अमृतसर। श्री गुरु ग्रंथ साहिब से जुड़े मामले में पंजाब सरकार द्वारा की जा रही राजनीति श्री अकाल तख्त साहिब को सीधी चुनौती है। इसे सिख पंथ कभी भी स्वीकार नहीं करेगा।
यह बात शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य राजिंदर सिंह मेहता, एडवोकेट भगवंत सिंह सियालका, सुरजीत सिंह भिट्टेवड़ और अमरजीत सिंह भलाईपुर ने कही।
शिरोमणि कमेटी के सदस्यों ने कहा कि इस मामले की जांच श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा गठित जांच कमेटी ने की थी और श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों के अनुसार शिरोमणि कमेटी की अंतरिम कमेटी ने डॉ. ईशर सिंह की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की है।
उस समय कुछ सिख विद्वानों और संगतों ने शिरोमणि कमेटी से आग्रह किया था कि चूंकि यह मामला श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी से संबंधित है, इसलिए इसमें किसी प्रकार की पुलिस कार्रवाई न की जाए, बल्कि शिरोमणि कमेटी स्वयं इस पर कार्रवाई करे।
पैसों की हेराफेरी से जुड़ा है मामला
एसजीपीसी सदस्यों ने कहा कि डॉ. ईशर सिंह की जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट है कि यह मामला कुछ कर्मचारियों द्वारा की गई पैसों की हेराफेरी और लापरवाही से जुड़ा हुआ है। इसे श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के स्वरूप गुम होने या बेअदबी के रूप में प्रचारित कर संगत को गुमराह नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि उस समय कांग्रेस पार्टी की सरकार थी और राजनीतिक लाभ के लिए श्री दरबार साहिब की ओर जाने वाले मार्ग पर बलदेव सिंह वडाला के माध्यम से धरना लगाया गया था।
अब आम आदमी पार्टी से संबंधित पंजाब विधानसभा के स्पीकर, मंत्री और विधायक उस धरने में पहुंचकर राजनीतिक लाभ के लिए पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के लिए कह रहे हैं, जो कि श्री अकाल तख्त साहिब को सीधी चुनौती है।
नाकामियों को छिपाने का हो रहा प्रयास
शिरोमणि कमेटी सदस्यों ने कहा कि मौजूदा पंजाब सरकार बुरी तरह विफल हो चुकी है और अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए सिख भावनाओं से खेलने से भी नहीं हिचक रही। उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री से कहा कि बार-बार ऐसे ड्रामे करके जनता का ध्यान सरकार की विफलताओं से हटाया नहीं जा सकता।
इसलिए श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों के अनुसार की गई कार्रवाई के बाद इस मामले में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप न किया जाए। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से भी अपील की कि वे सरकार के राजनीतिक हितों के लिए इस तरह की किसी भी कार्रवाई का हिस्सा न बनें।
