी जी, श्रीबाबा बालक नाथ जी, श्रीज्वाला देवी जी और श्रीब्रजेश्वरी देवी जी जैसे विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ स्थित हैं। इसके अलावा किन्नर कैलाश, श्रीखंड कैलाश जैसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल भी प्रदेश में मौजूद हैं।

मंदिरों में 65 करोड़ रुपए खर्च करने की घोषणा
उन्होंने कहा कि प्रदेश के कोने-कोने में आस्था के केंद्र स्थित हैं और हर साल लाखों श्रद्धालु यहां आकर हिमाचल के शांत, स्वच्छ और सुंदर वातावरण में आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त करते हैं। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि प्रदेश के सभी प्रमुख मंदिरों को चरणबद्ध तरीके से विश्व स्तरीय धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। पहले चरण में बड़े मंदिरों के लिए विशेषज्ञों की मदद से परियोजनाएं तैयार की जाएंगी, जिन पर लगभग 500 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसके साथ ही श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए मंदिरों में 65 करोड़ रुपए खर्च करने की घोषणा भी की गई है।

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