8,200 घंटे उड़ाने वाला कैप्टन भी नहीं बचा सका 2,000 करोड़ का ड्रीमलाइनर, हादसे ने खोली भारतीय एविएशन की पोल

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अहमदाबाद के नीले आसमान पर दोपहर में एक ऐसा मंज़र बना, जिसने हर किसी की रूह तक हिला दी। हज़ारों फीट ऊपर उड़ान भरने वाला बोइंग 787 ड्रीमलाइनर, जो लाखों भारतीयों के लिए सपनों की उड़ान का प्रतीक माना जाता था, कुछ ही मिनटों में मौत का परचम लेकर नीचे गिर पड़ा।

सपनों का वो जहाज, जो लंदन की ओर उड़ान भर रहा था, अहमदाबाद के मेघानी नगर इलाके में तबाही बनकर टूटा। एयर इंडिया की फ्लाइट AI171 आज भारत के विमानन इतिहास का काला अध्याय बन गई।

इस हादसे की सबसे दर्दनाक बात ये रही कि विमान को उड़ाने वाले कैप्टन सुमित सभरवाल, भारत के बेहतरीन पायलट्स में गिने जाते थे। 8,200 घंटों की उड़ान का अनुभव रखने वाला ये कप्तान सिर्फ पायलट नहीं था, बल्कि लाइन ट्रेनिंग कैप्टन (LTC) भी था, यानी वो नए पायलट्स को ट्रेनिंग देने का काम करता था। उसकी जिम्मेदारी सिर्फ विमान उड़ाना नहीं, बल्कि दूसरों को उड़ाने के लिए तैयार करना भी थी। लेकिन जब आसमान से मौत उतरी तो अनुभव, तकनीक और जिम्मेदारियां सब ध्वस्त हो गईं। फ्लाइट AI171 की को-पायलट सीट पर बैठे थे फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंदर, जिनके पास करीब 1,100 घंटों का अनुभव था। हालांकि उनके करियर की ये उड़ान उनकी सबसे डरावनी और आखिरी उड़ान साबित हुई। टेकऑफ के महज दो मिनट बाद ही कॉकपिट से वो शब्द गूंजा जिसने पूरे एयर ट्रैफिक कंट्रोल का दिल दहला दिया – ‘मेडे’। यानी हम संकट में हैं।

ड्रीमलाइनर: उड़ान की शान, लेकिन आज बना मौत का सामान

बोइंग 787 ड्रीमलाइनर, जिसे दुनिया भर में ‘सपनों का जहाज’ कहा जाता है, वो आज कैसे ‘मौत का सामान’ बन गया, इस पर सवाल उठना लाज़िमी है। इस विमान की कीमत लगभग 2,000 करोड़ रुपये है। इतने पैसों में एक छोटा शहर बसाया जा सकता है, लेकिन आज वही ड्रीमलाइनर मेघानी नगर में कई घरों की कब्रगाह बन गया। फ्लाइट अहमदाबाद से लंदन गैटविक जा रही थी। लंबी दूरी की फ्लाइट होने की वजह से विमान पूरी तरह ईंधन से लोडेड था। टेकऑफ के कुछ ही पलों में तकनीकी गड़बड़ी ने विमान को संकट में डाल दिया। माना जा रहा है कि विमान ने एयरपोर्ट से कुछ दूरी पर बनी दीवार से टक्कर खाई और फिर बेकाबू होकर रिहायशी इलाकों में जा गिरा। चारों तरफ आग, धुआं और चीख-पुकार का माहौल बन गया। 242 यात्रियों में से 52 ब्रिटिश नागरिक* थे, जो अपने सपनों के साथ इस यात्रा पर निकले थे, लेकिन उनके लिए ये यात्रा लौटने की नहीं रही। हादसे के बाद मेघानी नगर की गलियों में सिर्फ राख और खामोशी बाकी बची। बच्चों के खिलौनों के बीच जलती हुई किताबें, सड़क पर बिखरे जूते और ऊपर से लटके हुए तार ऐसा दृश्य, जो सिर्फ फिल्मों में देखा जाता था, आज रियल में अहमदाबाद ने देख लिया।

क्या इतनी तकनीक भी फेल हो सकती है?

सबसे बड़ा सवाल ये है कि इतना अनुभवी कैप्टन, इतनी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, इतनी सख्त सुरक्षा चेकिंग के बाद भी आखिर ऐसी चूक कैसे हो गई? क्या यह पूरी तरह से टेक्निकल फेलियर था या किसी बाहरी कारण से ये हादसा हुआ? शुरुआती अंदाजे बता रहे हैं कि टेकऑफ के वक्त इंजन में गंभीर खराबी आ गई थी, जिसकी वजह से विमान कंट्रोल से बाहर हो गया। दूसरी आशंका ये भी है कि टेकऑफ के दौरान बर्ड हिट हुआ हो – यानी कोई बड़ा पक्षी इंजन से टकरा गया हो। हादसे की असली वजह का पता तभी चलेगा जब विमान का ब्लैक बॉक्स मिलेगा। लेकिन एक बात साफ है – इस हादसे ने भारतीय विमानन सुरक्षा प्रणाली पर बहुत बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर तब जब इतने अनुभवी पायलट की मौजूदगी में भी विमान नहीं बच सका।

अब सवाल बोइंग से भी

बोइंग कंपनी पहले भी कई बार सवालों के घेरे में आ चुकी है। 737 MAX हादसों के बाद दुनिया भर में उसकी तकनीक पर भरोसा कमजोर हुआ था। अब ड्रीमलाइनर जैसे प्रीमियम विमान की यह दुर्घटना बोइंग के लिए एक और झटका साबित हो सकती है। एयर इंडिया और भारत सरकार दोनों ने हादसे की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। DGCA और अमेरिकी एजेंसी NTSB (नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड) की टीमें भी इसमें शामिल होंगी।

एक हादसा… और हज़ारों सपनों का अंत

अहमदाबाद में आज सिर्फ एक विमान नहीं गिरा, हजारों सपनों का अंत हो गया। वो परिवार जो अपनों को लंदन भेज रहे थे, अब एयरपोर्ट पर उनकी लाशों का इंतज़ार कर रहे हैं। कैप्टन सुमित सभरवाल, जिन्होंने अपने करियर में न जाने कितनी उड़ानों को सुरक्षित अंजाम दिया था, आज अपनी आखिरी उड़ान में खुद मौत के सामने हार गए। आज भारत के विमानन इतिहास में एक नया सवाल जुड़ गया है – क्या हम उड़ानों में सचमुच सुरक्षित हैं? या फिर ये ड्रीमलाइनर भी सिर्फ सपनों का धोखा था?

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